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जातिगत भेदभाव त्याग कर एकजुट हो हिंदू समाज : स्वामी दीपांकर महाराज
संवाद न्यूज एजेंसी, सहारनपुर
Updated Thu, 29 Jan 2026 12:34 AM IST
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गंगोह। स्वामी दीपांकर महाराज ने हिंदू समाज से जातिगत भेदभाव त्याग कर एकजुट होने और वर्ष 2026 में जातिवाद को विदा करने का संकल्प लेने का आह्वान किया। बुधवार को स्वामी दीपांकर महाराज गंगोह में आयोजित विराट हिंदू सम्मेलन में बतौर मुख्य वक्ता बोल रहे थे।
स्वामी दीपांकर महाराज ने अपने संबोधन में बांग्लादेश की घटनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि वहां हिंदुओं की हत्याओं के दौरान किसी की जाति नहीं पूछी गई, सभी को केवल उनके धर्म के आधार पर निशाना बनाया गया। उन्होंने चेताया कि यदि हिंदू समाज आपसी भेदभाव में बंटा रहा, तो इसके दुष्परिणाम और गंभीर हो सकते हैं। उन्होंने महिलाओं से भी समाज को एकजुट करने की मुहिम में आगे आने की अपील की। कहा कि हिंदू समाज को एक मंच पर आना ही होगा। मंच पर ग्रंथी देवेंद्र सिंह, वीरेंद्र शास्त्री, बीके संतोष, साध्वी शरण दास, महंत लक्ष्मी चंद, योगानंद, विभाग प्रचारक आशुतोष, जिला कार्यवाह मनीष सहित अनेक संत व पदाधिकारी विराजमान रहे।
संचालन डाॅ. अमित गर्ग और गगन गर्ग ने संयुक्त रूप से किया। समिति के रमेश चंद गर्ग, विकास मित्तल, मास्टर यशपाल सैनी, मनोज गोयल, शशिकांत शर्मा, विजय पाल, राजेश काका, सतकुमार, दीपक सैनी, राकेश मित्तल, देवेंद्र प्रधान आदि रहे।
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सम्मेलन में उठा यूजीसी का मुद्दा
गंगोह। सम्मेलन के दौरान उस समय विशेष स्थिति उत्पन्न हो गई, जब स्वामी दीपांकर महाराज के प्रवचन के बीच एक महिला राजनंदिनी ने खड़े होकर यूजीसी से जुड़े मुद्दे को उठा दिया। महिला ने कहा कि जहां एक ओर जातिवाद समाप्त कर हिंदुओं को एकजुट होने की बात कही जा रही है, वहीं दूसरी ओर यूजीसी के माध्यम से स्वर्ण समाज के बच्चों का भविष्य अंधकार में जाता दिखाई दे रहा है। इस पर स्वामी दीपांकर महाराज मंच से उतरकर महिला के पास पहुंचे और कहा कि यदि किसी भी नीति या व्यवस्था से हिंदू समाज की एकजुटता को खतरा उत्पन्न होता है, तो सरकार निश्चित रूप से इस विषय पर ध्यान देगी। उन्होंने विश्वास जताया कि यूजीसी की खामियों को दूर करने का प्रयास किया जाएगा, ताकि समाज के किसी भी वर्ग के भविष्य के साथ अन्याय न हो।
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स्वामी दीपांकर महाराज ने अपने संबोधन में बांग्लादेश की घटनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि वहां हिंदुओं की हत्याओं के दौरान किसी की जाति नहीं पूछी गई, सभी को केवल उनके धर्म के आधार पर निशाना बनाया गया। उन्होंने चेताया कि यदि हिंदू समाज आपसी भेदभाव में बंटा रहा, तो इसके दुष्परिणाम और गंभीर हो सकते हैं। उन्होंने महिलाओं से भी समाज को एकजुट करने की मुहिम में आगे आने की अपील की। कहा कि हिंदू समाज को एक मंच पर आना ही होगा। मंच पर ग्रंथी देवेंद्र सिंह, वीरेंद्र शास्त्री, बीके संतोष, साध्वी शरण दास, महंत लक्ष्मी चंद, योगानंद, विभाग प्रचारक आशुतोष, जिला कार्यवाह मनीष सहित अनेक संत व पदाधिकारी विराजमान रहे।
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संचालन डाॅ. अमित गर्ग और गगन गर्ग ने संयुक्त रूप से किया। समिति के रमेश चंद गर्ग, विकास मित्तल, मास्टर यशपाल सैनी, मनोज गोयल, शशिकांत शर्मा, विजय पाल, राजेश काका, सतकुमार, दीपक सैनी, राकेश मित्तल, देवेंद्र प्रधान आदि रहे।
सम्मेलन में उठा यूजीसी का मुद्दा
गंगोह। सम्मेलन के दौरान उस समय विशेष स्थिति उत्पन्न हो गई, जब स्वामी दीपांकर महाराज के प्रवचन के बीच एक महिला राजनंदिनी ने खड़े होकर यूजीसी से जुड़े मुद्दे को उठा दिया। महिला ने कहा कि जहां एक ओर जातिवाद समाप्त कर हिंदुओं को एकजुट होने की बात कही जा रही है, वहीं दूसरी ओर यूजीसी के माध्यम से स्वर्ण समाज के बच्चों का भविष्य अंधकार में जाता दिखाई दे रहा है। इस पर स्वामी दीपांकर महाराज मंच से उतरकर महिला के पास पहुंचे और कहा कि यदि किसी भी नीति या व्यवस्था से हिंदू समाज की एकजुटता को खतरा उत्पन्न होता है, तो सरकार निश्चित रूप से इस विषय पर ध्यान देगी। उन्होंने विश्वास जताया कि यूजीसी की खामियों को दूर करने का प्रयास किया जाएगा, ताकि समाज के किसी भी वर्ग के भविष्य के साथ अन्याय न हो।
