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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Pratapgarh News ›   Prayagraj: Crowds throng on the second Monday of Sawan; a rare coincidence of 'Som Pradosh' for the worship of

Prayagraj : सावन के दूसरे सोमवार पर उमड़ी भीड़, शिव की पूजा के लिए सोम प्रदोष का दुर्लभ संयोग

Mon, 10 Aug 2026 02:22 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Mon, 10 Aug 2026 02:22 PM IST
सार

सावन के दूसरे सोमवार पर संगमनगरी हर-हर महादेव के जयघोष से गूंज रही है। सोमवार के साथ कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी पड़ने से आज सोम प्रदोष का विशेष संयोग बन रहा है। इस पावन अवसर पर शहर के प्रमुख शिवालयों में ब्रह्म मुहूर्त से ही श्रद्धालुओं की कतार लग रही है। भक्त गंगाजल, दूध, बेलपत्र, धतूरा और पुष्प अर्पित कर भगवान शिव का जलाभिषेक और रुद्राभिषेक कर रहे हैं। शाम को प्रदोष काल में विशेष पूजन और आरती के लिए मंदिरों में आस्था का सैलाब उमड़ रहा है।

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Prayagraj: Crowds throng on the second Monday of Sawan; a rare coincidence of 'Som Pradosh' for the worship of
सावन के दूसरे सोमवार पर संगमनगरी के शिव मंदिरों में उमड़ी भीड़। - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक।

विस्तार

सावन के दूसरे सोमवार पर सोमवार और त्रयोदशी तिथि का विशेष संयोग बन रहा है। सोमवार को पड़ने वाले प्रदोष व्रत को सोम प्रदोष कहा जाता है। इस वर्ष 10 अगस्त को सावन सोमवार के साथ सोम प्रदोष पड़ने से शिवभक्तों में विशेष उत्साह है। पंचांग के अनुसार त्रयोदशी तिथि सोमवार सुबह से शुरू होकर मंगलवार तड़के तक रहती है और प्रदोष काल शाम के समय पड़ता है। पंचांग के अनुसार सोम प्रदोष का प्रदोष काल शाम करीब 6:59 से रात 9:09 बजे तक है।

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ब्रह्म मुहूर्त से शुरू हुआ जलाभिषेक

सावन सोमवार को लेकर शहर के प्रमुख शिवालयों में सुबह से ही श्रद्धालुओं का पहुंचना शुरू हो गया। भक्त गंगाजल, दूध, बेलपत्र, धतूरा, आक, पुष्प और अक्षत आदि अर्पित कर भगवान शिव का पूजन कर रहे हैं। कई मंदिरों में जलाभिषेक, दुग्धाभिषेक और रुद्राभिषेक के साथ विशेष धार्मिक अनुष्ठान भी हो रहे हैं। शिवालयों में हर-हर महादेव और बोल बम के जयकारे गूंज रहे हैं। श्रद्धालु भगवान शिव से सुख, शांति, समृद्धि और परिवार की मंगलकामना कर रहे हैं। सावन में सोमवार का दिन भगवान शिव की आराधना के लिए विशेष माना जाता है, इसलिए सुबह से लेकर देर शाम तक मंदिरों में भक्तों की भीड़ बनी रहने की संभावना है।

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मनकामेश्वर मंदिर में विशेष पूजन

श्री मनकामेश्वर महादेव मंदिर में सावन सोमवार और सोम प्रदोष के संयोग को देखते हुए विशेष धार्मिक आयोजन हो रहे हैं। महंत श्रीधरानंद सरस्वती की देखरेख में भगवान शिव का रुद्राभिषेक, पूजन-अर्चन और विशेष श्रृंगार किया जा रहा है। रात में भगवान शिव का विशेष श्रृंगार और आरती भी होती है। सुबह से ही श्रद्धालु मंदिर पहुंचकर शिवलिंग पर गंगाजल और दूध अर्पित कर रहे हैं। भक्त बेलपत्र, धतूरा और पुष्प चढ़ाकर भगवान भोलेनाथ का आशीर्वाद ले रहे हैं।



 

नागवासुकी और तक्षक तीर्थ में भी उमड़ रही आस्था

दारागंज स्थित नागवासुकी मंदिर और तक्षक तीर्थ बड़ा शिवाला में भी विशेष पूजन-अभिषेक हो रहा है। संगम क्षेत्र से जुड़े इन धार्मिक स्थलों पर सावन में श्रद्धालुओं की विशेष आस्था रहती है। भक्त भगवान शिव और नाग देवता का पूजन कर परिवार की सुख-शांति की कामना कर रहे हैं। मीरपुर स्थित ललितेश्वर महादेव मंदिर में मुख्य पुजारी शिवमूरत मिश्रा के द्वारा भगवान शिव का विशेष श्रृंगार किया जा रहा है। मंदिर में दिनभर दर्शन-पूजन के लिए भक्तों का आना-जाना जारी है।

कोटेश्वर और पंडिला महादेव में भी भक्तों की कतार

कोटेश्वर महादेव और पंडिला महादेव मंदिर में भी सावन सोमवार पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। भक्त कतार में लगकर भगवान शिव का दर्शन कर रहे हैं और जलाभिषेक कर रहे हैं। सिविल लाइंस स्थित हनुमान निकेतन के शिव मंदिर में भी सुबह से भक्तों की कतार लग रही है। शाम को प्रदोष काल में शिव पूजन और आरती का विशेष महत्व होने के कारण मंदिरों में श्रद्धालुओं की संख्या और बढ़ रही है।

क्या है सोम प्रदोष का धार्मिक महात्म्य?

हिंदू धार्मिक परंपरा में प्रदोष व्रत भगवान शिव को समर्पित माना जाता है। प्रत्येक पक्ष की त्रयोदशी तिथि पर प्रदोष व्रत रखा जाता है। जब त्रयोदशी सोमवार को पड़ती है तो इसे सोम प्रदोष कहा जाता है। सोमवार स्वयं भगवान शिव को समर्पित माना जाता है, इसलिए सोमवार और प्रदोष के संयोग को शिव आराधना के लिए विशेष माना जाता है।

धार्मिक मान्यता के अनुसार प्रदोष काल में भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा-अर्चना करने से भक्त को आध्यात्मिक शांति और भगवान शिव की कृपा प्राप्त होती है। इस दौरान शिवलिंग पर जल, गंगाजल और बेलपत्र अर्पित कर 'ॐ नम: शिवाय' का जाप करने की परंपरा है।

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सावन में शिव पूजा का बढ़ जाता है महत्व

सावन का पूरा महीना भगवान शिव की आराधना के लिए विशेष माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार समुद्र मंथन के दौरान निकले विष को भगवान शिव ने अपने कंठ में धारण किया था। इसी कारण सावन में जलाभिषेक और शिव आराधना की परंपरा विशेष रूप से प्रचलित है। भक्त भगवान शिव को जल अर्पित कर उनकी कृपा की कामना करते हैं।

सोमवार को शिवलिंग पर जलाभिषेक, बेलपत्र और पुष्प अर्पित करना शिवभक्तों की प्रमुख पूजा परंपराओं में शामिल है। सावन सोमवार और सोम प्रदोष का एक साथ आना श्रद्धालुओं के लिए इस दिन को और विशेष बना रहा है।

प्रदोष काल में विशेष पूजा

आज शाम प्रदोष काल में शिवालयों में विशेष पूजा-अर्चना और आरती होती है। धार्मिक मान्यता के अनुसार प्रदोष काल भगवान शिव की आराधना के लिए महत्वपूर्ण समय माना जाता है। श्रद्धालु इस दौरान शिव-पार्वती का पूजन, दीपदान और मंत्र जाप करते हैं।

मंदिरों में शाम की आरती के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के जुटने की उम्मीद है। संगमनगरी के शिवालयों में सुबह से शुरू हुई भक्ति की धारा देर रात तक जारी रहती है और पूरा शहर हर-हर महादेव के जयघोष से भक्तिमय नजर आता है।

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