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Moradabad News: पांच साल पहले बिल्डिंग बनकर हुई तैयार...अभी तक एमआरआई मशीन का इंतजार
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मुरादाबाद। जिला अस्पताल में मरीजों को एमआरआई जांच के लिए भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। 97 लाख रुपये की लागत से बना एमआरआई भवन पांच साल से खाली पड़ा है। यहां मशीन नहीं होने के कारण मरीज निजी लैब में एमआरआई कराने को मजबूर हैं। जिसमें आठ से दस हजार रुपये का अतिरिक्त खर्च उठाना पड़ रहा है।
जिला अस्पताल में ओपीडी के सामने 2021 में एमआरआई भवन का निर्माण किया गया था। जिसमें करीब 97 लाख रुपये का खर्च आया था। भवन तैयार होने के बावजूद अब तक एमआरआई मशीन स्थापित नहीं की जा सकी है। इसके कारण मरीजों को निजी लैब में महंगी जांच कराने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। जिला अस्पताल में आने वाले गरीब और मध्यम वर्ग के मरीजों के लिए यह एक बड़ी समस्या बन गई है। उन्हें निजी लैब में हजारों रुपये खर्च करने पड़ते हैं। यह स्थिति स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता पर गंभीर सवाल उठाती है। सरकारी संसाधनों का उपयोग नहीं होने से जनता को सीधा नुकसान हो रहा है। भवन बने पांच साल तो बीत गए हैं लेकिन अभी यह साफ नहीं हो पाया है कि आने वाले कितने दिन, माह या साल में एमआरआई मशीन लग जाएगी। जिला अस्पताल के डॉक्टर मेरठ मेडिकल कॉलेज को रेफर करते हैं लेकिन वहां भी कई कई दिन बाद नंबर आता है। जिस कारण लोग मजबूर होकर निजी लैब में जा रहे हैं। मुरादाबाद में प्रति दिन 2000 से ज्यादा मरीज पहुंचते हैं इनमें 15 से 20 मरीज जैसे होते हैं जिनकी एमआरआई जांच कराना जरूरी होता है।
स्वास्थ्य निदेशालय को प्रस्ताव भेजा जा चुका है। एमआरआई मशीन खरीदने की प्रक्रिया शासन स्तर पर चल रही है। उम्मीद है जल्द ही एमआरआई मशीन मिल जाएगी। मशीन स्थापित होने पर मरीजों को सीधा लाभ मिलेगा।
- डॉ. संगीता गुप्ता, प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक
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जिला अस्पताल में ओपीडी के सामने 2021 में एमआरआई भवन का निर्माण किया गया था। जिसमें करीब 97 लाख रुपये का खर्च आया था। भवन तैयार होने के बावजूद अब तक एमआरआई मशीन स्थापित नहीं की जा सकी है। इसके कारण मरीजों को निजी लैब में महंगी जांच कराने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। जिला अस्पताल में आने वाले गरीब और मध्यम वर्ग के मरीजों के लिए यह एक बड़ी समस्या बन गई है। उन्हें निजी लैब में हजारों रुपये खर्च करने पड़ते हैं। यह स्थिति स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता पर गंभीर सवाल उठाती है। सरकारी संसाधनों का उपयोग नहीं होने से जनता को सीधा नुकसान हो रहा है। भवन बने पांच साल तो बीत गए हैं लेकिन अभी यह साफ नहीं हो पाया है कि आने वाले कितने दिन, माह या साल में एमआरआई मशीन लग जाएगी। जिला अस्पताल के डॉक्टर मेरठ मेडिकल कॉलेज को रेफर करते हैं लेकिन वहां भी कई कई दिन बाद नंबर आता है। जिस कारण लोग मजबूर होकर निजी लैब में जा रहे हैं। मुरादाबाद में प्रति दिन 2000 से ज्यादा मरीज पहुंचते हैं इनमें 15 से 20 मरीज जैसे होते हैं जिनकी एमआरआई जांच कराना जरूरी होता है।
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स्वास्थ्य निदेशालय को प्रस्ताव भेजा जा चुका है। एमआरआई मशीन खरीदने की प्रक्रिया शासन स्तर पर चल रही है। उम्मीद है जल्द ही एमआरआई मशीन मिल जाएगी। मशीन स्थापित होने पर मरीजों को सीधा लाभ मिलेगा।
- डॉ. संगीता गुप्ता, प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक