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Moradabad News: फेफड़ों में मिला पानी तो भर्ती नहीं, मेरठ के लिए लिखा रेफर
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मुरादाबाद। स्वास्थ्य सेवाओं की बेहतरी के दावों पर जिला अस्पताल की हकीकत सवाल खड़े कर रही है। रविवार को करुला जयंतीपुर निवासी नदीम को सांस लेने में दिक्कत होने पर जिला अस्पताल की इमरजेंसी में भर्ती कराया गया। परिजनों ने एक्स-रे दिखाए तो कुछ ही देर में चिकित्सकों ने रेफर पर्चा थमा दिया। उन्हें बताया गया कि फेफड़ों का पानी निकालने और उसकी जांच की सुविधा केवल मेरठ मेडिकल कॉलेज में उपलब्ध है।
जबकि जिला अस्पताल में फिजिशियन और चेस्ट फिजिशियन दोनों तैनात हैं। उनके देखे बिना मरीज के पर्चे पर रेफर लिख दिया गया। यह कोई पहला मामला नहीं है। जिला अस्पताल में लगभग रोज ऐसी स्थिति बनती है। चिंताजनक बात यह है कि कई मरीज आर्थिक तंगी या गंभीर हालत के कारण लंबी दूरी तय करने की स्थिति में नहीं होते, फिर भी उन्हें रेफर कर दिया जाता है। रविवार को मरीज नदीम के परिजनों के काफी कहने के बाद रेफर से रोका गया। दूसरी लापरवाही यह रही कि पर्चे पर उस चिकित्सक का नाम दर्ज कर दिया गया, जिनकी ड्यूटी डिप्टी सीएम की फ्लीट में लगी थी। ऐसे में इलाज के लिए परिजन घंटों परेशान रहे। बाद में जब ईएमओ को जानकारी हुई कि संबंधित डॉक्टर डिप्टी सीएम की फ्लीट ड्यूटी में हैं। तब जाकर उनसे फोन पर बात की गई और मरीज के लिए दवाएं पूछी गईं। फिलहाल मरीज जिला अस्पताल में ही भर्ती है। एसआईसी डॉ. प्रदीप वार्ष्णेय का कहना है कि मामले में संबंधित डॉक्टर से पूछताछ करेंगे।
जबकि जिला अस्पताल में फिजिशियन और चेस्ट फिजिशियन दोनों तैनात हैं। उनके देखे बिना मरीज के पर्चे पर रेफर लिख दिया गया। यह कोई पहला मामला नहीं है। जिला अस्पताल में लगभग रोज ऐसी स्थिति बनती है। चिंताजनक बात यह है कि कई मरीज आर्थिक तंगी या गंभीर हालत के कारण लंबी दूरी तय करने की स्थिति में नहीं होते, फिर भी उन्हें रेफर कर दिया जाता है। रविवार को मरीज नदीम के परिजनों के काफी कहने के बाद रेफर से रोका गया। दूसरी लापरवाही यह रही कि पर्चे पर उस चिकित्सक का नाम दर्ज कर दिया गया, जिनकी ड्यूटी डिप्टी सीएम की फ्लीट में लगी थी। ऐसे में इलाज के लिए परिजन घंटों परेशान रहे। बाद में जब ईएमओ को जानकारी हुई कि संबंधित डॉक्टर डिप्टी सीएम की फ्लीट ड्यूटी में हैं। तब जाकर उनसे फोन पर बात की गई और मरीज के लिए दवाएं पूछी गईं। फिलहाल मरीज जिला अस्पताल में ही भर्ती है। एसआईसी डॉ. प्रदीप वार्ष्णेय का कहना है कि मामले में संबंधित डॉक्टर से पूछताछ करेंगे।
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