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Budget 2026: राकेश टिकैत बोले- दिल्ली के कागजों में ही बजट अच्छा, किसानों की ये मांग नहीं की पूरी
अमर उजाला नेटवर्क, मुजफ्फरनगर
Published by: मोहम्मद मुस्तकीम
Updated Sun, 01 Feb 2026 03:19 PM IST
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सार
Muzaffarnagar News: भाकियू के राष्ट्रीय प्रवक्ता चौधरी राकेश टिकैत ने कहा कि किसान सम्मान निधि 12,000 रुपये किए जाने की मांग थी, लेकिन वह पूरी नहीं की गई। प्राइवेट स्कूलों को भी बजट में बढ़ावा दिया गया है।
चौधरी राकेश टिकैत, राष्ट्रीय प्रवक्ता भारतीय किसान यूनियन।
- फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
भारतीय किसान यूनियन (भाकियू) के राष्ट्रीय प्रवक्ता चौधरी राकेश टिकैत ने आम बजट पर अपनी गहरी निराशा व्यक्त की है। उनका कहना है कि किसानों को इस बजट से बड़ी उम्मीदें थीं, लेकिन उनकी अपेक्षाएं पूरी नहीं हुईं। टिकैत ने विशेष रूप से पहाड़ी राज्यों की कुछ फसलों के उल्लेख पर सवाल उठाते हुए कहा कि यह स्पष्ट नहीं है कि अखरोट और चंदन जैसी विशिष्ट फसलों के किसानों को इससे कितना लाभ मिलेगा।
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एमएसपी गारंटी कानून और किसान सम्मान निधि पर चिंता
टिकैत ने इस बात पर भी चिंता जताई कि किसानों की न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर गारंटी कानून की प्रमुख मांग को बजट में शामिल नहीं किया गया है। उन्होंने कहा कि किसान सम्मान निधि को बढ़ाकर 12,000 रुपये किए जाने की उम्मीद थी, जो इस बजट में दिखाई नहीं दी। यह किसानों के लिए एक महत्वपूर्ण वित्तीय सहायता होती, जिसकी कमी उन्हें खलेगी।
टिकैत ने इस बात पर भी चिंता जताई कि किसानों की न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर गारंटी कानून की प्रमुख मांग को बजट में शामिल नहीं किया गया है। उन्होंने कहा कि किसान सम्मान निधि को बढ़ाकर 12,000 रुपये किए जाने की उम्मीद थी, जो इस बजट में दिखाई नहीं दी। यह किसानों के लिए एक महत्वपूर्ण वित्तीय सहायता होती, जिसकी कमी उन्हें खलेगी।
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जमीनी हकीकत और सरकारी दावों में अंतर
भाकियू नेता ने बजट के प्रभावी होने पर संदेह व्यक्त करते हुए कहा कि भले ही दिल्ली के कागजों में यह बजट अच्छा लगे, लेकिन जमीनी हकीकत में इसका कितना असर होगा, यह देखना महत्वपूर्ण है। उन्होंने सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन और उनके वास्तविक लाभों पर प्रश्नचिन्ह लगाया।
भाकियू नेता ने बजट के प्रभावी होने पर संदेह व्यक्त करते हुए कहा कि भले ही दिल्ली के कागजों में यह बजट अच्छा लगे, लेकिन जमीनी हकीकत में इसका कितना असर होगा, यह देखना महत्वपूर्ण है। उन्होंने सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन और उनके वास्तविक लाभों पर प्रश्नचिन्ह लगाया।
शिक्षा नीति पर भी उठाए सवाल
टिकैत ने बजट में निजी स्कूलों को बढ़ावा देने की बात पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आशंका व्यक्त की कि इससे सरकारी स्कूलों के बंद होने का खतरा बढ़ सकता है, जिसका सीधा और नकारात्मक प्रभाव ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों पर पड़ेगा। यह मुद्दा ग्रामीण शिक्षा प्रणाली की मजबूती को लेकर नई चिंताएं पैदा करता है।
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टिकैत ने बजट में निजी स्कूलों को बढ़ावा देने की बात पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आशंका व्यक्त की कि इससे सरकारी स्कूलों के बंद होने का खतरा बढ़ सकता है, जिसका सीधा और नकारात्मक प्रभाव ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों पर पड़ेगा। यह मुद्दा ग्रामीण शिक्षा प्रणाली की मजबूती को लेकर नई चिंताएं पैदा करता है।
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