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Pilibhit News: खुले में फेंका जा रहा अस्पतालों का बायोवेस्ट, संक्रमण का खतरा बढ़ा
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गांधी स्टेडियम मार्ग पर एक हॉस्पिटल के काली पन्नियों में मेडिकल वेस्ट के ढेर। संवाद
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पीलीभीत। शहर के कई निजी अस्पतालों के आसपास खुले में डाला गया बायोवेस्ट (मेडिकल कचरा) संक्रमण को दावत दे रहा है। इससे बीमारियों के फैलने की आशंका बढ़ गई है। विभाग के जिम्मेदारों की अनदेखी से निजी अस्पतालों से बायोवेस्ट के निस्तारण के बजाय खुले व पन्नी में भरकर कूड़े के ढेर में फेंका जा रहा है।
रविवार को शहर के छतरी चौराहे के करीब पड़े मिले मेडिकल वेस्ट का फोटो वायरल होने पर स्वास्थ्य विभाग ने इसे गंभीरता से लिया। छतरी चौराहे के करीब संचालित पैथालॉजी लैब सहित चार अस्पतालों को नोटिस भेजा गया। इसमें डाॅ. सतीश, डॉ. प्रभाकर, डॉ. साहनी और सत्यम डायग्नोस्टिक सेंटर से जवाब मांगा गया है। विभागीय जांच भी कराई जा रही है। इसके अलावा शहर के कई अस्पतालों का मेडिकल वेस्ट खुले में फेंका जा रहा है।
पड़ताल में मंगलवार को डिग्री कॉलेज चौराहे से रामलीला मार्ग जाने वाले एक हॉस्पिटल के करीब मेडिकल कचरा खुले में पड़ा मिला। इसमें उपयोग किए गए हैंड ग्लब्स, ब्लड रखने का पैक, सिरिंज आदि पड़ी थी। संवाद
खुले में मिला बायो मेडिकल वेस्ट का ढेर
शहर के केजीएन कॉलोनी गेट एक के करीब संचालित एक अस्पताल के करीब मेडिकल वेस्ट का ढेर लगा नजर आया। इसमें पट्टी, एनिमा, रूई, हैंड ग्लब्स आदि देखे गए। पास के एक व्यक्ति ने बताया हॉस्पिटल संचालक रोज ही यहां सुबह कूड़ा डाल देते हैं।
हॉस्पिटल व लैब के मेडिकल वेस्ट का ढेर
गांधी स्टेडियम से पहले सड़क के किनारे संचालित हॉस्पिटल व एक प्रतिष्ठित लैब के पीछे गली में खाली स्थान पर बड़ी काली पन्नियों में मेडिकल वेस्ट पड़ा दिखा। उपयोग की जा चुकी पट्टी, रूई आदि के ढेर लगे थे। मेडिकल कचरे का बड़ा ढेर आसपास रहने वालों के लिए संक्रमण का खतरा बढ़ा रहा है।
यह है बायोमेडिकल वेस्ट निस्तारण का नियम
बायोमेडिकल वेस्ट निस्तारण-2016 के तहत मेडिकल कचरे का निस्तारण अनिवार्य रूप से किया जाता है। अस्पतालों में कचरे को रंगीन डिब्बों पीला, लाल, नीला व सफेद में अलग किया जाता है। इसके बाद कचरे को सुरक्षित तरीके से पैक कर अधिकृत एजेंसी के माध्यम से निर्धारित दो दिवस के अंदर कॉमन बायोमेडिकल वेस्ट ट्रीटमेंट सुविधा तक भेजा जाता है। वहां कचरे का उपचार इन्सिनरेशन, ऑटोक्लेविंग या केमिकल प्रोसेस से किया जाता है। अंत में अवशेषों का सुरक्षित लैंडफिल में निस्तारण होता है।
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बायोमेडिकल वेस्ट निस्तारण के लिए एक कमेटी गठित की गई है, जो कि शहर में निगरानी बढ़ाएगी। इसी के साथ निजी अस्पताल पर कार्रवाई भी करेगी। - डॉ. आलोक कुमार, मुख्य चिकित्साधिकारी
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पड़ताल में मंगलवार को डिग्री कॉलेज चौराहे से रामलीला मार्ग जाने वाले एक हॉस्पिटल के करीब मेडिकल कचरा खुले में पड़ा मिला। इसमें उपयोग किए गए हैंड ग्लब्स, ब्लड रखने का पैक, सिरिंज आदि पड़ी थी। संवाद
खुले में मिला बायो मेडिकल वेस्ट का ढेर
शहर के केजीएन कॉलोनी गेट एक के करीब संचालित एक अस्पताल के करीब मेडिकल वेस्ट का ढेर लगा नजर आया। इसमें पट्टी, एनिमा, रूई, हैंड ग्लब्स आदि देखे गए। पास के एक व्यक्ति ने बताया हॉस्पिटल संचालक रोज ही यहां सुबह कूड़ा डाल देते हैं।
हॉस्पिटल व लैब के मेडिकल वेस्ट का ढेर
गांधी स्टेडियम से पहले सड़क के किनारे संचालित हॉस्पिटल व एक प्रतिष्ठित लैब के पीछे गली में खाली स्थान पर बड़ी काली पन्नियों में मेडिकल वेस्ट पड़ा दिखा। उपयोग की जा चुकी पट्टी, रूई आदि के ढेर लगे थे। मेडिकल कचरे का बड़ा ढेर आसपास रहने वालों के लिए संक्रमण का खतरा बढ़ा रहा है।
यह है बायोमेडिकल वेस्ट निस्तारण का नियम
बायोमेडिकल वेस्ट निस्तारण-2016 के तहत मेडिकल कचरे का निस्तारण अनिवार्य रूप से किया जाता है। अस्पतालों में कचरे को रंगीन डिब्बों पीला, लाल, नीला व सफेद में अलग किया जाता है। इसके बाद कचरे को सुरक्षित तरीके से पैक कर अधिकृत एजेंसी के माध्यम से निर्धारित दो दिवस के अंदर कॉमन बायोमेडिकल वेस्ट ट्रीटमेंट सुविधा तक भेजा जाता है। वहां कचरे का उपचार इन्सिनरेशन, ऑटोक्लेविंग या केमिकल प्रोसेस से किया जाता है। अंत में अवशेषों का सुरक्षित लैंडफिल में निस्तारण होता है।
बायोमेडिकल वेस्ट निस्तारण के लिए एक कमेटी गठित की गई है, जो कि शहर में निगरानी बढ़ाएगी। इसी के साथ निजी अस्पताल पर कार्रवाई भी करेगी। - डॉ. आलोक कुमार, मुख्य चिकित्साधिकारी

गांधी स्टेडियम मार्ग पर एक हॉस्पिटल के काली पन्नियों में मेडिकल वेस्ट के ढेर। संवाद

गांधी स्टेडियम मार्ग पर एक हॉस्पिटल के काली पन्नियों में मेडिकल वेस्ट के ढेर। संवाद

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