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Muzaffarnagar News: संतों ने पानी में बनाई मानव शृंखला
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मोरना। बाणगंगा में पानी नहीं आने से नाराज साधु-संतों ने पानी में मानव श्रृंखला बनाकर नारेबाजी की। उन्होंने घाट पर कराए जा रहे कार्यों को बंद कराने की मांग की। गंगा घाट पर स्नान के लिए पहुंच रहे श्रद्धालु स्नान किए बगैर ही लौटने लगे हैं।
संतों का कहना है कि विकास के कामों में पारदर्शिता बरती जानी चाहिए। बैठक के दौरान प्रशासन को एक सप्ताह का समय देते हुए अपनी मांगों पर गंभीरता से विचार करने की अपील की और भूख हड़ताल की चेतावनी दी।
निर्माणाधीन आरती स्थल व पार्किंग स्थल बनाने को अतिक्रमण करने का आरोप लगाया गया। शुकतीर्थ घाट पर शनिवार को महामंडलेश्वर गोपालदास महाराज ने कहा कि बिना संतों की राय और सहमति के गंगा घाट पर ऐसे निर्माण कार्य कराए जा रहे हैं, जिनका सीधा प्रभाव गंगा की प्राकृतिक धारा और तीर्थनगरी की धार्मिक व्यवस्था पर पड़ सकता है। हनुमतधाम पीठाधीश्वर स्वामी आनंद स्वरूपानंद सरस्वती ने कहा कि पर्यावरणीय तथा धार्मिक पहलुओं को ध्यान में रखते हुए ही निर्णय लिया जाना चाहिए। स्वामी विज्ञानानंद महाराज ने कहा कि शुकतीर्थ केवल एक पर्यटन स्थल नहीं, बल्कि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र और प्राचीन धार्मिक धरोहर है।
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तिलकधारी विष्णु आचार्य महाराज व स्वामी गीतानंद गिरि ने कहा कि पहले से ही गंगा में पर्याप्त जल नहीं आ रहा है और यदि घाट पर इस प्रकार के निर्माण किए गए तो जल प्रवाह और अधिक बाधित होगा। उधर, इस दौरान कार्यदायी संस्था के ठेकेदार से भी बातचीत की गई। इस दौरान स्वामी विष्णुआचार्य महाराज, प्रेमशंकर मिश्रा, चंद्रमा ब्रह्मचारी, प्रवेश दीदी, गंगा सेवा समिति के डॉ. महकार सिंह, देवेंद्र आर्य, मोहनगिरि व जगतगिरि मौजूद रहे।
संतों का कहना है कि विकास के कामों में पारदर्शिता बरती जानी चाहिए। बैठक के दौरान प्रशासन को एक सप्ताह का समय देते हुए अपनी मांगों पर गंभीरता से विचार करने की अपील की और भूख हड़ताल की चेतावनी दी।
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निर्माणाधीन आरती स्थल व पार्किंग स्थल बनाने को अतिक्रमण करने का आरोप लगाया गया। शुकतीर्थ घाट पर शनिवार को महामंडलेश्वर गोपालदास महाराज ने कहा कि बिना संतों की राय और सहमति के गंगा घाट पर ऐसे निर्माण कार्य कराए जा रहे हैं, जिनका सीधा प्रभाव गंगा की प्राकृतिक धारा और तीर्थनगरी की धार्मिक व्यवस्था पर पड़ सकता है। हनुमतधाम पीठाधीश्वर स्वामी आनंद स्वरूपानंद सरस्वती ने कहा कि पर्यावरणीय तथा धार्मिक पहलुओं को ध्यान में रखते हुए ही निर्णय लिया जाना चाहिए। स्वामी विज्ञानानंद महाराज ने कहा कि शुकतीर्थ केवल एक पर्यटन स्थल नहीं, बल्कि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र और प्राचीन धार्मिक धरोहर है।
तिलकधारी विष्णु आचार्य महाराज व स्वामी गीतानंद गिरि ने कहा कि पहले से ही गंगा में पर्याप्त जल नहीं आ रहा है और यदि घाट पर इस प्रकार के निर्माण किए गए तो जल प्रवाह और अधिक बाधित होगा। उधर, इस दौरान कार्यदायी संस्था के ठेकेदार से भी बातचीत की गई। इस दौरान स्वामी विष्णुआचार्य महाराज, प्रेमशंकर मिश्रा, चंद्रमा ब्रह्मचारी, प्रवेश दीदी, गंगा सेवा समिति के डॉ. महकार सिंह, देवेंद्र आर्य, मोहनगिरि व जगतगिरि मौजूद रहे।