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Muzaffarnagar News: ... हमारी आन बान शान है हिंदी, अलख जगाए चलो विश्व में निज भाषा की
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रुड़की रोड स्थित अमर उजाला कार्यालय पर संवाद कार्यक्रम में विचार व्यक्त करते हुए महिलाएं स्रोत
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फोटो
संवाद न्यूज एजेंसी
मुजफ्फरनगर। विश्व हिंदी दिवस की पूर्व संध्या पर अमर उजाला फाउंडेशन की ओर से संवाद कार्यक्रम का आयोजन किया गया। जिले की वरिष्ठ साहित्यकारों ने सोशल मीडिया के दौर में हिंदी लेखन में बढ़ती चुनौतियों पर विचार साझा किए। कवयित्री सुशीला शर्मा ने हमारी आन बान शान है हिंदी, अलख जगाए चलो विश्व में निज भाषा की को सुनाकर हिंदी भाषा के प्रति प्रेम को व्यक्त किया।
सपना अग्रवाल ने महिला जीवन के चरणों का भावूपर्ण वर्णन कविता के जरिए किया। सुमन प्रभा ने हिंदी की जय हो सदा सुनाकर हिंदी भाषा के सम्मान और भाव को व्यक्त किया।
सुनीता सोलंकी ने मोबाइल के फोन चलाने के बाद आए आदतों में आए बदलाव पर कविता सुनाकर आज दौर की कहानी कही। वीना गर्ग ने आज फिर निकला सूरज, अंजलि गुप्ता उत्तरेजा ने पराए शब्दों की चमक में अपनी मिट्टी की खूशबू खो दी को सुनाकर सभी की वाहवाही लूटी। लक्ष्मी डबराल ने आओ हिंदी हिंदी खेले को सुनाकर हिंदी को वास्तविकता में आगे बढ़ाने के लिए प्रेरित किया।
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युवा रचनाकरों ने पूछे प्रश्न, पाया समाधान
रुड़की रोड स्थित अमर उजाला कार्यालय पर आयोजित कार्यक्रम में युवा पीढ़ी की रचनाकार भी शामिल हुईं। उन्होंने लेखन के विषय में वरिष्ठ साहित्यकारों से प्रश्न पूछकर अपनी जिज्ञासाओं का समाधान भी प्राप्त किया। डीएवी कॉलेज में पढ़ रही एमए की छात्रा गुंजन ने कहा कि लेखन में बेहद रूचि है लेकिन कोरोना काल के दौरान से पुस्तक पढ़ने की आदत पर काफी प्रभाव पड़ा है। उनके प्रश्न का समाधान करते हुए वरिष्ठ साहित्यकारों ने कहा कि संकल्पशक्ति से ही मोबाइल से दूर रहा जा सकता है। रोजाना साहित्य पढ़ने के लिए अपने लक्ष्य निर्धारित करें। इससे शब्दकोश और लिखने की रूचि में बढ़ोतरी होगी। मोबाइल का सदुपयोग साहित्य को पढ़ने और लिखने के लिए करें। खतौली की रहने वाली युवा रचनाकार सोनिया की स्वरचित कविता की सराहना कर प्रोत्साहित किया गया।
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मुजफ्फरनगर। विश्व हिंदी दिवस की पूर्व संध्या पर अमर उजाला फाउंडेशन की ओर से संवाद कार्यक्रम का आयोजन किया गया। जिले की वरिष्ठ साहित्यकारों ने सोशल मीडिया के दौर में हिंदी लेखन में बढ़ती चुनौतियों पर विचार साझा किए। कवयित्री सुशीला शर्मा ने हमारी आन बान शान है हिंदी, अलख जगाए चलो विश्व में निज भाषा की को सुनाकर हिंदी भाषा के प्रति प्रेम को व्यक्त किया।
सपना अग्रवाल ने महिला जीवन के चरणों का भावूपर्ण वर्णन कविता के जरिए किया। सुमन प्रभा ने हिंदी की जय हो सदा सुनाकर हिंदी भाषा के सम्मान और भाव को व्यक्त किया।
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सुनीता सोलंकी ने मोबाइल के फोन चलाने के बाद आए आदतों में आए बदलाव पर कविता सुनाकर आज दौर की कहानी कही। वीना गर्ग ने आज फिर निकला सूरज, अंजलि गुप्ता उत्तरेजा ने पराए शब्दों की चमक में अपनी मिट्टी की खूशबू खो दी को सुनाकर सभी की वाहवाही लूटी। लक्ष्मी डबराल ने आओ हिंदी हिंदी खेले को सुनाकर हिंदी को वास्तविकता में आगे बढ़ाने के लिए प्रेरित किया।
युवा रचनाकरों ने पूछे प्रश्न, पाया समाधान
रुड़की रोड स्थित अमर उजाला कार्यालय पर आयोजित कार्यक्रम में युवा पीढ़ी की रचनाकार भी शामिल हुईं। उन्होंने लेखन के विषय में वरिष्ठ साहित्यकारों से प्रश्न पूछकर अपनी जिज्ञासाओं का समाधान भी प्राप्त किया। डीएवी कॉलेज में पढ़ रही एमए की छात्रा गुंजन ने कहा कि लेखन में बेहद रूचि है लेकिन कोरोना काल के दौरान से पुस्तक पढ़ने की आदत पर काफी प्रभाव पड़ा है। उनके प्रश्न का समाधान करते हुए वरिष्ठ साहित्यकारों ने कहा कि संकल्पशक्ति से ही मोबाइल से दूर रहा जा सकता है। रोजाना साहित्य पढ़ने के लिए अपने लक्ष्य निर्धारित करें। इससे शब्दकोश और लिखने की रूचि में बढ़ोतरी होगी। मोबाइल का सदुपयोग साहित्य को पढ़ने और लिखने के लिए करें। खतौली की रहने वाली युवा रचनाकार सोनिया की स्वरचित कविता की सराहना कर प्रोत्साहित किया गया।