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Pilibhit News: पीलीभीत टाइगर रिजर्व में गज मित्र और तेंदुआ मित्र की होगी तैनाती
संवाद न्यूज एजेंसी, पीलीभीत
Updated Sun, 08 Mar 2026 11:56 PM IST
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पीलीभीत। पीलीभीत टाइगर रिजर्व के आसपास मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने के लिए वन विभाग अब नई पहल करने जा रहा है। बाघ मित्र मॉडल की तर्ज पर जंगल से बाहर घूमने वाले जंगली हाथियों और तेंदुओं की निगरानी के लिए जल्द ही गज मित्र और तेंदुआ मित्र तैनात किए जाएंगे। वन एवं वन्यजीव प्रभाग अगले वित्तीय वर्ष में युवाओं का चयन कर उन्हें प्रशिक्षित करेगा। यह व्यवस्था प्रस्तावित टीओटीआर (टाइगर आउटसाइड टाइगर रिजर्व) प्रोजेक्ट के तहत लागू की जाएगी।
पीलीभीत टाइगर रिजर्व का दर्जा मिलने के बाद वन और वन्यजीवों के संरक्षण में बेहतर प्रयास किए गए। इससे बाघ समेत वन्यजीवों की संख्या में इजाफा हुआ। वन्यजीवों की संख्या बढ़ने के कारण कई बार बाघ और तेंदुए जंगल से निकलकर आबादी वाले क्षेत्रों में पहुंच जाते हैं, जिससे मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाएं सामने आती रही हैं।
इन घटनाओं को रोकने के लिए पीलीभीत टाइगर रिजर्व और विश्व प्रकृति निधि (डब्ल्यूडब्ल्यूएफ) ने बाघ मित्र योजना शुरू की थी। इसके तहत जंगल से सटे गांवों के जागरूक युवाओं को प्रशिक्षित कर टीम में शामिल किया गया। विशेषज्ञों ने इन्हें बाघ और तेंदुए के पदचिह्न पहचानने तथा उनके व्यवहार को समझने का प्रशिक्षण दिया। वर्ष 2020 तक सभी स्वयंसेवकों ने अपनी जिम्मेदारी संभाल ली और ग्रामीणों को जागरूक करने में अहम भूमिका निभाई। शुरुआत में बाघ मित्रों की संख्या 60 थी, जो अब बढ़कर करीब 120 हो चुकी है।
अब इसी मॉडल को आगे बढ़ाते हुए जंगल से बाहर आने वाले जंगली हाथियों और तेंदुओं की निगरानी के लिए गज मित्र और तेंदुआ मित्र तैनात किए जाएंगे। इसके लिए वन एवं वन्यजीव प्रभाग जंगल से सटे संवेदनशील क्षेत्रों के युवाओं का चयन करेगा और उन्हें विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा।
प्रशिक्षण के बाद ये युवा अपने-अपने क्षेत्रों में वन्यजीवों की गतिविधियों पर नजर रखेंगे और किसी भी खतरे की स्थिति में तुरंत विभाग को सूचना देंगे। यह पूरी व्यवस्था टीओटीआर (टाइगर आउटसाइड टाइगर रिजर्व) प्रोजेक्ट के तहत लागू की जाएगी। हाल ही में सरकार ने टाइगर रिजर्व के बाहर घूमने वाले बाघों के प्रबंधन और मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने के लिए इस प्रोजेक्ट को मंजूरी दी है।
प्रोजेक्ट लागू होने के बाद जंगल से बाहर घूमने वाले वन्यजीवों की अत्याधुनिक तकनीक से निगरानी भी की जाएगी। डीएफओ भरत कुमार डीके ने बताया कि टीओटीआर प्रोजेक्ट के तहत किए जा रहे प्रयासों में तेंदुओं और हाथियों की निगरानी के लिए तेंदुआ मित्र और गज मित्र भी रखे जाएंगे, इनके लिए जंगल से सटे संवेदनशील इलाकों के युवाओं का चयन किया जाएगा।
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पीलीभीत टाइगर रिजर्व का दर्जा मिलने के बाद वन और वन्यजीवों के संरक्षण में बेहतर प्रयास किए गए। इससे बाघ समेत वन्यजीवों की संख्या में इजाफा हुआ। वन्यजीवों की संख्या बढ़ने के कारण कई बार बाघ और तेंदुए जंगल से निकलकर आबादी वाले क्षेत्रों में पहुंच जाते हैं, जिससे मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाएं सामने आती रही हैं।
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इन घटनाओं को रोकने के लिए पीलीभीत टाइगर रिजर्व और विश्व प्रकृति निधि (डब्ल्यूडब्ल्यूएफ) ने बाघ मित्र योजना शुरू की थी। इसके तहत जंगल से सटे गांवों के जागरूक युवाओं को प्रशिक्षित कर टीम में शामिल किया गया। विशेषज्ञों ने इन्हें बाघ और तेंदुए के पदचिह्न पहचानने तथा उनके व्यवहार को समझने का प्रशिक्षण दिया। वर्ष 2020 तक सभी स्वयंसेवकों ने अपनी जिम्मेदारी संभाल ली और ग्रामीणों को जागरूक करने में अहम भूमिका निभाई। शुरुआत में बाघ मित्रों की संख्या 60 थी, जो अब बढ़कर करीब 120 हो चुकी है।
अब इसी मॉडल को आगे बढ़ाते हुए जंगल से बाहर आने वाले जंगली हाथियों और तेंदुओं की निगरानी के लिए गज मित्र और तेंदुआ मित्र तैनात किए जाएंगे। इसके लिए वन एवं वन्यजीव प्रभाग जंगल से सटे संवेदनशील क्षेत्रों के युवाओं का चयन करेगा और उन्हें विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा।
प्रशिक्षण के बाद ये युवा अपने-अपने क्षेत्रों में वन्यजीवों की गतिविधियों पर नजर रखेंगे और किसी भी खतरे की स्थिति में तुरंत विभाग को सूचना देंगे। यह पूरी व्यवस्था टीओटीआर (टाइगर आउटसाइड टाइगर रिजर्व) प्रोजेक्ट के तहत लागू की जाएगी। हाल ही में सरकार ने टाइगर रिजर्व के बाहर घूमने वाले बाघों के प्रबंधन और मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने के लिए इस प्रोजेक्ट को मंजूरी दी है।
प्रोजेक्ट लागू होने के बाद जंगल से बाहर घूमने वाले वन्यजीवों की अत्याधुनिक तकनीक से निगरानी भी की जाएगी। डीएफओ भरत कुमार डीके ने बताया कि टीओटीआर प्रोजेक्ट के तहत किए जा रहे प्रयासों में तेंदुओं और हाथियों की निगरानी के लिए तेंदुआ मित्र और गज मित्र भी रखे जाएंगे, इनके लिए जंगल से सटे संवेदनशील इलाकों के युवाओं का चयन किया जाएगा।