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Pratapgarh News: मंच पर अफसरशाही... फर्श पर फरियाद
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अफीम कोठी में आयोजित मोबाइल कोर्ट में जमीन पर घिसटते हुए जाते दिव्यांग। संवाद
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कटरा रोड स्थित अफीम कोठी सभागार में शुक्रवार को दिव्यांगों के लिए मोबाइल कोर्ट बैठी। इसमें सैकड़ों दिव्यांग फरियाद लेकर पहुंचे लेकिन उन्हें सभागार तक जाने के लिए व्हीलचेयर तक मुहैया नहीं कराई गई।
दिव्यांग हथेलियों में चप्पल पहन कर जमीन पर रेंगते हुए सभागार के चारों ओर रजिस्ट्रेशन के लिए भटकते रहे। सभागार में कई दिव्यांग फरियादियों को फर्श पर बैठकर अपनी समस्याएं अफसरों को बतानी पड़ी। उनके लिए समुचित बैठने की व्यवस्था तक नहीं रही। इस दौरान कुछ लोगों ने कहा कि टेबल पर अफसर शान से बैठे रहे लेकिन दिव्यांगों को कुर्सी तक नहीं मिली।
वहीं, फरियादियों को बेहाल देखकर अधिकारियों ने व्हीलचेयर लाने के निर्देश दिए लेकिन तब तक अधिकांश दिव्यांग सभागार से जा चुके थे। मोबाइल कोर्ट के दौरान आवास, पेंशन, ट्राईसिकल समेत अन्य फरियादों को कोर्ट के समक्ष रखा गया।
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वहीं, बिजली गुल होने से पंखे बंद रहे। गर्मी से अधिकारी व फरियादी परेशान रहे। मोबाइल कोर्ट शुरू होने के एक घंटे बाद कई अफसर पहुंचे। राज्य आयुक्त दिव्यांगजन प्रो. हिमांशु शेखर झा ने फरियादियों की समस्याओं को सुना और समाधान के निर्देश दिए।
मोबाइल कोर्ट में 136 शिकायतों में से 71 शिकायतों का त्वरित समाधान किया गया। अन्य शिकायताें का एक माह के भीतर समाधान करने के निर्देश दिए गए।
इनसेट:-
हफ्ते में दो दिन करें बैठक
राज्य आयुक्त दिव्यांगजन ने सीएमओ डॉ. एएन प्रसाद को निर्देश दिया कि सप्ताह में दो दिन दिव्यांग बोर्ड की बैठक करें। 18 वर्ष से कम उम्र के दिव्यांगों का अस्थायी दिव्यांग प्रमाणपत्र निर्गत न करें।
इनसेट:
समाधान का दावा, मिली अव्यवस्था
कुंडा के संदीप सरोज और सुमित कुमार दोनों पैरों से दिव्यांग हैं। वह दोपहर 12 बजे मोबाइल कोर्ट पहुंचे। हाथ में चप्पल पहने और पैर घसीटते हुए दोनों दिव्यांगों को करीब 200 मीटर का चक्कर काटकर रजिस्ट्रेशन कराना पड़ा। सुमित कुमार ने बताया कि व्हीलचेयर नहीं मिली तो मजबूरन हाथ में चप्पल पहनकर जमीन पर रेंगते हुए सभागार तक जाना पड़ा। वहीं, संदीप सरोज ने बताया कि पीने के पानी, व्हीलचेयर तक की व्यवस्था नहीं मिली।
इनसेट:
दिव्यांगों की पीड़ा
दिव्यांगजन मोबाइल कोर्ट में व्हीलचेयर तक नहीं मिली। घिसटते हुए किसी तरह सभागार के भीतर पहुंचा। दिव्यांगजनों के लिए दुकान ऋण और विवाह के लिए मिलने वाली अनुदान राशि को बढ़ाने को लेकर शिकायत की है। समाधान का आश्वासन मिला है। - राकेश मिश्रा, तिवारीपुर, कुंडा।
.....
मैं और मेरी पत्नी पैर और हाथ से दिव्यांग हैं। ट्राईसिकल, आवास और शौचालय योजना का लाभ नहीं मिला है। पांच साल पहले आवेदन किया था। मोबाइल कोर्ट ने जल्द लाभ दिलाने का आश्वासन मिला है। - मुश्ताक, छेमर सरैयां।
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दिव्यांग पेंशन नहीं मिल रही है। आवास और राशन कार्ड का भी लाभ नहीं मिला। कई बार शिकायत की लेकिन सुनवाई नहीं हुई। - सुधाकर, कसेरुआ।
....
मैंने ट्राईसिकल की मांग की तो राज्य आयुक्त दिव्यांगजन नाराज हो गए। उल्टा मेरे खिलाफ पुलिस को कार्रवाई के लिए कहा। व्हीलचेयर तक नहीं मिली। करीब 15 मिनट बैसाखियों के सहारे खड़ा रहना पड़ा। - संजय कुमार, कुंडा
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वर्जन
मोबाइल कोर्ट के दौरान एक व्हील चेयर की व्यवस्था कराई गई थी। आगे के कार्यक्रमों ने ध्यान रखा जाएगा कि व्यवस्थाएं और बेहतर हों ताकि दिव्यांगजनों को किसी प्रकार की परेशानी न हो। - कमलेश कुमार वर्मा, जिला दिव्यांगजन अधिकारी
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दिव्यांग हथेलियों में चप्पल पहन कर जमीन पर रेंगते हुए सभागार के चारों ओर रजिस्ट्रेशन के लिए भटकते रहे। सभागार में कई दिव्यांग फरियादियों को फर्श पर बैठकर अपनी समस्याएं अफसरों को बतानी पड़ी। उनके लिए समुचित बैठने की व्यवस्था तक नहीं रही। इस दौरान कुछ लोगों ने कहा कि टेबल पर अफसर शान से बैठे रहे लेकिन दिव्यांगों को कुर्सी तक नहीं मिली।
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वहीं, फरियादियों को बेहाल देखकर अधिकारियों ने व्हीलचेयर लाने के निर्देश दिए लेकिन तब तक अधिकांश दिव्यांग सभागार से जा चुके थे। मोबाइल कोर्ट के दौरान आवास, पेंशन, ट्राईसिकल समेत अन्य फरियादों को कोर्ट के समक्ष रखा गया।
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वहीं, बिजली गुल होने से पंखे बंद रहे। गर्मी से अधिकारी व फरियादी परेशान रहे। मोबाइल कोर्ट शुरू होने के एक घंटे बाद कई अफसर पहुंचे। राज्य आयुक्त दिव्यांगजन प्रो. हिमांशु शेखर झा ने फरियादियों की समस्याओं को सुना और समाधान के निर्देश दिए।
मोबाइल कोर्ट में 136 शिकायतों में से 71 शिकायतों का त्वरित समाधान किया गया। अन्य शिकायताें का एक माह के भीतर समाधान करने के निर्देश दिए गए।
इनसेट:-
हफ्ते में दो दिन करें बैठक
राज्य आयुक्त दिव्यांगजन ने सीएमओ डॉ. एएन प्रसाद को निर्देश दिया कि सप्ताह में दो दिन दिव्यांग बोर्ड की बैठक करें। 18 वर्ष से कम उम्र के दिव्यांगों का अस्थायी दिव्यांग प्रमाणपत्र निर्गत न करें।
इनसेट:
समाधान का दावा, मिली अव्यवस्था
कुंडा के संदीप सरोज और सुमित कुमार दोनों पैरों से दिव्यांग हैं। वह दोपहर 12 बजे मोबाइल कोर्ट पहुंचे। हाथ में चप्पल पहने और पैर घसीटते हुए दोनों दिव्यांगों को करीब 200 मीटर का चक्कर काटकर रजिस्ट्रेशन कराना पड़ा। सुमित कुमार ने बताया कि व्हीलचेयर नहीं मिली तो मजबूरन हाथ में चप्पल पहनकर जमीन पर रेंगते हुए सभागार तक जाना पड़ा। वहीं, संदीप सरोज ने बताया कि पीने के पानी, व्हीलचेयर तक की व्यवस्था नहीं मिली।
इनसेट:
दिव्यांगों की पीड़ा
दिव्यांगजन मोबाइल कोर्ट में व्हीलचेयर तक नहीं मिली। घिसटते हुए किसी तरह सभागार के भीतर पहुंचा। दिव्यांगजनों के लिए दुकान ऋण और विवाह के लिए मिलने वाली अनुदान राशि को बढ़ाने को लेकर शिकायत की है। समाधान का आश्वासन मिला है। - राकेश मिश्रा, तिवारीपुर, कुंडा।
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मैं और मेरी पत्नी पैर और हाथ से दिव्यांग हैं। ट्राईसिकल, आवास और शौचालय योजना का लाभ नहीं मिला है। पांच साल पहले आवेदन किया था। मोबाइल कोर्ट ने जल्द लाभ दिलाने का आश्वासन मिला है। - मुश्ताक, छेमर सरैयां।
दिव्यांग पेंशन नहीं मिल रही है। आवास और राशन कार्ड का भी लाभ नहीं मिला। कई बार शिकायत की लेकिन सुनवाई नहीं हुई। - सुधाकर, कसेरुआ।
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मैंने ट्राईसिकल की मांग की तो राज्य आयुक्त दिव्यांगजन नाराज हो गए। उल्टा मेरे खिलाफ पुलिस को कार्रवाई के लिए कहा। व्हीलचेयर तक नहीं मिली। करीब 15 मिनट बैसाखियों के सहारे खड़ा रहना पड़ा। - संजय कुमार, कुंडा
वर्जन
मोबाइल कोर्ट के दौरान एक व्हील चेयर की व्यवस्था कराई गई थी। आगे के कार्यक्रमों ने ध्यान रखा जाएगा कि व्यवस्थाएं और बेहतर हों ताकि दिव्यांगजनों को किसी प्रकार की परेशानी न हो। - कमलेश कुमार वर्मा, जिला दिव्यांगजन अधिकारी

अफीम कोठी में आयोजित मोबाइल कोर्ट में जमीन पर घिसटते हुए जाते दिव्यांग। संवाद