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रामपुर के कर्नल यूनुस ने लड़ीं विश्वयुद्ध से लेकर 1965 की जंग, जिलाधिकारी ने बताया इतिहास, पोस्ट किए दुर्लभ चित्र

अमर उजाला नेटवर्क, रामपुर Published by: Mohit Mudgal Updated Sun, 12 Apr 2020 07:55 PM IST
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Colonel Yunus of Rampur fought World War to 1965 war
देश के प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद के साथ साहबजादा कर्नल यूनुस खां और उनकी पत्नी - फोटो : अमर उजाला
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साहबजादा कर्नल यूनुस खां कौन थे? रामपुर के इस सपूत के बारे में कोई भी पूरी जानकारी नहीं दे सका। आधी अधूरी जानकारी के साथ कुछ लोगों ने इतिहास से जुड़े तथ्य सामने लाने की कोशिश की, लेकिन नाकाम रहे। कुछ लोगों ने बताया कि वो रामपुर रियासत के मुख्यमंत्री रहे सर अब्दुस समद खां के बेेटे थे, तो किसी ने बताया कि पाकिस्तान के पूर्व विदेश मंत्री साहबजादा याकूब के भाई थे। ये तथ्य तो सही हैं, लेकिन उनके बारे में किसी को पूरी जानकारी नहीं थी। .

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दरअसल लॉकडाउन के दौरान जिलाधिकारी आंजनेय कुमार सिंह ने लोगों को रचनात्मक क्रिया-कलापों से जोड़े रखने के लिए अपने फेसबुक एकाउंट के माध्यम से क्रिएटिव चैंलेंज की मुहिम शुरू की है। इसी के तहत उन्होंने लोगों से कर्नल यूनुस खां के बारे में जानकारी मांगी थी। दो दिन तक लोग इसको लेकर माथापच्ची करते रहे लेकिन सही जानकारी जुटाने में नाकाम रहे।
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तीसरे दिन जिलाधिकारी ने ही उनके बारे में महत्वपूर्ण तथ्य उजागर करते दुर्लभ फोटो पोस्ट किए हैं। 1942 में साहबजादा यूनुस खां ने ब्रिटिश इंडियन आर्मी ज्वाइन की थी। द्वितीय विश्व युद्ध में उनकी तैनाती बर्मा (रंगून) में थी, 1945 तक इटली में तैनात रहे। द्वितीय विश्व युद्ध खत्म होने के बाद इंग्लैंड गए, जहां लार्ड माउंटन बेटेन से मिले। ब्रिटिश भारत वायसराय बनने के लार्ड ने उन्हें अपना एडीसी नियुक्त किया। 1947 विभाजन के वक्त उनके छोटे भाई साहबजादा याकूब खां पाकिस्तान चले गए।

गढ़वाल रेजिमेंट का हिस्सा बने यूनुस खां

Colonel Yunus of Rampur fought World War to 1965 war
राष्ट्रपति भवन में प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद के साथ अपनी शादी का केक काटते कर्नल यूनुस खां और उनकी पत्नी - फोटो : अमर उजाला

यूनुस खां भारत में ही रहे और भारतीय सेना की गढ़वाल रेजिमेंट का हिस्सा बने। 1948 के भारत-पाक युद्ध में दोनों भाई एक-दूसरे खिलाफ जंग लड़े। उस समय याकूब पाकिस्तान आर्मी में थे। कर्नल युनूस खां भारत के अंतिम गर्वनर जनरल सी राजगोपालाचारी और देश के पहले राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद के एडीसी भी रहे। उन्होंने जम्मू-कश्मीर राज्य के गर्वनर के एडीसी के रूप में भी कार्य किया।

1962 के भारत-चीन युद्ध के दौरान वह कश्मीर में तैनात थे। 1965 के भारत-पाक युद्ध के समय वह बरेली में नियुक्त थे। 1969 में कर्नल के पद से वो सेवानिवृत्त हुए थे। इसके बाद वह अलीगढ़ चले गए थे। वहीं इनके छोटे भाई साहबजादा याकूब सेना की नौकरी के बाद राजनीति में आ गए थे और वह पाकिस्तान के विदेश मंत्री तक रहे थे। वहीं यूनुस खां सेवानिवृत्त होने के बाद गुमनामी की दुनिया में खो गए। 1984 में उनका इंतकाल हो गया था। रामपुर के लोग भी अपने उस सपूत को भूल गए। जिलाधिकारी के प्रयास के बाद उनके बारे में रामपुर के लोगों को पता चल पाया है।

रामपुर के वीर सपूत और सच्चे देशभक्त ये यूनुस : आंजनेय कुमार सिंह

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साहबजादा कर्नल यूनुस खां - फोटो : अमर उजाला

जिलाधिकारी, आंजनेय कुमार सिंह  ने बताया कि साहबजादा कर्नल यूनुस खां रामपुर के वीर सपूत और सच्चे देशभक्त थे। देश के प्रति उनकी सेवाओं और योगदान को हमेश याद रखा जाना चाहिए। इसी सोच के तहत लॉकडाउन के दौरान उनके बारे में खोज को क्रिएटिव चैलेंज का हिस्सा बनाया गया था। कुछ लोगों ने बहुत सारे तथ्य जुटाए और जो ऐसा नहीं कर सके। उनको इतिहास से रूबरू कराया गया। हमारी पोस्ट पढ़ने के बाद उनके परिवार ने अपनी प्रशंसा जाहिर की। 

पूर्व मंत्री नवाब काजिम अली खां ने कहा कि रामपुर रियासत को यह गौरव प्राप्त है कि यहां के लोगों ने हर क्षेत्र में देश और अपनी सरजमीं का नाम दुनिया भर में रोशन किया है। साहबजादा कर्नल याकूब खां का संबंध रामपुर के शाही घराने से था और उनकी देश के प्रति वफादारी और लगाव एक मिसाल है। लॉकडाउन के दौरान जिलाधिकारी ने उनके बारे में रुचि लेकर जिस प्रकार रामपुर के लोगों को इतिहास से रुबरू कराया है वह सराहनीय है। 

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