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Moradabad News: अब सिर्फ 69 दिनों की प्रधानी, 13 दिन में आठ करोड़ खपाने की चुनौती
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मुरादाबाद। ग्राम पंचायतों का कार्यकाल 26 मई 2026 को पूरा हो रहा है। इस हिसाब से अब सिर्फ 69 दिन की प्रधानी बची है। घटते दिनों के बीच जिले की 643 ग्राम पंचायतों में विकास कार्यों के लिए मिले आठ करोड़ रुपये खपाने की चुनौती आ गई है। इस राशि को ग्राम प्रधानों और सचिवों को साझे प्रस्ताव के जरिये 31 मार्च तक खर्च किया जाना है। वित्तीय वर्ष के बचे हुए दिनों में इस धनराशि को विकास कार्यों के मद में खपाने में सचिवों की कमी आड़े आ रही है।
हालात देखकर कुछ ग्राम पंचायतों को मिलाकर क्लस्टर बनाए गए हैं। इन क्लस्टरों में मौजूदा सचिवों को बांट दिया है। देखना दिलचस्प होगा कि यह व्यवस्था बाकी समय में कितनी राशि को कितने सही तरीके से विकास के सटीक नतीजे तक पहुंचा पाती है।
जिला पंचायत राज अधिकारी कार्यालय की जानकारी के अनुसार मुरादाबाद जिले में कुल ग्राम पंचायतें 643 हैं। इन ग्राम पंचायतों में 5वें वित्त आयोग व 15वें वित्त आयोग से मिली राशि के सापेक्ष तो काम करा लिए गए हैं लेकिन 5वें राज्य वित्त आयोग से मिली अनुदान सहायता राशि के अभी दो करोड़ रुपये और 15वें वित्त आयोग की किस्तों में मिली राशि के छह करोड़ रुपये के काम अंजाम तक नहीं पहुंच सके हैं। इस बीच प्रधानों का कार्यकाल पूरा होने का समय तेजी से करीब आ रहा है। लिहाजा डीपीआरओ की ओर से प्रधानों और सचिवों को बकाया धनराशि से विकास कार्य 31 मार्च-2026 तक पूरे कराके उपभोग प्रमाण पत्र ऑनलाइन अपलोड करने के निर्देश जारी कर दिए गए हैं।
बची हुई धनराशि को सिर्फ 13 दिन में विकास प्रस्तावों पर व्यय करने में आड़े आ रही है सचिवों की कमी
विभागीय रिकार्ड बता रहा है कि जिले में 643 ग्राम पंचायतों के सापेक्ष सिर्फ 127 सचिव हैं। बिना सचिव के सिर्फ प्रधान विकास प्रस्तावों व जरूरी वित्तीय स्वीकृतियों को अंजाम तक नहीं पहुचा सकते। लिहाजा 10 से 15 ग्राम पंचायतों के क्लस्टर बनाकर मौजूदा सचिवों को तैनात किया गया है। यानी अब ग्राम पंचायत नहीं, क्लस्टर सचिव जैसा पद हो गया है। एक सचिव के जिम्मे अब एक से अधिक ग्राम पंचायतों का काम है। अब सबकी निगाह इस पर है कि यह प्रयोग ग्राम पंचायतों के हिस्से का बचा धन 31 मार्च तक कैसे सदुपयोग में लाता है।
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- जिले की 643 ग्राम पंचायतों में सचिवों की भारी कमी है। अब ग्राम पंचायतों के साथ-साथ गोशाला का संचालन भी सचिवों के जिम्मे है। इसके तहत हर रोज कुछ एंट्री और जरूरी आंकड़े पोर्टल पर अपलोड करने होते हैं। यदि अपलोड न कर पाएं तो गोशाला के चारे आदि का खर्चा नहीं मिलता। अधिकारी कार्रवाई कर देते हैं। अब सचिवों का प्रयास रहेगा कि बची राशि का 31 मार्च तक सदुपयोग हो जाए। फिर भी बचे तो अगले वित्तीय वर्ष के लिए शिफ्ट हो जाए। पैसा वापस न जाने पाए, यह सबकी प्राथमिकता रहेगी।
- विनोद कुमार, अध्यक्ष - ग्राम विकास अधिकारी एसोसिएशन, मुरादाबाद
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हालात देखकर कुछ ग्राम पंचायतों को मिलाकर क्लस्टर बनाए गए हैं। इन क्लस्टरों में मौजूदा सचिवों को बांट दिया है। देखना दिलचस्प होगा कि यह व्यवस्था बाकी समय में कितनी राशि को कितने सही तरीके से विकास के सटीक नतीजे तक पहुंचा पाती है।
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जिला पंचायत राज अधिकारी कार्यालय की जानकारी के अनुसार मुरादाबाद जिले में कुल ग्राम पंचायतें 643 हैं। इन ग्राम पंचायतों में 5वें वित्त आयोग व 15वें वित्त आयोग से मिली राशि के सापेक्ष तो काम करा लिए गए हैं लेकिन 5वें राज्य वित्त आयोग से मिली अनुदान सहायता राशि के अभी दो करोड़ रुपये और 15वें वित्त आयोग की किस्तों में मिली राशि के छह करोड़ रुपये के काम अंजाम तक नहीं पहुंच सके हैं। इस बीच प्रधानों का कार्यकाल पूरा होने का समय तेजी से करीब आ रहा है। लिहाजा डीपीआरओ की ओर से प्रधानों और सचिवों को बकाया धनराशि से विकास कार्य 31 मार्च-2026 तक पूरे कराके उपभोग प्रमाण पत्र ऑनलाइन अपलोड करने के निर्देश जारी कर दिए गए हैं।
बची हुई धनराशि को सिर्फ 13 दिन में विकास प्रस्तावों पर व्यय करने में आड़े आ रही है सचिवों की कमी
विभागीय रिकार्ड बता रहा है कि जिले में 643 ग्राम पंचायतों के सापेक्ष सिर्फ 127 सचिव हैं। बिना सचिव के सिर्फ प्रधान विकास प्रस्तावों व जरूरी वित्तीय स्वीकृतियों को अंजाम तक नहीं पहुचा सकते। लिहाजा 10 से 15 ग्राम पंचायतों के क्लस्टर बनाकर मौजूदा सचिवों को तैनात किया गया है। यानी अब ग्राम पंचायत नहीं, क्लस्टर सचिव जैसा पद हो गया है। एक सचिव के जिम्मे अब एक से अधिक ग्राम पंचायतों का काम है। अब सबकी निगाह इस पर है कि यह प्रयोग ग्राम पंचायतों के हिस्से का बचा धन 31 मार्च तक कैसे सदुपयोग में लाता है।
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- जिले की 643 ग्राम पंचायतों में सचिवों की भारी कमी है। अब ग्राम पंचायतों के साथ-साथ गोशाला का संचालन भी सचिवों के जिम्मे है। इसके तहत हर रोज कुछ एंट्री और जरूरी आंकड़े पोर्टल पर अपलोड करने होते हैं। यदि अपलोड न कर पाएं तो गोशाला के चारे आदि का खर्चा नहीं मिलता। अधिकारी कार्रवाई कर देते हैं। अब सचिवों का प्रयास रहेगा कि बची राशि का 31 मार्च तक सदुपयोग हो जाए। फिर भी बचे तो अगले वित्तीय वर्ष के लिए शिफ्ट हो जाए। पैसा वापस न जाने पाए, यह सबकी प्राथमिकता रहेगी।
- विनोद कुमार, अध्यक्ष - ग्राम विकास अधिकारी एसोसिएशन, मुरादाबाद