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Pratapgarh News: क्रांतिकारी किसानों की शहादत से रोशन है कहला गांव
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स्वतंत्रता आंदोलन में प्रतापगढ़ के किसान क्रांतिकारियों का अहम योगदान है। गौरा ब्लॉक के कहला गांव के लाला का बाग में होने वाली सभा से अंग्रेजी हुकूमत इतना घबरा गई थी कि गोलियां चलवाईं। इसके चार किसान शहीद हुए और सैकड़ों जख्मी हो गए थे।
बाग में किसानों की सभा की भनक लगते ही ब्रिटिश प्रशासन में हड़कंप मचा गया था। देश भक्ति के रंग में डूबे किसान वंदे मातरम... भारत माता की जय... इंकलाब जिंदाबाद के नारों से बाग गूंज रहा था, तभी ब्रिटिश पुलिस फोर्स मौके पर पहुंच गई। किसानों को समझाने लगी, आंदोलित किसानों ने उनकी नहीं सुनीं तो गोलियां बरसा दीं, चार किसान शहीद हो गए थे।
बेल्हा के किसान 16 फरवरी 1931 को कहला गांव में शांतिपूर्ण सभा कर रहे थे। देशभक्ति गीत वातावरण में गूंज रहे थे। वंदे मातरम व भारत माता की जयकारे लगे रहे थे। इस बीच किसानों की एकजुटता की खबर ब्रिटिश प्रशासन को लग गई। ब्रिटिश अफसर फोर्स के साथ कहला के लाला का बाग पहुंच गए। हजारों किसानों की भीड़ देखकर अंग्रेजी हुकूमत और पुलिस घबरा गई। निहत्थे किसानों पर गोलियां बरसा दीं।
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इस गोलीकांड और भगदड़ में कई किसान घायल हो गए। कौलापुर के मथुरा प्रसाद यादव, कहला के कालिका प्रसाद विश्वकर्मा और नाथ का पूरा गांव के रामदास उपाध्याय मौके पर ही शहीद हो गए। इस घटना के बाद अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ क्रांति की ज्वाला और तेज भड़क उठी थी।
शहीद स्थल कहला हम सबके निकट है। इस धरती को हम सभी नमन करते हैं। यहां से एकजुटता की सीख भी मिलती है। बुजुर्गों से यहां से जुड़ीं ढेर सारी कहानियां सुनने को मिली हैं।
परमानंद यादव, गौरा
अंग्रेजों की बर्बरता की कहानी पिताजी से सुनी थी। बताते थे कि इस घटना के बाद जवाहर लाल नेहरू भी आए थे। इसके बाद आंदोलन का प्रवाह तेज हुआ था।
राजेंद्र प्रताप सिंह गौरा
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बाग में किसानों की सभा की भनक लगते ही ब्रिटिश प्रशासन में हड़कंप मचा गया था। देश भक्ति के रंग में डूबे किसान वंदे मातरम... भारत माता की जय... इंकलाब जिंदाबाद के नारों से बाग गूंज रहा था, तभी ब्रिटिश पुलिस फोर्स मौके पर पहुंच गई। किसानों को समझाने लगी, आंदोलित किसानों ने उनकी नहीं सुनीं तो गोलियां बरसा दीं, चार किसान शहीद हो गए थे।
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बेल्हा के किसान 16 फरवरी 1931 को कहला गांव में शांतिपूर्ण सभा कर रहे थे। देशभक्ति गीत वातावरण में गूंज रहे थे। वंदे मातरम व भारत माता की जयकारे लगे रहे थे। इस बीच किसानों की एकजुटता की खबर ब्रिटिश प्रशासन को लग गई। ब्रिटिश अफसर फोर्स के साथ कहला के लाला का बाग पहुंच गए। हजारों किसानों की भीड़ देखकर अंग्रेजी हुकूमत और पुलिस घबरा गई। निहत्थे किसानों पर गोलियां बरसा दीं।
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इस गोलीकांड और भगदड़ में कई किसान घायल हो गए। कौलापुर के मथुरा प्रसाद यादव, कहला के कालिका प्रसाद विश्वकर्मा और नाथ का पूरा गांव के रामदास उपाध्याय मौके पर ही शहीद हो गए। इस घटना के बाद अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ क्रांति की ज्वाला और तेज भड़क उठी थी।
शहीद स्थल कहला हम सबके निकट है। इस धरती को हम सभी नमन करते हैं। यहां से एकजुटता की सीख भी मिलती है। बुजुर्गों से यहां से जुड़ीं ढेर सारी कहानियां सुनने को मिली हैं।
परमानंद यादव, गौरा
अंग्रेजों की बर्बरता की कहानी पिताजी से सुनी थी। बताते थे कि इस घटना के बाद जवाहर लाल नेहरू भी आए थे। इसके बाद आंदोलन का प्रवाह तेज हुआ था।
राजेंद्र प्रताप सिंह गौरा