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Moradabad News: लारा कोर्ट ने डीएम बिजनौर के सरकारी आवास को कुर्क करने का दिया आदेश
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मुरादाबाद। लारा कोर्ट ने आठ वर्षों से लंबित वाद में कड़ा रुख अपनाते हुए डीएम बिजनौर के आवास को कुर्क करने के निर्देश दिए हैं। आरोप है कि निर्धारित समय सीमा में डीएम की तरफ से डिक्री की धनराशि जमा नहीं की गई। यह उच्च न्यायालय और सुप्रीम कोर्ट के दिए गए आदेशों के विपरीत है। इस मामले में डीएम को 30 मार्च को अदालत में सुनवाई के दौरान उपस्थित रहना होगा।
लारा कोर्ट (भूमि अर्जन, पुनर्वासन एवं पुनर्व्यवस्थापन प्राधिकरण) में आठ साल से लंबित निष्पादन वाद में शुक्रवार को सुनवाई हुई। इस दौरान डीएम की तरफ से अदालत में स्थगन के लिए प्रार्थनापत्र प्रस्तुत किया गया। बताया गया कि नीलामी प्रक्रिया विचाराधीन है। संबंधित मामलों में अपील, रिट एवं पुनर्विचार याचिकाएं लंबित हैं। यह भी कहा गया कि 19 मार्च को प्रस्तावित नीलामी में कोई बोलीदाता उपस्थित नहीं हुए।
इस कारण अब नई तिथि 30 मार्च तय की गई है। दूसरे पक्ष के अधिवक्ता ने स्थगन का विरोध किया। आरोप लगाया कि नीलामी के दिन अधिकारी कुछ मिनट के लिए मौके पर पहुंचे थे। उनका पक्षकार शाम चार बजे तक मौके पर उपस्थित रहा लेकिन नीलामी की कोई प्रक्रिया नहीं की गई।
अदालत ने पत्रावली का अवलोकन करते हुए उच्चतम न्यायालय ने निर्देशों का हवाला दिया। बताया कि निष्पादन वाद छह माह में निस्तारित किया जाना है, जबकि यह मामला करीब आठ वर्षों से लंबित है। अदालत ने स्पष्ट कहा कि पूर्व में भी अंतिम अवसर देते हुए पूरी धनराशि ब्याज सहित जमा करने के निर्देश दिए गए थे ।
इस बारे में अदालत ने संबंधित पक्ष को नोटिस जारी कर पूछा कि उनके खिलाफ अवमानना की कार्यवाही उच्च न्यायालय को भेजी जा सकती है। सुनवाई के दौरान यह भी सामने आया कि पूर्व में संलग्न संपत्ति से धनराशि की वसूली नहीं हो पा रही है। अदालत ने आदेश दिया कि डीएम बिजनौर के सरकारी आवास को कुर्क किया जाएगा। इस दौरान वह सरकारी संपत्ति को हस्तांतरित नहीं करेंगे। उससे किसी प्रकार का आर्थिक लाभ नहीं लेंगे। हालांकि डीएम अपने पद के तहत आवास का उपयोग करते रहेंगे। अदालत ने इस मामले में डीएम बिजनौर को 30 मार्च को संपत्ति के विक्रय संबंधी शर्तों का निर्धारण करने के लिए उपस्थित होने के निर्देश दिए हैं।
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लारा कोर्ट (भूमि अर्जन, पुनर्वासन एवं पुनर्व्यवस्थापन प्राधिकरण) में आठ साल से लंबित निष्पादन वाद में शुक्रवार को सुनवाई हुई। इस दौरान डीएम की तरफ से अदालत में स्थगन के लिए प्रार्थनापत्र प्रस्तुत किया गया। बताया गया कि नीलामी प्रक्रिया विचाराधीन है। संबंधित मामलों में अपील, रिट एवं पुनर्विचार याचिकाएं लंबित हैं। यह भी कहा गया कि 19 मार्च को प्रस्तावित नीलामी में कोई बोलीदाता उपस्थित नहीं हुए।
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इस कारण अब नई तिथि 30 मार्च तय की गई है। दूसरे पक्ष के अधिवक्ता ने स्थगन का विरोध किया। आरोप लगाया कि नीलामी के दिन अधिकारी कुछ मिनट के लिए मौके पर पहुंचे थे। उनका पक्षकार शाम चार बजे तक मौके पर उपस्थित रहा लेकिन नीलामी की कोई प्रक्रिया नहीं की गई।
अदालत ने पत्रावली का अवलोकन करते हुए उच्चतम न्यायालय ने निर्देशों का हवाला दिया। बताया कि निष्पादन वाद छह माह में निस्तारित किया जाना है, जबकि यह मामला करीब आठ वर्षों से लंबित है। अदालत ने स्पष्ट कहा कि पूर्व में भी अंतिम अवसर देते हुए पूरी धनराशि ब्याज सहित जमा करने के निर्देश दिए गए थे ।
इस बारे में अदालत ने संबंधित पक्ष को नोटिस जारी कर पूछा कि उनके खिलाफ अवमानना की कार्यवाही उच्च न्यायालय को भेजी जा सकती है। सुनवाई के दौरान यह भी सामने आया कि पूर्व में संलग्न संपत्ति से धनराशि की वसूली नहीं हो पा रही है। अदालत ने आदेश दिया कि डीएम बिजनौर के सरकारी आवास को कुर्क किया जाएगा। इस दौरान वह सरकारी संपत्ति को हस्तांतरित नहीं करेंगे। उससे किसी प्रकार का आर्थिक लाभ नहीं लेंगे। हालांकि डीएम अपने पद के तहत आवास का उपयोग करते रहेंगे। अदालत ने इस मामले में डीएम बिजनौर को 30 मार्च को संपत्ति के विक्रय संबंधी शर्तों का निर्धारण करने के लिए उपस्थित होने के निर्देश दिए हैं।