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Muzaffarnagar News: पांच पीढ़ियों की तपस्या...600 साल पुरानी धरोहर को मिलेगी राष्ट्रीय पहचान
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नदी रोड स्थित पुस्तकालय में 350 वर्ष पुराने सिक्के स्रोत संवाद
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मुजफ्फरनगर। नया बांस नदी रोड स्थित भूपेंद्र दत्त शर्मा का आवास केवल एक परिवार का घर नहीं, बल्कि पांच पीढ़ियों की ज्ञान-साधना, संस्कृति संरक्षण और ऐतिहासिक विरासत का जीवंत केंद्र है। इस भवन में स्थापित निजी पुस्तकालय में सदियों पुरानी अमूल्य धरोहरें आज भी सुरक्षित हैं। इनमें लगभग 600 वर्ष पुरानी दुर्लभ पांडुलिपियां, 350 वर्ष पुराने सिक्के, ताम्रपत्र, प्राचीन मूर्तियां और विभिन्न लिपियों में लिखा साहित्य शामिल है। इस पुरानी धरोहर को ज्ञान भारतम मिशन के जरिए राष्ट्रीय पहचान दी जाएगी।
दादा पंडित चमनलाल शर्मा और पिता पंडित रामेश्वर दत्त शर्मा को पूर्वजों से मिली इस विरासत को बड़े जतन, समर्पण और जिम्मेदारी के साथ संभालते हुए वर्तमान पीढ़ी अब संरक्षण के साथ संर्वधन का काम भी कर रही है। घर के कमरे में लगभग 15 अलमारियों में ज्योतिष शास्त्र, योग, उपनिषद, काव्य, पुराण, तंत्रशास्त्र, महाभारत, रामायण आदि की 100 से अधिक पांडुलिपियों का संग्रह है।
पुस्तकालय में 400 साल पुराना गोरख मछेंद्रनाथ बोध ग्रंथ, एक पेज पर लिखी हाथ से लिखी श्रीमद्भागवत गीता, 16वीं शताब्दी में लिखे भोजप्रबंध की पांडुलिपि हिंदी साहित्य और इतिहास को सहेजे हुए है। भ्रमण के दौरान संस्कृत, बंग, उडिया, मराठी, टांकरी, उर्दू, फारसी लिपियों के दुर्लभ ग्रंथों को भी संरक्षित किया गया है।
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डिजिटल होने के बाद जनसामान्य को होगी सुलभ
जिला राजकीय पुस्तकालय के प्रभारी डॉ. रणवीर सिंह ने बताया कि प्रदेश सरकार की ओर से ज्ञान भारतम मिशन के तहत राष्ट्रीय पांडुलिपि सर्वेक्षण अभियान जारी है। पंडित भूपेंद्र दत्त शर्मा के निजी पुस्तकालय में मौजूद पांडुलिपियों का एप के माध्यम से जिओ ट्रेकिंग कर दिया गया है। इनके डिजिटल होने के बाद शोधार्थियों और जन सामान्य को यह सुलभ हो सकेगीं।
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वर्षों पुरानी पांडुलिपि को संभालना है तपस्या
पंडित भूपेंद्रदत्त शर्मा ने बताया कि 600 साल पुरानी पांडुलिपि को संभालकर रखना तपस्या से कम नहीं है। पुराने होते जाने के साथ पृष्ठों के कमजोर होने, कीटाणु, सीलन का खतरा बढ़ता जाता है। इन सबसे बचाने के लिए कपूर और अन्य सामग्री से लेप लगाकर और समय समय पर खोलकर सहेजा है। सरकार द्वारा डिजिटल संरक्षण के बाद जन जन तक पहुंचने की बहुत खुशी है कि ज्ञान संपदा की बेल आगे को बढ़ेगी।
दादा पंडित चमनलाल शर्मा और पिता पंडित रामेश्वर दत्त शर्मा को पूर्वजों से मिली इस विरासत को बड़े जतन, समर्पण और जिम्मेदारी के साथ संभालते हुए वर्तमान पीढ़ी अब संरक्षण के साथ संर्वधन का काम भी कर रही है। घर के कमरे में लगभग 15 अलमारियों में ज्योतिष शास्त्र, योग, उपनिषद, काव्य, पुराण, तंत्रशास्त्र, महाभारत, रामायण आदि की 100 से अधिक पांडुलिपियों का संग्रह है।
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पुस्तकालय में 400 साल पुराना गोरख मछेंद्रनाथ बोध ग्रंथ, एक पेज पर लिखी हाथ से लिखी श्रीमद्भागवत गीता, 16वीं शताब्दी में लिखे भोजप्रबंध की पांडुलिपि हिंदी साहित्य और इतिहास को सहेजे हुए है। भ्रमण के दौरान संस्कृत, बंग, उडिया, मराठी, टांकरी, उर्दू, फारसी लिपियों के दुर्लभ ग्रंथों को भी संरक्षित किया गया है।
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वर्षों पुरानी पांडुलिपि को संभालना है तपस्या
पंडित भूपेंद्रदत्त शर्मा ने बताया कि 600 साल पुरानी पांडुलिपि को संभालकर रखना तपस्या से कम नहीं है। पुराने होते जाने के साथ पृष्ठों के कमजोर होने, कीटाणु, सीलन का खतरा बढ़ता जाता है। इन सबसे बचाने के लिए कपूर और अन्य सामग्री से लेप लगाकर और समय समय पर खोलकर सहेजा है। सरकार द्वारा डिजिटल संरक्षण के बाद जन जन तक पहुंचने की बहुत खुशी है कि ज्ञान संपदा की बेल आगे को बढ़ेगी।

नदी रोड स्थित पुस्तकालय में 350 वर्ष पुराने सिक्के स्रोत संवाद

नदी रोड स्थित पुस्तकालय में 350 वर्ष पुराने सिक्के स्रोत संवाद