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Pilibhit News: सड़क सुरक्षा सिर्फ दावों में, बेलगाम दौड़ रहे खतरों के वाहन...ब्लैक स्पॉट पर भी हादसे
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असम चौराहे पर फ्लाईओवर के नीचे सवारियाें के इंतजार में खड़ी मैजिक और टेंपो। संवाद
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पीलीभीत। जिले में सड़क सुरक्षा सिर्फ दावों में ही नजर आ रहा है। इसके उल्ट हर साल सड़क हादसे बढ़ रहे हैं। अक्सर किसी न किसी मार्ग पर तेज रफ्तार, ओवरलोड वाहनों और यातायात नियमों की अनदेखी लोगों की जिंदगी पर भारी पड़ रही है। हाईवे पर फर्राटा भरते डग्गामार वाहन और क्षमता से अधिक सवारियां ढो रहे मैजिक-टेंपो दुर्घटनाओं की बड़ी वजह बन चुके हैं। परिवहन और पुलिस विभाग की ओर से ब्लैक स्पॉट तो चिह्नित किए गए, लेकिन जमीनी स्तर पर प्रभावी कार्रवाई न होने से हालात जस के तस बने हुए हैं। यही वजह है कि दो साल में 508 लोग जान गंवा चुके हैं। यानी 2024 में 212 तो 2025 में 296 लोगों ने जान गंवाई।
जिले की सड़कों पर यातायात व्यवस्था लगातार बदहाल होती जा रही है। शहर से लेकर ग्रामीण अंचलों तक नियमों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। खासतौर पर माधोटांडा-पीलीभीत, बीसलपुर और अन्य प्रमुख मार्गों पर मैजिक गाड़ी, टेंपो और डग्गामार वाहन क्षमता से कहीं अधिक सवारियां भरकर दौड़ रहे हैं। कई वाहनों में यात्रियों को दरवाजों और पीछे लटककर सफर करना पड़ता है। इससे हर समय हादसे का खतरा बना रहता है।
हाईवे पर तेज रफ्तार भी दुर्घटनाओं का बड़ा कारण बन रही है। कई वाहन चालक नियमों की अनदेखी कर ओवरटेकिंग और लापरवाही से वाहन चलाने से बाज नहीं आते। इससेे आए दिन सड़क हादसों में लोगों की जान जा रही है। यही वजह है कि परिवहन और पुलिस की आंकड़ों में हादसे में मरने वाले और घायलों की संख्या में हर साल इजाफा हो रहा है। संवाद
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कागजों में बढ़ रहे ब्लैक स्पॉट, संकेतक व अन्य उपाय गायब
लगातार बढ़ रहे सड़क हादसों को लेकर परिवहन और पुलिस प्रशासन ने जिले में दुर्घटना संभावित कई ब्लैक स्पॉट चिह्नित किए। आंकड़ों के अनुसार, पूर्व की अपेक्षा में वर्तमान में जिले भर में करीब नौ ब्लैक स्पॉट और भी बढ़ गए। वर्तमान में करीब 36 ब्लैक स्पॉट हैं। नियमानुसार, इन स्थानों पर चेतावनी बोर्ड, संकेतक आदि लगाने पर जोर दिया जाता है। विभाग की ओर से भी इन स्थानों पर चेतावनी बोर्ड, गति सीमा तय करने और निगरानी बढ़ाने के दावे किए गए, लेकिन कई ऐसे ब्लैक स्पॉट हैं, जहां अभी तक कोई भी संकेतक आदि नहीं लगाया जा सका है। नतीजतन हादसे लगातार हो रहे हैं।
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हाईवे पर दौड़ते ई-रिक्शा, नियमों की अनदेखी पड़ रही भारी
ई-रिक्शा जहां शहर की यातायात व्यवस्था में बड़ी चुनौती बने हुए हैं। वहीं, कई ई-रिक्शा चालक निर्धारित संख्या से अधिक सवारियां बैठाकर हाईवे पर भी फर्राटा भर रहे हैं। शहर से करीब 10 से 15 किलोमीटर दूर बसे गांवों के लोग ई-रिक्शा से ही जोखिम के बीच हाईवे से होकर सफर करने को मजबूर हैं।
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सात का नियम, 20 से 25 सवारियां बैठाकर बेखौफ दौड़ रहे डग्गामार
जिले के अधिकांश स्थानीय मार्गों पर रोडवेज की सेवा न के बराबर हैं। ऐसे में माधोटांडा-पीलीभीत मार्ग पर करीब 40 मैजिक-टेंपो का संचालन किया जा रहा है। वहीं, बीसलपुर-पीलीभीत मार्ग पर भी 50 से अधिक मैजिक-टेंपो संचालित किए जा रहे हैं। इसी प्रकार पीलीभीत-पूरनपुर मार्ग पर भी करीब 50 डग्गामार वाहन संचालित हो रहे हैं। यह वाहन शहर के प्रमुख चौराहे पर खड़े होकर बेधड़क सवारियां बैठाते हैं। आलम यह है कि मैजिक में सात सवारियां बैठाने के स्थान पर करीब 20 से 25 सवारियां बैठाते हैं। वहीं, टेंपो में भी सात सवारियां बैठाने के बजाय 15 सवारियां तक बैठाई जाती हैं। दिन में कई चक्कर लगाने की होड़ में इन वाहनों के चालक हाईवे पर रफ्तार भरकर दौड़ते दिखाई देते हैं, लेकिन इन पर अंकुश नहीं लग पा रहा है।
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हर साल बढ़ रही हादसों की संख्या
परिवहन और पुलिस के आंकड़ों की मानें तो जिले में वर्ष 2023 में 426 हादसे हुए। इनमें 216 लोगों की मौत हुई, जबकि 247 घायल हुए। वहीं, वर्ष 2024 में 446 हादसे हुए, इनमें 212 लोगों की मौत और 332 लोग घायल हुए। वर्ष 2025 की बात करें तो हादसों में इजाफा हो गया। 538 हादसों में मरने वालों की संख्या 296 रही, जबकि 405 लोग घायल हुए। वर्ष 2026 में अब तक सामने आए सड़क हादसों में 35 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है।
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नियमित कर रहे प्रभावी कार्रवाई, संवेदनशील क्षेत्रों में लगाई गईं टीमें
इस साल जनवरी से मार्च तक हादसों की संख्या घटी थी, लेकिन अप्रैल में संख्या में इजाफा हुआ है। हादसों को रोकने के लिए चेकिंग अभियान तेज किया गया है। तेज रफ्तार, ड्रिंक एंड ड्राइव से लेकर अन्य चालान भी तेज किए गए हैं। नियम तोड़ने वाले मैजिक आदि वाहनों पर भी नियमित कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। इसके अलावा पांच संवेदनशील थाना क्षेत्रों में गठित टीमें हादसों का कारण और रोकथाम के लिए जिम्मेदारी निभा रही हैं। - आकृति पटेल, सीओ ट्रैफिक
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अप्रैल में चिह्नित हुए नए ब्लैक स्पॉट, कार्ययोजना पर जल्द होगा अमल
अप्रैल माह में नए ब्लैक स्पॉट चिह्नित किए गए हैं। संकेतक समेत अन्य कार्यों के लिए कार्ययोजना बनाई गई है, जिसपर जल्द ही अमल शुरू किया जाएगा। हादसों को रोकने के लिए नियमों की अनदेखी करने वाले वाहनों पर कार्रवाई नियमित जारी है। इसको और भी प्रभावी किया जाएगा। - वीरेंद्र सिंह, एआरटीओ
जिले की सड़कों पर यातायात व्यवस्था लगातार बदहाल होती जा रही है। शहर से लेकर ग्रामीण अंचलों तक नियमों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। खासतौर पर माधोटांडा-पीलीभीत, बीसलपुर और अन्य प्रमुख मार्गों पर मैजिक गाड़ी, टेंपो और डग्गामार वाहन क्षमता से कहीं अधिक सवारियां भरकर दौड़ रहे हैं। कई वाहनों में यात्रियों को दरवाजों और पीछे लटककर सफर करना पड़ता है। इससे हर समय हादसे का खतरा बना रहता है।
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हाईवे पर तेज रफ्तार भी दुर्घटनाओं का बड़ा कारण बन रही है। कई वाहन चालक नियमों की अनदेखी कर ओवरटेकिंग और लापरवाही से वाहन चलाने से बाज नहीं आते। इससेे आए दिन सड़क हादसों में लोगों की जान जा रही है। यही वजह है कि परिवहन और पुलिस की आंकड़ों में हादसे में मरने वाले और घायलों की संख्या में हर साल इजाफा हो रहा है। संवाद
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लगातार बढ़ रहे सड़क हादसों को लेकर परिवहन और पुलिस प्रशासन ने जिले में दुर्घटना संभावित कई ब्लैक स्पॉट चिह्नित किए। आंकड़ों के अनुसार, पूर्व की अपेक्षा में वर्तमान में जिले भर में करीब नौ ब्लैक स्पॉट और भी बढ़ गए। वर्तमान में करीब 36 ब्लैक स्पॉट हैं। नियमानुसार, इन स्थानों पर चेतावनी बोर्ड, संकेतक आदि लगाने पर जोर दिया जाता है। विभाग की ओर से भी इन स्थानों पर चेतावनी बोर्ड, गति सीमा तय करने और निगरानी बढ़ाने के दावे किए गए, लेकिन कई ऐसे ब्लैक स्पॉट हैं, जहां अभी तक कोई भी संकेतक आदि नहीं लगाया जा सका है। नतीजतन हादसे लगातार हो रहे हैं।
हाईवे पर दौड़ते ई-रिक्शा, नियमों की अनदेखी पड़ रही भारी
ई-रिक्शा जहां शहर की यातायात व्यवस्था में बड़ी चुनौती बने हुए हैं। वहीं, कई ई-रिक्शा चालक निर्धारित संख्या से अधिक सवारियां बैठाकर हाईवे पर भी फर्राटा भर रहे हैं। शहर से करीब 10 से 15 किलोमीटर दूर बसे गांवों के लोग ई-रिक्शा से ही जोखिम के बीच हाईवे से होकर सफर करने को मजबूर हैं।
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सात का नियम, 20 से 25 सवारियां बैठाकर बेखौफ दौड़ रहे डग्गामार
जिले के अधिकांश स्थानीय मार्गों पर रोडवेज की सेवा न के बराबर हैं। ऐसे में माधोटांडा-पीलीभीत मार्ग पर करीब 40 मैजिक-टेंपो का संचालन किया जा रहा है। वहीं, बीसलपुर-पीलीभीत मार्ग पर भी 50 से अधिक मैजिक-टेंपो संचालित किए जा रहे हैं। इसी प्रकार पीलीभीत-पूरनपुर मार्ग पर भी करीब 50 डग्गामार वाहन संचालित हो रहे हैं। यह वाहन शहर के प्रमुख चौराहे पर खड़े होकर बेधड़क सवारियां बैठाते हैं। आलम यह है कि मैजिक में सात सवारियां बैठाने के स्थान पर करीब 20 से 25 सवारियां बैठाते हैं। वहीं, टेंपो में भी सात सवारियां बैठाने के बजाय 15 सवारियां तक बैठाई जाती हैं। दिन में कई चक्कर लगाने की होड़ में इन वाहनों के चालक हाईवे पर रफ्तार भरकर दौड़ते दिखाई देते हैं, लेकिन इन पर अंकुश नहीं लग पा रहा है।
हर साल बढ़ रही हादसों की संख्या
परिवहन और पुलिस के आंकड़ों की मानें तो जिले में वर्ष 2023 में 426 हादसे हुए। इनमें 216 लोगों की मौत हुई, जबकि 247 घायल हुए। वहीं, वर्ष 2024 में 446 हादसे हुए, इनमें 212 लोगों की मौत और 332 लोग घायल हुए। वर्ष 2025 की बात करें तो हादसों में इजाफा हो गया। 538 हादसों में मरने वालों की संख्या 296 रही, जबकि 405 लोग घायल हुए। वर्ष 2026 में अब तक सामने आए सड़क हादसों में 35 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है।
नियमित कर रहे प्रभावी कार्रवाई, संवेदनशील क्षेत्रों में लगाई गईं टीमें
इस साल जनवरी से मार्च तक हादसों की संख्या घटी थी, लेकिन अप्रैल में संख्या में इजाफा हुआ है। हादसों को रोकने के लिए चेकिंग अभियान तेज किया गया है। तेज रफ्तार, ड्रिंक एंड ड्राइव से लेकर अन्य चालान भी तेज किए गए हैं। नियम तोड़ने वाले मैजिक आदि वाहनों पर भी नियमित कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। इसके अलावा पांच संवेदनशील थाना क्षेत्रों में गठित टीमें हादसों का कारण और रोकथाम के लिए जिम्मेदारी निभा रही हैं। - आकृति पटेल, सीओ ट्रैफिक
अप्रैल में चिह्नित हुए नए ब्लैक स्पॉट, कार्ययोजना पर जल्द होगा अमल
अप्रैल माह में नए ब्लैक स्पॉट चिह्नित किए गए हैं। संकेतक समेत अन्य कार्यों के लिए कार्ययोजना बनाई गई है, जिसपर जल्द ही अमल शुरू किया जाएगा। हादसों को रोकने के लिए नियमों की अनदेखी करने वाले वाहनों पर कार्रवाई नियमित जारी है। इसको और भी प्रभावी किया जाएगा। - वीरेंद्र सिंह, एआरटीओ

असम चौराहे पर फ्लाईओवर के नीचे सवारियाें के इंतजार में खड़ी मैजिक और टेंपो। संवाद

असम चौराहे पर फ्लाईओवर के नीचे सवारियाें के इंतजार में खड़ी मैजिक और टेंपो। संवाद