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Pratapgarh News: पेंशन की डगर... 40 किमी का सफर, सालभर में 20 चक्कर
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40 किमी का मुश्किल सफर...लड़खड़ाते कदम, लाठी के सहारे सालभर में जिला दिव्यांगजन सशक्तीकरण विभाग के 20 बार चक्कर, फिर भी वृद्धा पेंशन न मिली। यह कहानी है बाघराय के तिवारी महमदपुर के 70 साल के बुजुर्ग की। वह हर बार उम्मीद लेकर विकास भवन आते हैं और निराश होकर लौट जाते हैं।
दिव्यांग बुजुर्ग सोमवार को पड़ोसी की मदद से विकास भवन पहुंचे। इस बार पेंशन प्रक्रिया पूरी होने की उम्मीद थी लेकिन सीडीओ से लेकर दिव्यांगजन विभाग तक के चक्कर लगाने के बाद भी उन्हें निराशा ही हाथ लगी। इस बार भी अफसर के थके-हारे आश्वासन मिले।
बुजुर्ग कुष्ठ रोगी भी हैं। उनके हाथ और पैर की अंगुलियां खराब हो चुकी हैं। सिर्फ एक आंख से महज 25 फीसदी ही दिखाई देता है। उन्होंने बताया कि दोनों पैरों में गठिया है। आंख खराब, हाथ और पैर की अंगुली गलने की वजह से बैंक में बायोमीट्रिक सत्यापन नहीं हो सका। उनके पास सीएमओ कार्यालय का दिव्यांग प्रमाणपत्र भी है लेकिन वृद्धा पेंशन प्रक्रिया कोसों दूर है।
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उन्होंने कहा कि डीएम, सीडीओ और जिला दिव्यांगजन अधिकारी के दफ्तर तक गए लेकिन पीड़ा सुनने वाला कोई नहीं है। साथ आए पड़ोसी ने बताया कि दिव्यांग होने के कारण उन्हें हर बार किसी का सहारा लेकर आना पड़ता है।
विकास भवन तक अकेले आने-जाने में 160 रुपये किराया खर्च होता है। दो लोगों के आने पर यह खर्च 320 रुपये पहुंच जाता है। यहां के अफसर हर बार नए कागजात या किसी न किसी औपचारिकता का हवाला देकर लौटा देते हैं।
वर्जन-
बुजुर्ग की शिकायत आई है। उन्हें बैंक जाकर नियम की औपचारिकताएं पूरी करने के लिए कहा गया है। बैंक के अफसरों से भी इस संबंध में बात हुई है। - कमलेश कुमार वर्मा, जिला दिव्यांगजन अधिकारी
..........
कुछ औपचारिकताएं हैं, इसके बाद जल्द ही बुजुर्ग दिव्यांग के खाते में पेंशन जानी शुरू हो जाएगी। इस संबंध में बैंक के अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं। - डॉ. राम मोहन मीणा, सीडीओ
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दिव्यांग बुजुर्ग सोमवार को पड़ोसी की मदद से विकास भवन पहुंचे। इस बार पेंशन प्रक्रिया पूरी होने की उम्मीद थी लेकिन सीडीओ से लेकर दिव्यांगजन विभाग तक के चक्कर लगाने के बाद भी उन्हें निराशा ही हाथ लगी। इस बार भी अफसर के थके-हारे आश्वासन मिले।
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बुजुर्ग कुष्ठ रोगी भी हैं। उनके हाथ और पैर की अंगुलियां खराब हो चुकी हैं। सिर्फ एक आंख से महज 25 फीसदी ही दिखाई देता है। उन्होंने बताया कि दोनों पैरों में गठिया है। आंख खराब, हाथ और पैर की अंगुली गलने की वजह से बैंक में बायोमीट्रिक सत्यापन नहीं हो सका। उनके पास सीएमओ कार्यालय का दिव्यांग प्रमाणपत्र भी है लेकिन वृद्धा पेंशन प्रक्रिया कोसों दूर है।
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उन्होंने कहा कि डीएम, सीडीओ और जिला दिव्यांगजन अधिकारी के दफ्तर तक गए लेकिन पीड़ा सुनने वाला कोई नहीं है। साथ आए पड़ोसी ने बताया कि दिव्यांग होने के कारण उन्हें हर बार किसी का सहारा लेकर आना पड़ता है।
विकास भवन तक अकेले आने-जाने में 160 रुपये किराया खर्च होता है। दो लोगों के आने पर यह खर्च 320 रुपये पहुंच जाता है। यहां के अफसर हर बार नए कागजात या किसी न किसी औपचारिकता का हवाला देकर लौटा देते हैं।
वर्जन-
बुजुर्ग की शिकायत आई है। उन्हें बैंक जाकर नियम की औपचारिकताएं पूरी करने के लिए कहा गया है। बैंक के अफसरों से भी इस संबंध में बात हुई है। - कमलेश कुमार वर्मा, जिला दिव्यांगजन अधिकारी
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कुछ औपचारिकताएं हैं, इसके बाद जल्द ही बुजुर्ग दिव्यांग के खाते में पेंशन जानी शुरू हो जाएगी। इस संबंध में बैंक के अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं। - डॉ. राम मोहन मीणा, सीडीओ