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Saharanpur News: 267 करोड़ के एसटीपी को सिंचाई विभाग ने दी हरी झंडी, अब गति पकड़ेगा काम
Sat, 15 Aug 2026 01:13 AM IST
मेरठ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सहारनपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, सहारनपुर
Updated Sat, 15 Aug 2026 01:13 AM IST
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सहारनपुर। 267 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले 135 एमएलडी के एसटीपी को सिंचाई विभाग लखनऊ से हरी झंडी मिल गई है। इसके बाद कार्य के गति पकड़ने का उम्मीद है। एसटीपी के निर्माण को मंजूरी करीब छह वर्ष पहले मिली थी, लेकिन जमीन फाइनल नहीं होने की वजह से कार्य शुरू नहीं हो सका था।
करीब एक वर्ष पहले काम शुरू किया गया, लेकिन टेंडर में नदी के तट (जिस जगह एसटीपी बनना है) का स्तर जो दर्शाया गया था वास्तव में वह उससे तीन मीटर गहरा निकला। कार्यदायी संस्था के आपत्ति जताने के बाद डीपीआर सहित अन्य कागजी कार्रवाई दोबारा शुरू की गई।
एसटीपी 4.5 हेक्टेयर भूमि पर बनाया जा रहा है, जो जल निगम की है। करीब आठ महीने पहले सिंचाई विभाग ने एसटीपी स्थल पर नदी की चौड़ाई कम कर दिए जाने को लेकर आपत्ति जताई थी। उनका कहना था कि इससे बाढ़ का खतरा बढ़ जाएगा।
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सिंचाई विभाग का कहना है कि नदी की चौड़ाई जितनी पीछे है उतनी ही रखी जाए। ऐसे में कार्यदायी संस्था ने नदी के क्षेत्र को छोड़कर बाकी हिस्से पर काम चालू रखा हुआ था। साथ ही सिंचाई विभाग से एनओसी के लिए फाइल शासन को भेजी गई थी, जहां से अब एनओसी मिल गई है। ऐसे में अब कार्य के गति पकड़ने की उम्मीद है। बता दें, कि एसटीपी का कार्य पूर्ण करने के लिए 31 अक्तूबर 2027 की तिथि मिली है।
हिंडन और यमुना भी होंगी साफ
सहारनपुर शहर के बीच से होकर गुजरने वाले पांवधोई नदी और ढमोला नदी हिंडन की सहायक नदियां हैं। हिंडन नदी यमुना नदी में गिरती है। यानी शहर से निकलने वाला दूषित पानी कई नदियों को प्रभावित करता है।
पांवधोई और ढमोला नदी में गिर रहे 98 नालों के पानी को एसटीपी तक लाने के लिए दोनों नदियों में 16 से 20 किलोमीटर लंबी बड़ी पाइपलाइन डाली जाएगी। उसके बाद नदी में केवल प्राकृतिक स्रोत से आने वाला पानी ही बहेगा।
एसटीपी के जरिये शहर के दूषित पानी को साफ कर ढमोला में छोड़ा जाएगा, जिसका असर हिंडन और यमुना नदी तक पर पड़ेगा।
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करीब एक वर्ष पहले काम शुरू किया गया, लेकिन टेंडर में नदी के तट (जिस जगह एसटीपी बनना है) का स्तर जो दर्शाया गया था वास्तव में वह उससे तीन मीटर गहरा निकला। कार्यदायी संस्था के आपत्ति जताने के बाद डीपीआर सहित अन्य कागजी कार्रवाई दोबारा शुरू की गई।
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एसटीपी 4.5 हेक्टेयर भूमि पर बनाया जा रहा है, जो जल निगम की है। करीब आठ महीने पहले सिंचाई विभाग ने एसटीपी स्थल पर नदी की चौड़ाई कम कर दिए जाने को लेकर आपत्ति जताई थी। उनका कहना था कि इससे बाढ़ का खतरा बढ़ जाएगा।
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सिंचाई विभाग का कहना है कि नदी की चौड़ाई जितनी पीछे है उतनी ही रखी जाए। ऐसे में कार्यदायी संस्था ने नदी के क्षेत्र को छोड़कर बाकी हिस्से पर काम चालू रखा हुआ था। साथ ही सिंचाई विभाग से एनओसी के लिए फाइल शासन को भेजी गई थी, जहां से अब एनओसी मिल गई है। ऐसे में अब कार्य के गति पकड़ने की उम्मीद है। बता दें, कि एसटीपी का कार्य पूर्ण करने के लिए 31 अक्तूबर 2027 की तिथि मिली है।
हिंडन और यमुना भी होंगी साफ
सहारनपुर शहर के बीच से होकर गुजरने वाले पांवधोई नदी और ढमोला नदी हिंडन की सहायक नदियां हैं। हिंडन नदी यमुना नदी में गिरती है। यानी शहर से निकलने वाला दूषित पानी कई नदियों को प्रभावित करता है।
पांवधोई और ढमोला नदी में गिर रहे 98 नालों के पानी को एसटीपी तक लाने के लिए दोनों नदियों में 16 से 20 किलोमीटर लंबी बड़ी पाइपलाइन डाली जाएगी। उसके बाद नदी में केवल प्राकृतिक स्रोत से आने वाला पानी ही बहेगा।
एसटीपी के जरिये शहर के दूषित पानी को साफ कर ढमोला में छोड़ा जाएगा, जिसका असर हिंडन और यमुना नदी तक पर पड़ेगा।