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UP: धनौरा में सेंचुरी की 4900 बीघा जमीन पर बांट दिए 800 पट्टे, एक अरब है इस जमीन की अनुमानित कीमत
Wed, 08 Jul 2026 04:07 PM IST
Sharukh Khan
संजीव गर्ग, अमर उजाला, अमरोहा
संजीव गर्ग, अमर उजाला, अमरोहा
Published by: Sharukh Khan
Updated Wed, 08 Jul 2026 04:07 PM IST
सार
अमरोहा के धनौरा में सेंचुरी की 4900 बीघा जमीन पर 800 पट्टे बांट दिए। आज के बाजार भाव के हिसाब से इस जमीन की अनुमानित कीमत एक अरब है। खुलासा होने पर साल 2002 में चार और एक वर्ष पहले 13 पट्टे निरस्त किए गए थे। अन्य मामले चकबंदी और राजस्व अदालतों में विचाराधीन है।
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अमरोहा में बड़ा जमीन घोटाला
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
अमरोहा में चरागाह, नदी समेत अन्य सरकारी जमीनें पट्टों की आड़ में खुर्दबुर्द करने के खुलासे के बीच मंडी धनौरा तहसील में भी बड़ा भूमि घोटाला सामने आया है। इस क्षेत्र में सेंचुरी के लिए आरक्षित 4900 बीघा जमीन पर मोटी रकम वसूल कर पट्टे दे दिए गए।
करीब 800 पट्टों के जरिये हुए इस खेल की जानकारी के बाद अलग-अलग इलाकों के 17 पट्टे निरस्त किए गए हैं, जबकि अन्य मामले चकबंदी और राजस्व अदालतों में विचाराधीन हैं। संपत्ति के जानकार मौजूदा दरों से इस जमीन की कीमत एक अरब के आसपास मान रहे हैं।
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करीब 800 पट्टों के जरिये हुए इस खेल की जानकारी के बाद अलग-अलग इलाकों के 17 पट्टे निरस्त किए गए हैं, जबकि अन्य मामले चकबंदी और राजस्व अदालतों में विचाराधीन हैं। संपत्ति के जानकार मौजूदा दरों से इस जमीन की कीमत एक अरब के आसपास मान रहे हैं।
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धनौरा में पट्टों की आड़ में जमीनों की धंधेबाजी का कारनामा साल 1991 से शुरु हुआ। सूत्र बताते हैं कि लगभग 10 साल तक अलग-अलग समय पर अलग नामों से पट्टे जारी किए गए। जानकारों के मुताबिक 10 साल तक पट्टे पर काबिज रहने के बाद पट्टाधारक उस पर स्थायी कब्जे के लिए (संक्रमणीय अधिकार) राजस्व कोर्ट में आवेदन कर सकता है।
इस तरह के आवेदन आने के बाद की गई फौरी जांच में सामने आया कि ये पट्टे गंगा के खादर से लेकर वन्य क्षेत्र तक की भूमि पर जारी किए गए थे। वन्य क्षेत्र की उस भूमि पर जिसे 1986 में सेंचुरी क्षेत्र घोषित किया जा चुका है। नियमानुसार सेंचुरी के लिए आरक्षित जमीन पर किसी हाल में पट्टे नहीं दिए जा सकते।
इससे संकेत मिले कि तत्कालीन राजस्व स्टाफ से लेकर अफसरों तक ने मोटी वसूली करके सरकारी जमीन को पट्टों के नाम पर निजी हाथों में सौंप दिया। सेंचुरी क्षेत्र की जिन जमीनों को पट्टे पर दिया गया है, उनमें वन्य क्षेत्र के चरागाह, झील, तालाब और खादर के इलाके हैं।
इसके बाद 800 पट्टे और उससे जुड़ी 4900 बीघा जमीन को जांच के दायरे में लेकर राजस्व अदालतों और चकंबदी कोर्ट में सुनवाई शुरू की गई। जांच आगे बढ़ाते हुए सालभर पहले 13 और वर्ष 2002 में चार पट्टे निरस्त किए गए। निरस्तीकरण की जद में आए 13 पट्टे घेरकुंडा में तालाब की भूमि पर थे, जबकि रमपुरा में चार पट्टे खादर की भूमि पर। दोनों ही सेंचुरी आरक्षित इलाके हैं।
पट्टों में मनमानी प्रभावित धनौरा का क्षेत्र
रायवानादल्लीपुर, गुलालपुर एहतमाली, रसूलपुर भांवर एहतमाली, गंडावली, आजमपुर, शेरपुर, मुकारमपुर, देवीपुरा, सीपीया फार्म, शाहजहांपुर छात, दारानगर, जैथल, घेरकुंडा।
रायवानादल्लीपुर, गुलालपुर एहतमाली, रसूलपुर भांवर एहतमाली, गंडावली, आजमपुर, शेरपुर, मुकारमपुर, देवीपुरा, सीपीया फार्म, शाहजहांपुर छात, दारानगर, जैथल, घेरकुंडा।
एसडीएम बोले-नियम विरुद्ध पट्टे निरस्त किए जाएंगे
मंडी धनौरा के एसडीएम शैलेश कुमार दुबे का कहना है कि कुछ पट्टे नियम विरुद्ध किए जाने की जानकारी के बाद से सख्ती जारी है। इस तरह के सभी पट्टे निरस्त किए जाएंगे। अलग-अलग स्तर पर सुनवाई चल रही है। इसी क्रम में निरस्तीकरण चल रहा है।
राम मंदिर में चढ़ावा चोरी मामले में ट्रस्टी महंत दिनेंद्र दास ने बड़ा दावा किया है।। उन्होंने कहा कि चंपत राय के इस्तीफे की कॉपी नहीं दिखाई गई है। महंत दिनेंद्र दास ने आरोप लगाया कि चंपत राय का इस्तीफा ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंद देव गिरी ने लिया और पूरे घटनाक्रम में उनकी ही प्रमुख भूमिका रही।