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Pilibhit News: ईद को लेकर दिन-रात काम कर रहे दर्जी, नई बुकिंग रोकी
संवाद न्यूज एजेंसी, पीलीभीत
Updated Tue, 17 Mar 2026 12:18 AM IST
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पीलीभीत। ईद-उल-फितर के नजदीक आते ही शहर के ट्रेलर मास्टरों की व्यस्तता बढ़ गई है। ईद पर पारंपरिक परिधान कुर्ता-पजामा की मांग अचानक बढ़ने से दर्जी की दुकानों पर ग्राहकों की भीड़ लगी हुई है। कई कारीगर देर रात तक काम कर रहे हैं ताकि समय पर सभी ऑर्डर पूरे किए जा सकें। स्थिति यह है कि अब ट्रेलर मास्टरों ने नई बुकिंग भी रोक दी है।
ईद के मौके पर पारंपरिक पहनावे की मांग सबसे अधिक रहती है। यही वजह है कि शहर के बाजारों में कपड़ों की खरीदारी के साथ-साथ सिलाई का काम भी तेज हो गया है। कई टेलर मास्टरों का कहना है कि पिछले एक सप्ताह में ही ऑर्डर तेजी से बढ़े हैं। ग्राहकों को समय पर कपड़े देने के लिए कारीगर सुबह से देर रात तक सिलाई मशीनों पर जुटे हुए हैं।
शहर के प्रमुख बाजारों में स्थित टेलरिंग दुकानों पर कुर्ता-पजामा के अलावा पठानी सूट व बच्चों के पारंपरिक कपड़ों की भी अच्छी मांग है। कारीगरों के मुताबिक इस बार हल्के व कढ़ाईदार कुर्तों की मांग ज्यादा देखने को मिल रही है। कई दुकानों पर नए ऑर्डर लेने की अंतिम तिथि भी तय कर दी गई है, क्योंकि त्योहार से पहले सभी ऑर्डर पूरे करना चुनौती बन गया है।
दर्जियों का कहना है कि त्योहारों के समय ही उन्हें सबसे ज्यादा काम मिलता है। ईद के कारण सिलाई का काम बढ़ने से कारीगरों के चेहरे पर खुशी दिखाई दे रही है। पांच सौ रुपये लेकर एक हजार रुपये तक कुर्ता पजामा की सिलाई तय की गई है।
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ईद के मौके पर पारंपरिक पहनावे की मांग सबसे अधिक रहती है। यही वजह है कि शहर के बाजारों में कपड़ों की खरीदारी के साथ-साथ सिलाई का काम भी तेज हो गया है। कई टेलर मास्टरों का कहना है कि पिछले एक सप्ताह में ही ऑर्डर तेजी से बढ़े हैं। ग्राहकों को समय पर कपड़े देने के लिए कारीगर सुबह से देर रात तक सिलाई मशीनों पर जुटे हुए हैं।
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शहर के प्रमुख बाजारों में स्थित टेलरिंग दुकानों पर कुर्ता-पजामा के अलावा पठानी सूट व बच्चों के पारंपरिक कपड़ों की भी अच्छी मांग है। कारीगरों के मुताबिक इस बार हल्के व कढ़ाईदार कुर्तों की मांग ज्यादा देखने को मिल रही है। कई दुकानों पर नए ऑर्डर लेने की अंतिम तिथि भी तय कर दी गई है, क्योंकि त्योहार से पहले सभी ऑर्डर पूरे करना चुनौती बन गया है।
दर्जियों का कहना है कि त्योहारों के समय ही उन्हें सबसे ज्यादा काम मिलता है। ईद के कारण सिलाई का काम बढ़ने से कारीगरों के चेहरे पर खुशी दिखाई दे रही है। पांच सौ रुपये लेकर एक हजार रुपये तक कुर्ता पजामा की सिलाई तय की गई है।