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यूपी: जौहर विश्वविद्यालय के भवन बनाने को दोगुनी कीमत पर दिए गए ठेके, आजम खां के प्रभाव में सारे नियम टूटते रहे
Thu, 29 Oct 2026 01:27 PM IST
Sharukh Khan
अमर उजाला नेटवर्क, रामपुर/लखनऊ
अमर उजाला नेटवर्क, रामपुर/लखनऊ
Published by: Sharukh Khan
Updated Thu, 29 Oct 2026 01:27 PM IST
सार
रामपुर स्थित जौहर विश्वविद्यालय के भवन बनाने के लिए दोगुनी कीमत पर ठेके दिए गए थे। आजम खां के प्रभाव में सरकार ने विश्वविद्यालय के भवनों को बनवाया था। सारे नियमों को धता बताते रहे। ठेकेदार सरकारी रकम से चंदा देते रहे।
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Johar University
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
विस्तार
सपा सरकार में कैबिनेट मंत्री आजम खां का रसूख कुछ ऐसा था कि जौहर विश्वविद्यालय में सरकारी रकम से भवनों के निर्माण के ठेके दोगुनी कीमत पर दिए जाते रहे। इतना ही नहीं, इन भवनों के निर्माण में सारे नियम-कानून धता बताकर रामपुर शहर में होने वाले अन्य विकास कार्यों की निर्माण सामग्री जौहर विश्वविद्यालय के भवनों को बनाने में खपाई गई।
जो अफसर इन गड़बड़ियों पर आंख मूंदे रहे, उन पर कार्रवाई नहीं हुई है। ईडी ने भी विश्वविद्यालय के भवनों को जब्त तो किया लेकिन असली गुनहगारों को चिन्हित नहीं कर पाई। ईडी की जांच में सामने आया कि रामपुर के कई ठेकेदारों ने सरकारी ठेकों के निधि और निर्माण सामग्री को विश्वविद्यालय के निर्माण कार्य में लगाया।
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जो अफसर इन गड़बड़ियों पर आंख मूंदे रहे, उन पर कार्रवाई नहीं हुई है। ईडी ने भी विश्वविद्यालय के भवनों को जब्त तो किया लेकिन असली गुनहगारों को चिन्हित नहीं कर पाई। ईडी की जांच में सामने आया कि रामपुर के कई ठेकेदारों ने सरकारी ठेकों के निधि और निर्माण सामग्री को विश्वविद्यालय के निर्माण कार्य में लगाया।
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एक कंपनी के प्रबंध निदेशक ने पूछताछ में कबूला कि 186 करोड़ रुपये के ठेकों का 30 से 40 फीसदी हिस्सा विश्वविद्यालय के लिए इस्तेमाल हुआ। एक अन्य संस्थान ने आजम खां के प्रभाव में ट्रस्ट को 40 लाख रुपये दान किए थे।
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आयकर विभाग की जांच में भी इसी तरह के तथ्य पाए गए थे, जिसके आधार पर ट्रस्ट का पंजीकरण रद कर दिया गया था। विश्वविद्यालय परिसर में विधायक निधि से भी 6.60 करोड़ रुपये के कार्य कराए गए थे।
ईडी के मुताबिक, ये कार्य लोक निर्माण विभाग द्वारा कराए गए थे, जिसके अध्यक्ष उस समय आजम खां थे। ट्रस्ट को मेरठ की दो शैक्षणिक संस्थाओं से 6.24 करोड़ रुपये का चंदा भी मिला था जो भाजपा नेता सरोजनी अग्रवाल की बताई जाती हैं। तब वह सपा में थीं।
सार्वजनिक संपत्ति ट्रस्ट को दी
जांच में पता चला कि सपा सरकार में विश्वविद्यालय परिसर में एक पंडाल, अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए छात्रावास और एक अस्पताल के निर्माण को मंजूरी दी गई। इसके लिए 23.41 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए थे। वर्ष 2015 में जारी एक सरकारी आदेश में पंडाल के लिए 12.16 करोड़ रुपये मंजूर हुए थे, जिसमें स्वामित्व संस्कृति विभाग के पास रहने और मुफ्त सरकारी इस्तेमाल की शर्त थी।
जांच में पता चला कि सपा सरकार में विश्वविद्यालय परिसर में एक पंडाल, अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए छात्रावास और एक अस्पताल के निर्माण को मंजूरी दी गई। इसके लिए 23.41 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए थे। वर्ष 2015 में जारी एक सरकारी आदेश में पंडाल के लिए 12.16 करोड़ रुपये मंजूर हुए थे, जिसमें स्वामित्व संस्कृति विभाग के पास रहने और मुफ्त सरकारी इस्तेमाल की शर्त थी।
हालांकि, 2016 के एक आदेश में शर्तों को बदल दिया गया और पंडाल का स्वामित्व विश्वविद्यालय को सौंप दिया गया। राज्य सरकार द्वारा इसके इस्तेमाल की शर्त हटा दी गई। इस तरह सरकारी निधि से बनी सार्वजनिक संपत्ति को विश्वविद्यालय की निजी संपत्ति में बदल दिया गया। तब शहरी विकास विभाग आजम के पास था।
निर्णायक प्राधिकारी करेगा अंतिम निर्णय
ईडी द्वारा विश्वविद्यालय के भवनों को जब्त करने के बाद यह प्रकरण नई दिल्ली स्थित निर्णायक प्राधिकरण (एडजूकेटिंग अथॉरिटी) के पास जाएगा। वह छह माह के भीतर ईडी के जब्तीकरण के फैसले पर अंतिम निर्णय देगा। फैसला ईडी के पक्ष में आने पर जब्त संपत्तियां सरकारी हो जाएंगी। हालांकि विश्वविद्यालय के संचालन को लेकर आगे का निर्णय सरकार द्वारा लिया जा सकता है।
ईडी द्वारा विश्वविद्यालय के भवनों को जब्त करने के बाद यह प्रकरण नई दिल्ली स्थित निर्णायक प्राधिकरण (एडजूकेटिंग अथॉरिटी) के पास जाएगा। वह छह माह के भीतर ईडी के जब्तीकरण के फैसले पर अंतिम निर्णय देगा। फैसला ईडी के पक्ष में आने पर जब्त संपत्तियां सरकारी हो जाएंगी। हालांकि विश्वविद्यालय के संचालन को लेकर आगे का निर्णय सरकार द्वारा लिया जा सकता है।
सरकार द्वारा जब्त भवनों पर कब्जा लेने से पठन-पाठन प्रभावित नहीं होगा। फीस से सरकारी राजस्व के नुकसान की भरपाई की जा सकती है। बता दें कि इससे पहले ईडी ने सहारनपुर के खनन माफिया एवं पूर्व बसपा एमएलसी हाजी इकबाल की ग्लोकल यूनिवर्सिटी को भी जब्त किया था जिसकी कीमत करीब 4500 करोड़ रुपये थी। इसके अलावा राजधानी में छात्रवृत्ति घोटाले में हाइजिया ग्रुप के भवनों को भी ईडी जब्त कर चुका है।
13 अक्तूबर की एफआईआर के बाद से जताई जा रही थी जब्तीकरण की आशंका
जौहर यूनिवर्सिटी के भवनों को जब्त करने की तैयारी तो उसी समय लिख गई थी, जब 13 अक्तूबर की रात को ईडी ने अजीमनगर थाने में एफआईआर दर्ज कराई। इसके बाद से ही भवनों के जब्तीकरण की आशंका जताई जा रही थी जो अब सच साबित हुआ है।
जौहर यूनिवर्सिटी के भवनों को जब्त करने की तैयारी तो उसी समय लिख गई थी, जब 13 अक्तूबर की रात को ईडी ने अजीमनगर थाने में एफआईआर दर्ज कराई। इसके बाद से ही भवनों के जब्तीकरण की आशंका जताई जा रही थी जो अब सच साबित हुआ है।
ईडी ने रामपुर के अजीमनगर थाने में दर्ज 27 प्राथमिकियों के आधार पर जांच शुरू की थी। इनमें विश्वविद्यालय के लिए किसानों की कृषि भूमि पर जबरन कब्जा करने के आरोप लगाए गए थे। बाद में जांच का दायरा जमीन के साथ ही भवनों के निर्माण में इस्तेमाल धन और उससे जुड़े वित्तीय लेनदेन तक पहुंचा।
ईडी ने हाल ही में ट्रस्ट के पदाधिकारियों से जुड़े ठिकानों पर छापे भी मारे थे। जांच एजेंसी की कार्रवाई से विश्वविद्यालय की संपत्तियों और उनके निर्माण में इस्तेमाल धन के स्रोत का मुद्दा एक बार फिर चर्चा में आ गया है।
करीब सात साल तक चली जांच के बाद की गई जब्ती की कार्रवाई में अब संपत्तियों के स्वामित्व के साथ-साथ उनके निर्माण और वित्तपोषण से जुड़े सवाल भी अहम हो गए हैं। ईडी के मुताबिक, सरकारी काम पाने वाले ठेकेदारों से प्राप्त धनराशि को दान के रूप में ट्रस्ट तक भेजे जाने की बात सामने आई।
आजम से आठ घंटे की पूछताछ के बाद कराई थी एफआईआर
सरकारी धन का इस्तेमाल जौहर यूनिवर्सिटी में कर दुरुपयोग करने के मामले में ईडी ने चार अक्तूबर को रामपुर पहुंचकर यहां पर जेल में बंद सपा नेता आजम खां से पूछताछ की थी। इसके बाद ईडी ने अजीमनगर थाने में सपा नेता आजम खां व जौहर ट्रस्ट के खिलाफ भ्रष्टाचार की धाराओं में मामला दर्ज कराया था। इस कार्रवाई के एक पखवाड़े बाद अब जब्तीकरण की कार्रवाई की गई है।
सरकारी धन का इस्तेमाल जौहर यूनिवर्सिटी में कर दुरुपयोग करने के मामले में ईडी ने चार अक्तूबर को रामपुर पहुंचकर यहां पर जेल में बंद सपा नेता आजम खां से पूछताछ की थी। इसके बाद ईडी ने अजीमनगर थाने में सपा नेता आजम खां व जौहर ट्रस्ट के खिलाफ भ्रष्टाचार की धाराओं में मामला दर्ज कराया था। इस कार्रवाई के एक पखवाड़े बाद अब जब्तीकरण की कार्रवाई की गई है।
ईडी की कार्रवाई की जानकारी मीडिया के माध्यम से मिल रही है। आधिकारिक तौर पर कोई सूचना नहीं आई है। सूचना के बाद ही आगे की रणनीति तैयार की जाएगी।-अजय सागर, जिलाध्यक्ष सपा
प्रमुख घटनाक्रम
- 2013-2017: ईडी के आरोपों के अनुसार इस अवधि में सरकारी ठेकों और सार्वजनिक धन के विश्वविद्यालय निर्माण में इस्तेमाल की पड़ताल की गई। प्रारंभिक जांच अजीमनगर थाने में किसानों की कृषि भूमि पर कथित कब्जे से जुड़ी 27 प्राथमिकियों के आधार पर ईडी ने जांच शुरू की।
- 12 मई 2022: ईडी ने विश्वविद्यालय परिसर का निरीक्षण किया और कथित शत्रु संपत्ति की पैमाइश की गई।
- 10 नवंबर 2023 जिला मूल्यांकन अधिकारी की रिपोर्ट में परिसर की 59 इमारतों की निर्माण लागत 494.46 करोड़ रुपये आंकी गई।
- 19 अगस्त 2026: ईडी ने विश्वविद्यालय और उससे जुड़े परिसरों पर तलाशी ली। इलेक्ट्रॉनिक उपकरण और दस्तावेज जब्त किए गए।
- 13 अक्तूबर 2026 ईडी ने रामपुर जेल में आजम खां से करीब आठ घंटे पूछताछ की।
- 13 अक्तूबर 2026 आजम खां व जौहर ट्रस्ट और अन्य के खिलाफ अजीमनगर थाने में नई प्राथमिकी दर्ज हुई।
- 22 अक्तूबर 2026 आजम खां के करीबी सालिम से ट्रस्ट के वित्तीय लेनदेन और चंदे के संबंध में करीब आठ घंटे पूछताछ हुई।
- 28 अक्तूबर ईडी ने विश्वविद्यालय की जमीन और भवनों को अस्थायी रूप से जब्त किया। संपत्तियों का कथित अपराध से अर्जित मूल्य 426.46 करोड़ और वर्तमान बाजार मूल्य करीब 1170 करोड़ रुपये बताया गया।
जौहर यूनिवर्सिटी को बनाने में काले धन का इस्तेमाल किया गया है। सपा नेता आजम खां ने यह यूनिवर्सिटी शिक्षा के लिए नहीं बल्कि अपने निजी फायदे के लिए बनाई। ईडी ने लंबी चौड़ी जांच के बाद जब्तीकरण की कार्रवाई की है। यह एक बड़ा कदम है। आजम शिक्षा के नाम पर इस यूनिवर्सिटी का इस्तेमाल अपने फायदे के लिए कर रहे थे। आकाश सक्सेना, शहर विधायक एवं शिकायतकर्ता