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Muzaffarnagar News: पवन की हत्या में विपुल खूनी गिरोह के चार सदस्यों को मृत्युदंड

Fri, 14 Aug 2026 01:08 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Fri, 14 Aug 2026 01:08 AM IST
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Four members of Vipul Khooni gang awarded death penalty for Pawan's murder
शामली के पवन हत्याकांड में दो​षियों को सजा सुनाए जाने के बाद कारागार ले जाती पुलिस : वीडियोग्रे
मुजफ्फरनगर। शामली के भभीसा गांव में 12 साल पहले घर पर हमला कर दो गोली मारकर किसान पवन कुमार (56) की हत्या के मामले में कुख्यात सुशील मूंछ के शूटर विपुल खूनी गिरोह के चार सदस्यों को मृत्युदंड की सजा सुनाई। इनमें शामली का रामवीर, राहुल, हरेंद्र और बागपत का राजीव शामिल है। अपर जिला एवं सत्र न्यायालय/फास्ट ट्रैक कोर्ट संख्या-3 के पीठासीन अधिकारी रवि कुमार दिवाकर ने फैसला सुनाया। अदालत ने कहा कि गैंगस्टरवाद सभ्य समाज के लिए खतरा है।
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कांधला थाना क्षेत्र के भभीसा गांव में मई 2014 में विपुल खूनी के साथी अजय की हत्या कर दी गई थी। वारदात में किसान पवन के छोटे बेटे आशु को नामजद किया गया। नामजदगी को लेकर आशु और विपुल की मां राजेश के बीच कहासुनी हो गई थी।
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इसी रंजिश में 14 जुलाई 2014 की सुबह 10:45 बजे कार में सवार होकर आए विपुल खूनी और उसके साथियों ने बुढ़ाना मार्ग स्थित वादी अशोक के घर में घुसकर 20 राउंड फायरिंग की और उसके भाई पवन की दो गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। हाथ में गोली लगने से वादी भी घायल हुआ था।
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पुलिस ने जांच में आठ आरोपी बनाए थे। पिछले महीने 25 जुलाई को विपुल खूनी बागपत में हुई मुठभेड़ में मारा गया। आरोपी अमित की पत्रावली एक मार्च 2024 को पृथक कर दी गई। अशोक और राहुल की विवेचना अलग हुई। अभियोजन ने नौ गवाह पेश किए। छह अगस्त को अदालत ने भभीसा के राहुल उर्फ बोसी, कांजरहेड़ी गांव के हरेंद्र कुमार, पीरखेड़ा के रामवीर, बागपत के बड़ौत निवासी राजीव उर्फ छोटू पर दोष सिद्ध किया।
बृहस्पतिवार को चारों दोषियों को मृत्युदंड की सजा सुनाई है। दोषी राहुल उर्फ बोसी पर 1.70 और अन्य प्रत्येक पर 1.60 लाख का अर्थदंड लगाया गया। अर्थदंड की आधी धनराशि पवन की पत्नी सोहनवीरी को क्षतिपूर्ति के तौर पर दी जाएगी।
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मूंछ ने शुरू किया संगठित अपराध...450 सदस्य
अदालत ने फैसले में लिखा कि सुशील मूंछ की पश्चिम यूपी के अपराध में तूती बोलती थी। गैंग आईएस 199 पंजीकृत है। संगठित अपराध की शुरुआत मूंछ ने की, उसके गैंग में 450 से अधिक सदस्य हैं। पचास हजार रुपये का इनामी रहा विपुल खूनी इसी गैंग का शॉर्प शूटर था।
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वीर बहादुर ने इसलिए बनाया गैंगस्टर एक्ट
अदालत ने लिखा कि प्रदेश में 1970-80 के दशक में अपराधीकरण जातिगत आधार पर हो रहा था। ठाकुर जाति के अपराधियों का हित व संरक्षण वीरेंद्र प्रताप शाही कर रहे थे, जबकि ब्राह्मण जाति के अपराधियों का संरक्षण हरि शंकर तिवारी कर रहे थे। दोनों गैंगस्टर से राजनेता बने थे। शाही की हत्या 1997 में माफिया श्रीप्रकाश शुक्ला ने की थी। गोरखपुर के रहने वाले तत्कालीन मुख्यमंत्री वीर बहादुर सिंह अपराध से परेशान थे, इसी वजह से संगठित अपराध को खत्म करने के लिए गैंगस्टर एक्ट 1986 बनाया गया था।
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कल्याण सिंह, एसटीएफ और ददुआ की कहानी
अदालत ने लिखा कि माफिया श्रीप्रकाश शुक्ला ने तत्कालीन मुख्यमंत्री कल्याण सिंह की छह करोड़ की सुपारी ली थी। संगठित अपराध को खत्म करने के लिए चार मई 1998 को कल्याण सिंह ने एसटीएफ छह महीने के लिए बनाई थी। एसटीएफ ने 22 सितंबर 1998 को गाजियाबाद में शुक्ला को मारकर सार्थकता साबित की। 22 जुलाई 2007 को चित्रकूट में शिव कुमार पटेल उर्फ ददुआ को मार गिराया। गैंग लीडर अंबिका पटेल ठोकिया ने एसटीएफ के 16 जवानों पर हमला किया, जिनमें छह शहीद हो गए थे। अगस्त 2008 में ठोकिया मारा गया। चित्रकूट में अदालत ने 10 अक्तूबर 2025 को इस वाद का निस्तारण किया था।

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न्याय की मशाल कभी बुझती नहीं : अदालत
अदालत ने 73 पेज के फैसले में लिखा कि जब भय बाजार बन जाए, हिंसा व्यवसाय बन जाए और मानव जीवन केवल लाभ-हानि का साधन बन जाए, तब न्यायालय का मौन रहना भी अन्याय का सहभागी बन जाता है। इसलिए विधि का हाथ केवल अपराधी तक पहुंचने के लिए नहीं, बल्कि समाज को यह विश्वास दिलाने के लिए भी उठता है कि न्याय की मशाल कभी बुझती नहीं। समय लग सकता है, परंतु कानून की पकड़ से कोई भी अपराधी अंतत बच नहीं सकता।
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