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Pratapgarh News: कागजों में हरे-भरे अमृत सरोवर, जमीन पर सूखे
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आजादी के अमृत महोत्सव के तहत गांवों में जल संरक्षण और सौंदर्यीकरण के उद्देश्य से बनाए गए ‘अमृत सरोवर’ जिले में बदहाली की तस्वीर पेश कर रहे हैं। वित्तीय वर्ष 2024-25 में करीब 12 करोड़ रुपये खर्च कर बनाए गए 150 से अधिक सरोवर कई जगह सूखे पड़े हैं, जबकि कुछ अतिक्रमण और लापरवाही का शिकार हो चुके हैं।
जिले के आठों विकास खंड मंझनपुर, सरसवां, चायल, नेवादा, कड़ा, मूरतगंज, सिराथू और कौशाम्बी में इन सरोवरों के निर्माण व सौंदर्यीकरण पर भारी बजट खर्च किया गया। रिकॉर्ड में इन्हें विकास का मॉडल बताया गया, लेकिन जमीनी हकीकत इससे उलट है। मंझनपुर ब्लॉक में करीब 30 सरोवर दर्ज हैं, जिन पर डेढ़ से दो करोड़ रुपये तक खर्च दिखाया गया, बावजूद इसके कई सरोवरों में पानी नहीं है और पाथवे क्षतिग्रस्त हैं।
सरसवां ब्लॉक के 25 सरोवरों में झाड़ियां और अतिक्रमण नजर आ रहा है। चायल में कुछ सरोवर उपयोग में हैं, लेकिन अधिकांश सूखे हैं। नेवादा और मूरतगंज में रखरखाव के अभाव में सरोवर बेकार हो गए हैं, जबकि कड़ा ब्लॉक के अधिकांश सरोवर भी सूखे पड़े हैं। नेवादा के बूंदा और मकदूमपुर खास गांव में तो सरोवरों में पानी की जगह धूल उड़ रही है। करीब 180 सरोवरों पर करोड़ों खर्च के बावजूद अपेक्षित लाभ नहीं मिल सका है।
अमृत सरोवरों की समय-समय पर मरम्मत और सफाई कराई जा रही है। जहां भी खामियां हैं, उन्हें जल्द दुरुस्त कराया जाएगा। गर्मी के समय में अभियान चलाकर इन सरोवरों में पानी भराने काम शुरू किया जा रहा है।
विनोद राम त्रिपाठी, मुख्य विकास अधिकारी
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जिले के आठों विकास खंड मंझनपुर, सरसवां, चायल, नेवादा, कड़ा, मूरतगंज, सिराथू और कौशाम्बी में इन सरोवरों के निर्माण व सौंदर्यीकरण पर भारी बजट खर्च किया गया। रिकॉर्ड में इन्हें विकास का मॉडल बताया गया, लेकिन जमीनी हकीकत इससे उलट है। मंझनपुर ब्लॉक में करीब 30 सरोवर दर्ज हैं, जिन पर डेढ़ से दो करोड़ रुपये तक खर्च दिखाया गया, बावजूद इसके कई सरोवरों में पानी नहीं है और पाथवे क्षतिग्रस्त हैं।
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सरसवां ब्लॉक के 25 सरोवरों में झाड़ियां और अतिक्रमण नजर आ रहा है। चायल में कुछ सरोवर उपयोग में हैं, लेकिन अधिकांश सूखे हैं। नेवादा और मूरतगंज में रखरखाव के अभाव में सरोवर बेकार हो गए हैं, जबकि कड़ा ब्लॉक के अधिकांश सरोवर भी सूखे पड़े हैं। नेवादा के बूंदा और मकदूमपुर खास गांव में तो सरोवरों में पानी की जगह धूल उड़ रही है। करीब 180 सरोवरों पर करोड़ों खर्च के बावजूद अपेक्षित लाभ नहीं मिल सका है।
अमृत सरोवरों की समय-समय पर मरम्मत और सफाई कराई जा रही है। जहां भी खामियां हैं, उन्हें जल्द दुरुस्त कराया जाएगा। गर्मी के समय में अभियान चलाकर इन सरोवरों में पानी भराने काम शुरू किया जा रहा है।
विनोद राम त्रिपाठी, मुख्य विकास अधिकारी

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