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गंगा का गंगा को ही अर्पण: 845 बीघा जमीन पर हुए सभी पट्टे निरस्त, बर्खास्त एसडीएम समेत इन पर कसा शिकंजा
Sat, 18 Jul 2026 03:56 PM IST
Sharukh Khan
अमर उजाला नेटवर्क, संभल
अमर उजाला नेटवर्क, संभल
Published by: Sharukh Khan
Updated Sat, 18 Jul 2026 03:56 PM IST
सार
संभल में 845 बीघा जमीन पर सभी पट्टे निरस्त हो गए हैं। 2019 में तत्कालीन एसडीएम, तहसीलदार के अलावा चकबंदी अधिकारियों ने जमीन की श्रेणी 162 पट्टे बदलकर कर दिए थे। 17 पट्टे 2023 में निरस्त हो चुके थे, बाकी पर अब जांच के बाद कार्रवाई की गई है।
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सरकारी जमीन की गड़बड़ी जेल भेज गए आरोपी
- फोटो : संवाद
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विस्तार
संभल में गंगा की जमीन फिर से गंगा को ही वापस कर दी गई । 2019 में गुन्नौर तहसील के गांव सुखैला में रेतीली 845 बीघा जमीन की पहले श्रेणी बदली गई और फिर उसे कृषि योग्य बताकर 162 पट्टे कर दिए गए। जमीन के इस पूरे गोलमाल में आरोपी बनाए गए तत्कालीन एसडीएम, तहसीलदार, चकबंदी अधिकारी, राजस्व निरीक्षक समेत छह लोगों को जेल भेजा जा चुका है।
शनिवार को डीएम द्वारा इन सभी पट्टों को निरस्त कर दिया गया है। डीएम अंकित खंडेलवाल ने बताया कि पट्टे निरस्त कर गंगा की जमीन को मूल श्रेणी में दर्ज कर दिया गया है। दरअसल ग्राम पंचायत असदपुर का गैरआबाद गांव सुखैला गंगा के तट पर बसा है।
इस गांव में अधिकारी व बिचौलियों की मिलीभगत से 29 जून 2019 को 162 लोगों के नाम पट्टे आवंटित कर दिए गए थे। अफसरों ने जमीन की श्रेणी ही बदल डाली थी। गंगा की रेतीली जमीन को कृषि योग्य बताकर पूरा राजस्व रिकार्ड ही उलट पुलट कर डाला था। हालांकि लंबी जांच के बाद इसमें से 17 पट्टे 2023 में निरस्त हो गए थे।
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शनिवार को डीएम द्वारा इन सभी पट्टों को निरस्त कर दिया गया है। डीएम अंकित खंडेलवाल ने बताया कि पट्टे निरस्त कर गंगा की जमीन को मूल श्रेणी में दर्ज कर दिया गया है। दरअसल ग्राम पंचायत असदपुर का गैरआबाद गांव सुखैला गंगा के तट पर बसा है।
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इस गांव में अधिकारी व बिचौलियों की मिलीभगत से 29 जून 2019 को 162 लोगों के नाम पट्टे आवंटित कर दिए गए थे। अफसरों ने जमीन की श्रेणी ही बदल डाली थी। गंगा की रेतीली जमीन को कृषि योग्य बताकर पूरा राजस्व रिकार्ड ही उलट पुलट कर डाला था। हालांकि लंबी जांच के बाद इसमें से 17 पट्टे 2023 में निरस्त हो गए थे।
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अब फिर से शिकायतें गूंजने पर जांच शुरू कराई गई थी। राजस्व अफसरों की टीम ने जब रिकार्ड का मिलान कराया और स्थलीय निरीक्षण किया तो पता चला कि गंगा की जमीन पर नियमों को अनदेखा कर यह पट्टे किए गए हैं।
जमीन से इस पूरे खेल में गुन्नौर के तत्कालीन बर्खास्त एसडीएम ओमवीर सिंह, तत्कालीन तहसीलदार करम सिंह चौहान, चकबंदी के अधिकारी व लेखपाल और राजस्व के लेखपालों की भूमिका सामने आई। इसके चलते हल्का लेखपाल ने गुन्नौर कोतवाली में नामजद 19 आरोपियों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई थी।
इसके बाद इसकी विस्तृत जांच कराई गई और अभिलेख खंगाले गए थे। इसमें सामने आया कि गंगा की जमीन पर पट्टे नहीं किए जा सकते थे, इसलिए श्रेणी को भी बदल दिया गया था। इसमें राजस्व और चकबंदी विभाग के अधिकारी व कर्मचारियों की मिलीभगत रही थी।
अब तक इनको भेजा गया है जेल
पुलिस ने तत्कालीन बर्खास्त एसडीएम ओमवीर सिंह, तत्कालीन चकबंदी अधिकारी महेंद्र सिंह व चकबंदी लेखपाल भीमराव सिंह, तत्कालीन राजस्व निरीक्षक राजवीर सिंह एवं पूर्व ग्राम प्रधान असदपुर विक्रांत एवं अधिवक्ता जय भारद्वाज को 3 जुलाई को गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया था। जहां से जेल भेज दिया गया था।
पुलिस ने तत्कालीन बर्खास्त एसडीएम ओमवीर सिंह, तत्कालीन चकबंदी अधिकारी महेंद्र सिंह व चकबंदी लेखपाल भीमराव सिंह, तत्कालीन राजस्व निरीक्षक राजवीर सिंह एवं पूर्व ग्राम प्रधान असदपुर विक्रांत एवं अधिवक्ता जय भारद्वाज को 3 जुलाई को गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया था। जहां से जेल भेज दिया गया था।
भूमि मूल अभिलेखों में श्रेणी-5(3) (झाऊ) एवं श्रेणी-6(4) (रेता) के रूप में दर्ज थी। इसके बावजूद वर्ष 2019 में इसका पट्टा स्वीकृत कर दिया गया था। जो पूरी तरह अवैध था। इन पट्टों को प्रक्रिया के तहत निरस्त कर दिया गया है। गंगा की जमीन की जांच लगातार जारी है। जो भी मामले सामने आएंगे उसमें सख्त कार्रवाई करेंगे।- अंकित खंडेलवाल, डीएम, संभल
अब सूरपुर में मुक्त कराई गई गंगा की भूमि
गुन्नौर तहसील के रजपुरा ब्लॉक अंतर्गत गांव सूरपुर में 1991 में गंगा की 31 बीघा जमीन पर चार लोगों को दिए गए पट्टे एडीएम ने निरस्त कर दिए हैं। नियमों की अनदेखी कर श्रेणी बदल दी गई थी और आवंटन कर दिया गया था।
गुन्नौर तहसील के रजपुरा ब्लॉक अंतर्गत गांव सूरपुर में 1991 में गंगा की 31 बीघा जमीन पर चार लोगों को दिए गए पट्टे एडीएम ने निरस्त कर दिए हैं। नियमों की अनदेखी कर श्रेणी बदल दी गई थी और आवंटन कर दिया गया था।
यह मामला भी प्रशासन तक पहुंचा तो इसकी जांच कराई गई। इसमें खेल सामने आया कि वर्तमान राजस्व अभिलेख खतौनी में यह भूमि असंक्रमणीय भूमिधर के रूप में अंकित थी। यानि ऐसी जमीन जिस पर खेती की जा सकती है लेकिन बेची या दान नहीं दी जा सकती। जबकि जोत चकबंदी आकार पत्र 41 व 45 में इसे श्रेणी-6 (1) जलमग्न भूमि (नदी) के रूप में दर्ज किया गया था। जांच में यह तथ्य सामने आए तो पूरा खेल सामने आ गया। इसमें भी अधिकारियों की मिलीभगत रही।
एडीएम सत्यप्रिय सिंह ने गुन्नौर एसडीएम की 16 अप्रैल को मिली रिपोर्ट के आधार पर पट्टे निरस्त करने कार्रवाई की है। एडीएम ने बताया कि सभी चार पट्टों का आवंटन उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता 2006 की धारा-128 के तहत नियम विरुद्ध पाया गया था।
यह पट्टे गांव सूरपुर निवासी श्रीनिवास, शेर सिंह, शकुंतला और गांव पतेई कायस्थ निवासी प्रकाशचंद्र को आवंटित किए गए थे। इनका आवंटन 17 नवंबर 1991 में किया गया था। आवंटन की पत्रावली सुरक्षित है। एडीएम ने कहा कि पट्टे निरस्त करने के साथ ही राजस्व अभिलेखों में पूर्व स्थिति बहाल करने का आदेश कर दिया है।
श्रेणी बदलकर 31 बीघा जमीन पर पट्टे किए गए थे, इनको निरस्त कर दिया गया है। भूमि को नदी की श्रेणी में दर्ज करने का आदेश किया है। आवंटन नियमों के खिलाफ जाकर नदी की जमीन पर किया गया था। -सत्यप्रिय सिंह, एडीएम, संभल