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Pilibhit News: बंगाल की सोंदेश, बीसलपुर की लौंज को मिलेगी विशेष पहचान
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पीलीभीत। बंगाली समाज की पारंपरिक मिठाई सोंदेश (संदेश) और बीसलपुर की लौंज को अलग पहचान मिलने वाली है। इन दोनों मिठाइयों को एक जिला-एक व्यंजन में शामिल करने के लिए प्रस्ताव भेजा गया है। उम्मीद है कि इन मिठाइयों काे इस योजना में स्थान मिलेगा। इससे इन मिठाइयों की मांग बढ़ेगी। इस काम से जुड़े कारीगर और व्यापारियों के कारोबार में बढ़ोतरी होगी।
प्रदेश सरकार ने 24 जनवरी यूपी दिवस के अवसर पर एक जिला-एक व्यंजन (ओडीओसी) योजना की शुरुआत की है। इसका उद्देश्य प्रत्येक जिले से एक विशिष्ट, ऐतिहासिक और पारंपरिक व्यंजन की पहचान किया जाना है। इस व्यंजन को राष्ट्रीय और अंतर राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाना है। इसी क्रम में सभी जिलों से विशेष व्यंजन से संबंधित प्रस्ताव मांगा गया था। उद्योग विभाग ने बीसलपुर में बनने वाली लौंज और बंगाली समुदाय की मिठाई सोंदेश का प्रस्ताव भेजा है। अलग-अलग स्थानों का प्रतिनिधित्व करने वाली इन मिठाइयों की बिक्री पूरे जिले में होती है। यह बड़े वर्ग की पसंद भी है। उपायुक्त उद्योग मुकेश कुमार ने बताया कि इन दोनों मिठाइयों को एक जिला-एक व्यंजन में शामिल करने के लिए प्रस्ताव भेजा है। इनके नाम पर स्वीकृति मिलने की उम्मीद है। संवाद
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विशेष तरह का छेना, शुद्धता का संदेश
बंगाली समाज की मिठाई सोंदेश एक विशेष तरह का छेना (दूध को फाड़कर बनने वाली मिठाई) है। इसमें चीनी या गुड़ मिलाकर हल्की मिठास रखी जाती है। दूध और अन्य पदार्थों से बनी इस मिठाई में मिलावट न होने का दावा किया जाता है। बंगाली समाज के पर्व और उत्सवों पर इस मिठाई का विशेष चलन है। जिले में शारदा डैम की तलहटी में 50 हजार से अधिक आबादी निवास करती है। इसके अलावा न्यूरिया, अमरिया और अन्य क्षेत्रों में भी बंगाली लोग रहते हैं।
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विशेष तरह का छेना, शुद्धता का संदेश
बंगाली समाज की मिठाई सोंदेश एक विशेष तरह का छेना (दूध को फाड़कर बनने वाली मिठाई) है। इसमें चीनी या गुड़ मिलाकर हल्की मिठास रखी जाती है। दूध और अन्य पदार्थों से बनी इस मिठाई में मिलावट न होने का दावा किया जाता है। बंगाली समाज के पर्व और उत्सवों पर इस मिठाई का विशेष चलन है। जिले में शारदा डैम की तलहटी में 50 हजार से अधिक आबादी निवास करती है। इसके अलावा न्यूरिया, अमरिया और अन्य क्षेत्रों में भी बंगाली लोग रहते हैं।
