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Muzaffarnagar News: चैत्र नवरात्रि 19 मार्च से प्रारंभ, बाजारों और घरों में तैयारियां हुई शुरू
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मुजफ्फरनगर। चैत्र नवरात्रि पर्व 19 मार्च से शुरू होकर 27 मार्च तक मनाया जाएगा। नवरात्रि पर्व के लिए घरों और बाजारों में तैयारियां शुरू हो गई हैं। यह पर्व हिंदू नववर्ष के आरंभ का प्रतीक भी माना जाता है। जिले भर में घरों, मंदिरों और बाजारों में तैयारियां जोरों पर हैं। श्रद्धालु माता रानी के स्वागत के लिए पूजा सामग्री, सजावट और व्रत से जुड़ी वस्तुओं की खरीदारी करने में जुट गए हैं।
शहर के भगत सिंह रोड, नई मंडी, गांधी कॉलोनी, आनंदपुरी, दाल मंडी के बाजार में में नवरात्रि पर्व के लिए दुकानदारों ने तैयारी कर ली है। दुकानों पर नारियल चुनरी के साथ पूजा सामग्री की महिलाओं ने खरीदारी शुरू कर दी है। नवरात्रि के दिनों में वाहन की खरीदारी, गृहप्रवेश और नए प्रतिष्ठानों के शुभारंभ के लिए भी तैयारियां शुरू हो गई हैं।
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सुबह 6:52 बजे से 10:26 बजे तक कलश स्थापना का मुहूर्त
धार्मिक संस्थान विष्णुलोक के ज्योतिष पंडित हेमंत वशिष्ठ ने बताया कि नवरात्रि के प्रथम दिन घट स्थापना का विशेष महत्व होता है। यह माता दुर्गा के आगमन का प्रतीक माना जाता है। मार्च को प्रतिपदा तिथि में सुबह 6:52 बजे से 10:26 बजे तक कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त रहेगा। इस समय में विधि-विधान से कलश स्थापित कर माता रानी की पूजा आरंभ करना अत्यंत फलदायी माना गया है। उन्होंने बताया कि शास्त्रों के अनुसार प्रतिपदा तिथि को सृष्टि की रचना का प्रारंभ माना जाता है। मान्यता है कि इसी दिन ब्रह्मा जी ने सृष्टि की रचना शुरू की थी, इसलिए यह दिन नवआरंभ और सृजन का प्रतीक है।
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अभिजीत मुहूर्त का भी है विकल्प
शुकतीर्थ स्थित ब्रह्मविद्यापीठ के आचार्य अशोक शुक्ल ने बताया कि यदि किसी कारणवश श्रद्धालु निर्धारित प्रातःकालीन मुहूर्त में कलश स्थापना नहीं कर पाते हैं, तो वह अभिजीत मुहूर्त में भी यह शुभ कार्य कर सकते हैं। 19 मार्च को अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12:03 बजे से 12:51 बजे तक रहेगा। यह मुहूर्त अत्यंत शुभ और विजयी माना जाता है, जिसमें किए गए कार्यों में सफलता की प्राप्ति होती है। पहले दिन की पूजा मां शैलपुत्री की होगी। इसके बाद क्रमशः ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, कूष्मांडा, स्कंदमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी और अंतिम दिन सिद्धिदात्री की पूजा के साथ समापन होगा।
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सुबह 6:52 बजे से 10:26 बजे तक कलश स्थापना का मुहूर्त
धार्मिक संस्थान विष्णुलोक के ज्योतिष पंडित हेमंत वशिष्ठ ने बताया कि नवरात्रि के प्रथम दिन घट स्थापना का विशेष महत्व होता है। यह माता दुर्गा के आगमन का प्रतीक माना जाता है। मार्च को प्रतिपदा तिथि में सुबह 6:52 बजे से 10:26 बजे तक कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त रहेगा। इस समय में विधि-विधान से कलश स्थापित कर माता रानी की पूजा आरंभ करना अत्यंत फलदायी माना गया है। उन्होंने बताया कि शास्त्रों के अनुसार प्रतिपदा तिथि को सृष्टि की रचना का प्रारंभ माना जाता है। मान्यता है कि इसी दिन ब्रह्मा जी ने सृष्टि की रचना शुरू की थी, इसलिए यह दिन नवआरंभ और सृजन का प्रतीक है।
अभिजीत मुहूर्त का भी है विकल्प
शुकतीर्थ स्थित ब्रह्मविद्यापीठ के आचार्य अशोक शुक्ल ने बताया कि यदि किसी कारणवश श्रद्धालु निर्धारित प्रातःकालीन मुहूर्त में कलश स्थापना नहीं कर पाते हैं, तो वह अभिजीत मुहूर्त में भी यह शुभ कार्य कर सकते हैं। 19 मार्च को अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12:03 बजे से 12:51 बजे तक रहेगा। यह मुहूर्त अत्यंत शुभ और विजयी माना जाता है, जिसमें किए गए कार्यों में सफलता की प्राप्ति होती है। पहले दिन की पूजा मां शैलपुत्री की होगी। इसके बाद क्रमशः ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, कूष्मांडा, स्कंदमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी और अंतिम दिन सिद्धिदात्री की पूजा के साथ समापन होगा।