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Pratapgarh News: अब आंवले की चाय से खुद को करिए तरोताजा
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आंवले से बना माउथ फ्रेशनर।
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अब आंवले की चाय पत्ती से खुद को तरोताजा करिए। दिन की शुरुआत हर्बल चाय के साथ कीजिए। वहीं, मुंह को महकाने के लिए आंवला प्रोसेसिंग प्लांट चवड़ गोड़े में माउथ फ्रेशनर भी तैयार किया गया है। इन दोनों उत्पादों की मांग पूर्वांचल के जिलों में अधिक है।
सेंटर ऑफ टेक्नोलॉजी एंड एंटरप्रेन्योरशिप डेवलपमेंट संस्थान ने शहर के चवड़ गोड़े में आंवला प्रोसेसिंग प्लांट की स्थापना की है। यहां आंवले का मुरब्बा, जूस, लड्डू, बर्फी, जैम, कैंडी सहित अन्य उत्पाद तैयार किए जाते थे।
करीब तीन माह पहले आंवला की चाय पत्ती बनानी शुरू की गई और पिछले साल से प्लांट में माउथ फ्रेशनर तैयार किया जाने लगा। पिछले एक माह से बलिया, गोरखपुर, वाराणसी, आजमगढ़, बस्ती, मिर्जापुर के व्यापारी थोक में दोनों उत्पाद खरीद रहे हैं। मांग के सापेक्ष व्यापारियों को आपूर्ति नहीं हो पा रही है।
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संस्था के निदेशक संजय सिंह ने बताया कि हर्बल चाय की मांग अधिक है। अभी पैकेजिंग की व्यवस्था नहीं की जा सकी है। इसलिए आपूर्ति कम की जा रही है। माउथ फ्रेशनर पर्याप्त मात्रा में तैयार किया जा रहा है। पिछले साल 15 मीट्रिक टन की बिक्री की गई थी।
आंवले की चाय में नहीं लगेगा दूध
संजय सिंह ने बताया कि चाय पत्ती में आंवला के छोटे-छोटे बारीक टुकड़ों के साथ तुलसी, अदरक, दालचीनी व काली मिर्च का मिश्रण किया गया है। आंवले की चाय में दूध के प्रयोग पर रोक है। गर्म पानी के साथ आंवले की चाय पत्ती से चाय बनाई जाती है। 60 रुपये प्रति पैकेट आंवले की चाय पत्ती की बिक्री होती है। वहीं, माउथ फ्रेशनर में आंवलों के टुकड़ों के साथ चीनी, काला नमक, हींग, हरड़-बहेड़ा व पिपरमेंट को मिलाया जाता है। इसकी कीमत 30 रुपये प्रति पैकेट है।
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सेंटर ऑफ टेक्नोलॉजी एंड एंटरप्रेन्योरशिप डेवलपमेंट संस्थान ने शहर के चवड़ गोड़े में आंवला प्रोसेसिंग प्लांट की स्थापना की है। यहां आंवले का मुरब्बा, जूस, लड्डू, बर्फी, जैम, कैंडी सहित अन्य उत्पाद तैयार किए जाते थे।
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करीब तीन माह पहले आंवला की चाय पत्ती बनानी शुरू की गई और पिछले साल से प्लांट में माउथ फ्रेशनर तैयार किया जाने लगा। पिछले एक माह से बलिया, गोरखपुर, वाराणसी, आजमगढ़, बस्ती, मिर्जापुर के व्यापारी थोक में दोनों उत्पाद खरीद रहे हैं। मांग के सापेक्ष व्यापारियों को आपूर्ति नहीं हो पा रही है।
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संस्था के निदेशक संजय सिंह ने बताया कि हर्बल चाय की मांग अधिक है। अभी पैकेजिंग की व्यवस्था नहीं की जा सकी है। इसलिए आपूर्ति कम की जा रही है। माउथ फ्रेशनर पर्याप्त मात्रा में तैयार किया जा रहा है। पिछले साल 15 मीट्रिक टन की बिक्री की गई थी।
आंवले की चाय में नहीं लगेगा दूध
संजय सिंह ने बताया कि चाय पत्ती में आंवला के छोटे-छोटे बारीक टुकड़ों के साथ तुलसी, अदरक, दालचीनी व काली मिर्च का मिश्रण किया गया है। आंवले की चाय में दूध के प्रयोग पर रोक है। गर्म पानी के साथ आंवले की चाय पत्ती से चाय बनाई जाती है। 60 रुपये प्रति पैकेट आंवले की चाय पत्ती की बिक्री होती है। वहीं, माउथ फ्रेशनर में आंवलों के टुकड़ों के साथ चीनी, काला नमक, हींग, हरड़-बहेड़ा व पिपरमेंट को मिलाया जाता है। इसकी कीमत 30 रुपये प्रति पैकेट है।