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Muzaffarnagar News: लाल बहादुर के साथ पढ़े...बोस के साथ आगे बढ़े थे शुगन चंद
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शुगन चंद मजदूर, पूर्व विधायक फाइल फोटो
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मुजफ्फरनगर। आजादी के लिए जीवन समर्पित करने वाले स्वतंत्रता सेनानियों में पूर्व विधायक शुगन चंद मजदूर का नाम सम्मान से लिया जाता है। उन्होंने सामाजिक कुरीतियों के विरोध से लेकर स्वतंत्रता संग्राम तक राष्ट्र और समाज की सेवा की। साल 1962 में कांग्रेस के टिकट पर भोकरहेड़ी और 1967 में जानसठ सुरक्षित सीट से विधायक चुने गए थे।
उनका जन्म 13 मार्च 1914 को पुरकाजी में इतवारी लाल के घर हुआ था। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के अछूतोद्धार और सामाजिक समानता के विचारों से शुगन चंद मजदूर प्रभावित हुए। वर्ष 1932 में वह सामाजिक और राजनीतिक क्षेत्र में सक्रिय हुए।
उन्होंने समाज में व्याप्त कुरीतियों को दूर करने का प्रयास किया। लोगों में एकता और जागरूकता पैदा करने के उद्देश्य से उन्होंने पुरकाजी की अबूपुरा बस्ती में कार्य शुरू किया।
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गांधी के रचनात्मक कार्यक्रमों में उनकी गहरी आस्था थी। इसी भावना के चलते वर्ष 1933 में उन्होंने नैनी विद्यापीठ इलाहाबाद में अध्ययन किया और पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री के साथ सामाजिक, राजनीतिक, दार्शनिक और वैज्ञानिक विषयों का अध्ययन किया। इसके बाद वर्ष 1936 में वर्धा से ग्राम सेवक का प्रशिक्षण प्राप्त किया।
वर्ष 1937 में प्रशिक्षित ग्राम सेवक के रूप में वह पुरकाजी लौटे और समाजसेवा के कार्य किए। वर्ष 1939 में शुगन चंद मजदूर नेताजी सुभाष चंद्र बोस के विचारों से अत्यंत प्रभावित हुए। देश को अंग्रेजी हुकूमत की गुलामी से मुक्त कराने का संकल्प लेकर वह स्वतंत्रता संग्राम में सक्रिय रूप से जुट गए।
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उनका जन्म 13 मार्च 1914 को पुरकाजी में इतवारी लाल के घर हुआ था। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के अछूतोद्धार और सामाजिक समानता के विचारों से शुगन चंद मजदूर प्रभावित हुए। वर्ष 1932 में वह सामाजिक और राजनीतिक क्षेत्र में सक्रिय हुए।
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उन्होंने समाज में व्याप्त कुरीतियों को दूर करने का प्रयास किया। लोगों में एकता और जागरूकता पैदा करने के उद्देश्य से उन्होंने पुरकाजी की अबूपुरा बस्ती में कार्य शुरू किया।
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गांधी के रचनात्मक कार्यक्रमों में उनकी गहरी आस्था थी। इसी भावना के चलते वर्ष 1933 में उन्होंने नैनी विद्यापीठ इलाहाबाद में अध्ययन किया और पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री के साथ सामाजिक, राजनीतिक, दार्शनिक और वैज्ञानिक विषयों का अध्ययन किया। इसके बाद वर्ष 1936 में वर्धा से ग्राम सेवक का प्रशिक्षण प्राप्त किया।
वर्ष 1937 में प्रशिक्षित ग्राम सेवक के रूप में वह पुरकाजी लौटे और समाजसेवा के कार्य किए। वर्ष 1939 में शुगन चंद मजदूर नेताजी सुभाष चंद्र बोस के विचारों से अत्यंत प्रभावित हुए। देश को अंग्रेजी हुकूमत की गुलामी से मुक्त कराने का संकल्प लेकर वह स्वतंत्रता संग्राम में सक्रिय रूप से जुट गए।