Muzaffarnagar: 16 वर्ष पुराने हत्याकांड में फैसला, दो को फांसी की सजा, अदालत की लोकतंत्र पर सख्त टिप्पणी
मुजफ्फरनगर के मांडी गांव में 16 वर्ष पहले हुए राजबीर सिंह हत्याकांड में पूर्व प्रधान प्रमोद और सहदेव उर्फ पप्पू को मृत्युदंड की सजा सुनाई गई। अदालत ने कहा कि लोकतंत्र का आधार मतपत्र है, हथियार नहीं। विवेचना में लापरवाही पर पुलिस अधिकारियों के विरुद्ध भी कार्रवाई की संस्तुति की गई।
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विस्तार
मुजफ्फरनगर के तितावी थाना क्षेत्र के मांडी गांव में 16 वर्ष पहले किसान राजबीर सिंह की गोली मारकर हत्या करने के मामले में न्यायालय ने पूर्व प्रधान प्रमोद और उसके साथी सहदेव उर्फ पप्पू को मृत्युदंड की सजा सुनाई है।
अपर जिला एवं सत्र न्यायालय तथा त्वरित न्यायालय संख्या-3 के पीठासीन अधिकारी रवि कुमार दिवाकर ने फैसला सुनाते हुए पंचायत चुनाव की रंजिश में हुई इस हत्या को लोकतांत्रिक व्यवस्था पर हमला बताया। साथ ही विवेचना में लापरवाही को लेकर पुलिसकर्मियों के विरुद्ध वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक को पत्र भेजने के निर्देश भी दिए।
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16 वर्ष पुराने हत्याकांड में आया फैसला
मांडी गांव निवासी किसान राजबीर सिंह (60) की 24 अगस्त 2010 को खेत पर गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। घटना के बाद उनके पुत्र प्रदीप कुमार ने अज्ञात हमलावरों के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज कराई थी। पुलिस जांच में गांव के ही प्रमोद और सहदेव उर्फ पप्पू के नाम सामने आए, जिसके बाद दोनों के विरुद्ध आरोपपत्र न्यायालय में प्रस्तुत किया गया। 30 जून को दोनों का दोष सिद्ध हो चुका था और अब न्यायालय ने उन्हें मृत्युदंड से दंडित किया है।
चुनावी रंजिश बनी हत्या की वजह, आठ गवाहों ने मजबूत किया अभियोजन पक्ष
अभियोजन पक्ष के अनुसार, प्रधान पद के चुनाव की रंजिश के कारण इस हत्या की साजिश रची गई थी। सुनवाई के दौरान अभियोजन ने आठ गवाह प्रस्तुत किए। जांच में अमित और विपिन शर्मा के नाम भी सामने आए थे, लेकिन दोनों की पुलिस मुठभेड़ में मृत्यु हो जाने के कारण उनका नाम आरोपपत्र में शामिल नहीं किया गया।
फैसला सुनाते हुए न्यायालय ने कहा कि लोकतंत्र का आधार मतपत्र है, हथियार नहीं। पंचायत लोकतंत्र की पहली सीढ़ी है और चुनावी प्रतिस्पर्धा का समाधान हिंसा नहीं हो सकता।
अभियोजन ने पुराने अपराधों का भी किया उल्लेख
सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने न्यायालय को बताया कि जिस समय यह घटना हुई थी, उस समय मुजफ्फरनगर को अपराध की दृष्टि से अत्यधिक संवेदनशील माना जाने लगा था। न्यायालय के समक्ष विक्की त्यागी की न्यायालय परिसर में हुई हत्या, मुजफ्फरनगर दंगे तथा उस दौर की अपराध संबंधी घटनाओं का भी उल्लेख किया गया। जिन पर भौकाल जैसी वेब सीरीज बनाई गई। अभियोजन ने यह भी कहा कि वर्तमान समय में जिले की छवि में सुधार आया है।
दोना फैक्टरी से चर्चा में आया राजबीर का पौत्र अंकित
मांडी गांव के राजबीर की 16 साल पहले हत्या कर दी गई थी। वर्तमान में मांडी गांव के चर्चित दोना फैक्टरी मामले में उनका परिवार कानून के शिकंजे में घिरा हुआ है। उनके बेटे प्रदीप कुमार को पुलिस गिरफ्तार कर जेल भेज चुकी है, जबकि पौत्र अंकित बालियान ने होडल में सरेंडर किया है। पुलिस बी-वारंट पर लाने की तैयारी कर रही है। राजबीर के दूसरे बेटे विपिन को भी हरियाणा पुलिस ने अंकित का सरेंडर करने की साजिश का आरोपी बनाया है।