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Pilibhit News: हाथ से उखड़ती सड़क, गुणवत्ता पर सवाल
संवाद न्यूज एजेंसी, पीलीभीत
Updated Sun, 15 Mar 2026 11:44 PM IST
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पीलीभीत। जिले में हाथ से उखड़ती सड़कों के वायरल वीडियो से कार्य की गुणवत्ता और जिम्मेदारों की कार्यशैली सवालों के घेरे में है। मानकों की अनदेखी के आरोप और प्रभावित होता काम भी विभाग की मुश्किलें बढ़ा रहा है। अगर, हाथ या पैरों के रगड़ने से सड़क पर लगी सामग्री बिखरने-निकलने लगे ताे इसकी मजबूती का अंदाजा लगाया जा सकता है। हालांकि, विभाग और जानकार सड़क की मजबूती के लिए पर्याप्त समय न मिलने की बात कह रहे हैं। ग्रामीण इलाके की सड़क को मजबूती के लिए कम से कम तीन दिन का समय चाहिए होता है।
बीते एक माह में जिले में गजरौला, घुंघचाई और सेहरामऊ उत्तरी क्षेत्र में बन रही लोक निर्माण की तीन सड़कों के वीडियो वायरल हो चुके हैं। करोड़ों की लागत से बन रहीं यह सड़कें हाथ से उखड़ती दिख रही हैं। ग्रामीणों के आक्रोश के बाद काम भी बंद हो जा रहा है। साथ ही विभाग और जिला प्रशासन के गुणवत्ता परक कार्य के दावे पर सवाल उठने लगे हैं। इस समय लोक निर्माण विभाग जिले में करीब 15 सड़कों की मरम्मत और निर्माण करा रहा है। वीडियो वायरल होने के बाद अन्य सड़कों की गुणवत्ता पर भी संदेह बन गया है।
हाथ से उखड़ी सड़क, सांसद से शिकायत
केस-एक: 28 फरवरी को गजरौला से विधिपुर जाने वाली सड़क का एक वीडियो वायरल हुआ था। इसमें निर्माणाधीन सड़क को ग्रामीण हाथ से उखाड़ते दिखे रहे थे। बताया गया कि सड़क का निर्माण करीब 80 लाख रुपये से कराया जा रहा है। ग्रामीणों ने मानकों की अनदेखी का आरोप भी लगाया था। मामले की शिकायत सांसद जितिन प्रसाद से की थी।
एक करोड़ से बन रही सड़क की गुणवत्ता पर भी सवाल
केस-दो : करीब एक करोड़ की लागत से बन रही घुंघचाई क्षेत्र की शेरपुर मकरंद से होकर चंदुइया जाने वाली सड़क का वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हुआ है। इसमें भी ग्रामीणों के हाथ लगाते ही सड़क पपड़ी की तरह उखड़ती देखी जा रही है। यह वीडियो नौ मार्च का बताया गया। ग्रामीणों के आक्रोश के बाद काम भी बंद हो गया। विभाग सड़क को मजबूती भर का समय न मिलने की बात कह रहा है।
सड़क की मजबूती के यह होते हैं मानक
लोक निर्माण विभाग के एई संतोष गौतम के अनुसार, तारकोल से बनने वाली सड़क की दो श्रेणियां हैं बिटुमिनस कंक्रीट (बीसी) और प्रीमिक्स कंक्रीट (पीसी)। सात मीटर या इससे अधिक चौड़ाई की सड़क का निर्माण बीसी में आता है। इसमें मशीन का प्रयोग किया जाता है। माधोटांडा, पूरनपुर, गजरौला आदि मार्ग इस श्रेणी में आते हैं। गांवों की सड़क पीसी श्रेणी में आती है। इसमें भी प्रधानमंत्री ग्राम सड़क से बनने वाली सड़क शामिल नहीं होती।
गांवों की सड़क के होते हैं ये मानक
- इसके निर्माण में मशीन के बजाय मिक्साल का प्रयोग किया जाता है।
- इस सड़क की मोटाई दो सेंटीमीटर तक रहती है।
- मजबूती के के लिए दो से तीन दिन का समय और अधिकतम सात दिन चाहिए होते हैं।
आगे-आगे निर्माण, पीछे उखड़ती सड़क से खड़े होते सवाल
जिन सड़कों के वीडियो वायरल हुए हैं, उनका निर्माण कई दिनों से चल रहा है। बताया जा रहा है कि सड़क को मजबूती के लिए दो से तीन दिन का समय भी मिला था। इसके बाद भी सड़क उखड़ रही है। इस मामले में विभाग का तर्क है कि सड़क को किनारे से उखाड़ा गया है। कभी-कभार ठेकेदार तय चौड़ाई से अधिक मैटेरियल डाल देते हैं। वहीं से ग्रामीण इसे उखाड़ रहे हैं। हालांकि विभाग का यह तर्क गले नहीं उतर रहा।
वर्जन
तारकोल की सड़क को मजबूती के लिए कम से कम तीन दिन का समय होता है। जाे वीडियो सामने आए हैं उनमें कुछ में तो आगे काम चलता भी दिख रहा है। अगर सड़क पर यातायात अच्छा हो तो मजबूती भी जल्द आती है। फिलहाल जांच कराई जा रही है।- राजेश चौधरी, एक्सईएन लोक निर्माण विभाग
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बीते एक माह में जिले में गजरौला, घुंघचाई और सेहरामऊ उत्तरी क्षेत्र में बन रही लोक निर्माण की तीन सड़कों के वीडियो वायरल हो चुके हैं। करोड़ों की लागत से बन रहीं यह सड़कें हाथ से उखड़ती दिख रही हैं। ग्रामीणों के आक्रोश के बाद काम भी बंद हो जा रहा है। साथ ही विभाग और जिला प्रशासन के गुणवत्ता परक कार्य के दावे पर सवाल उठने लगे हैं। इस समय लोक निर्माण विभाग जिले में करीब 15 सड़कों की मरम्मत और निर्माण करा रहा है। वीडियो वायरल होने के बाद अन्य सड़कों की गुणवत्ता पर भी संदेह बन गया है।
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हाथ से उखड़ी सड़क, सांसद से शिकायत
केस-एक: 28 फरवरी को गजरौला से विधिपुर जाने वाली सड़क का एक वीडियो वायरल हुआ था। इसमें निर्माणाधीन सड़क को ग्रामीण हाथ से उखाड़ते दिखे रहे थे। बताया गया कि सड़क का निर्माण करीब 80 लाख रुपये से कराया जा रहा है। ग्रामीणों ने मानकों की अनदेखी का आरोप भी लगाया था। मामले की शिकायत सांसद जितिन प्रसाद से की थी।
एक करोड़ से बन रही सड़क की गुणवत्ता पर भी सवाल
केस-दो : करीब एक करोड़ की लागत से बन रही घुंघचाई क्षेत्र की शेरपुर मकरंद से होकर चंदुइया जाने वाली सड़क का वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हुआ है। इसमें भी ग्रामीणों के हाथ लगाते ही सड़क पपड़ी की तरह उखड़ती देखी जा रही है। यह वीडियो नौ मार्च का बताया गया। ग्रामीणों के आक्रोश के बाद काम भी बंद हो गया। विभाग सड़क को मजबूती भर का समय न मिलने की बात कह रहा है।
सड़क की मजबूती के यह होते हैं मानक
लोक निर्माण विभाग के एई संतोष गौतम के अनुसार, तारकोल से बनने वाली सड़क की दो श्रेणियां हैं बिटुमिनस कंक्रीट (बीसी) और प्रीमिक्स कंक्रीट (पीसी)। सात मीटर या इससे अधिक चौड़ाई की सड़क का निर्माण बीसी में आता है। इसमें मशीन का प्रयोग किया जाता है। माधोटांडा, पूरनपुर, गजरौला आदि मार्ग इस श्रेणी में आते हैं। गांवों की सड़क पीसी श्रेणी में आती है। इसमें भी प्रधानमंत्री ग्राम सड़क से बनने वाली सड़क शामिल नहीं होती।
गांवों की सड़क के होते हैं ये मानक
- इसके निर्माण में मशीन के बजाय मिक्साल का प्रयोग किया जाता है।
- इस सड़क की मोटाई दो सेंटीमीटर तक रहती है।
- मजबूती के के लिए दो से तीन दिन का समय और अधिकतम सात दिन चाहिए होते हैं।
आगे-आगे निर्माण, पीछे उखड़ती सड़क से खड़े होते सवाल
जिन सड़कों के वीडियो वायरल हुए हैं, उनका निर्माण कई दिनों से चल रहा है। बताया जा रहा है कि सड़क को मजबूती के लिए दो से तीन दिन का समय भी मिला था। इसके बाद भी सड़क उखड़ रही है। इस मामले में विभाग का तर्क है कि सड़क को किनारे से उखाड़ा गया है। कभी-कभार ठेकेदार तय चौड़ाई से अधिक मैटेरियल डाल देते हैं। वहीं से ग्रामीण इसे उखाड़ रहे हैं। हालांकि विभाग का यह तर्क गले नहीं उतर रहा।
वर्जन
तारकोल की सड़क को मजबूती के लिए कम से कम तीन दिन का समय होता है। जाे वीडियो सामने आए हैं उनमें कुछ में तो आगे काम चलता भी दिख रहा है। अगर सड़क पर यातायात अच्छा हो तो मजबूती भी जल्द आती है। फिलहाल जांच कराई जा रही है।- राजेश चौधरी, एक्सईएन लोक निर्माण विभाग