सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Muzaffarnagar News ›   Rakesh Tikait on Ayush Malik Case: Religion May Change, Caste Cannot; Protests Won’t Solve It

UP: आयुष मलिक मामले पर बोले टिकैत-धर्म चाहे दिन में तीन बार बदले; जाति नहीं बदलती

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुजफ्फरनगर Published by: Dimple Sirohi Updated Fri, 12 Jun 2026 12:46 PM IST
विज्ञापन
सार

आयुष मलिक प्रकरण पर भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने कहा कि धर्म बदला जा सकता है, लेकिन जाति नहीं। उन्होंने प्रदर्शन के बजाय संवाद और समझाने पर जोर दिया।

Rakesh Tikait on Ayush Malik Case: Religion May Change, Caste Cannot; Protests Won’t Solve It
भाकियू अध्यक्ष राकेश टिकैत - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार

उत्तर प्रदेश के शामली में चर्चित आयुष मलिक प्रकरण को लेकर भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता चौधरी राकेश टिकैत ने प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को अपनी व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार है और ऐसे मामलों का समाधान प्रदर्शन के बजाय संवाद और समझाइश से निकाला जाना चाहिए।



परिवार और समाज को समझाने की जरूरत
राकेश टिकैत ने कहा कि यदि कोई युवक या युवती अपना निर्णय ले चुका है, तो धरना-प्रदर्शन से कोई विशेष परिणाम नहीं निकलेगा। उन्होंने कहा कि परिवार के लोग आयुष को दोबारा समझा सकते हैं और आवश्यकता पड़ने पर वे स्वयं भी समझाने का प्रयास करेंगे। उन्होंने कहा कि विवाह करना कोई गलत बात नहीं है।
विज्ञापन
विज्ञापन


यह भी पढ़ें: Meerut: आकाशीय बिजली गिरते ही धराशायी हुई कच्ची छत, कमरे में सो रहे भाइयों पर गिरा मलबा, एक की दर्दनाक मौत

विज्ञापन

धर्म बदल सकता है, जाति नहीं
प्रकरण पर अपनी राय रखते हुए टिकैत ने कहा कि धर्म व्यक्ति दिन में कई बार भी बदल सकता है, लेकिन उसकी जाति नहीं बदलती। उन्होंने कहा कि देश में ऐसे अनेक उदाहरण मौजूद हैं, जहां अलग-अलग धर्मों के लोग विवाह कर एक साथ जीवन व्यतीत कर रहे हैं। विवाह के लिए धर्म परिवर्तन आवश्यक नहीं है।

प्रदर्शन नहीं, ज्ञान और संवाद जरूरी
स्वामी यशवीर महाराज द्वारा किए जा रहे विरोध प्रदर्शन के संबंध में पूछे गए सवाल पर टिकैत ने कहा कि प्रदर्शन से समाधान नहीं निकलेगा। उन्होंने कहा कि समाज को ज्ञान देने की आवश्यकता है। धार्मिक और सामाजिक मूल्यों की शिक्षा, सत्संग और सकारात्मक विचारों के माध्यम से लोगों को जागरूक किया जाना चाहिए। उनका कहना था कि अच्छे विचार और संवाद ही समाज को सही दिशा दे सकते हैं।

संविधान ने दिए हैं अधिकार
टिकैत ने कहा कि संविधान प्रत्येक नागरिक को अपनी पसंद के अनुसार जीवन जीने और निर्णय लेने का अधिकार देता है। यदि कोई व्यक्ति स्वयं अपने निर्णय पर अडिग है, तो उस पर किसी प्रकार का दबाव बनाना उचित नहीं है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

एप में पढ़ें

Followed