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Saharanpur News: तस्करी रोकने के लिए पड़ोसी राज्यों की सीमा से सटे क्षेत्रों में खुलेंगी शराब दुकानें
संवाद न्यूज एजेंसी, सहारनपुर
Updated Thu, 30 Apr 2026 01:42 AM IST
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सहारनपुर। पड़ोसी राज्यों की सीमाओं से सटे क्षेत्रों में आबकारी विभाग शराब की दुकानें खोलेगा। इसे लेकर विभाग ने तैयारी शुरू कर दी है। नई व्यवस्था के तहत हरियाणा-उत्तराखंड बॉर्डर से होने वाली सप्लाई पर काफी हद तक अंकुश लगेगा।
जिले की सीमाएं हरियाणा, उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश से सटी हुई हैं। इन राज्यों के बॉर्डर से शराब तस्करी की आवाजाही लंबे समय से चुनौती बनी हुई है। खासकर हरियाणा में शराब सस्ती होने की वजह से बड़े पैमाने पर तस्करी की घटनाएं सामने आती रहती हैं। ऐसे में विभाग का मानना है कि यदि सीमा के पास ही अधिकृत दुकानें उपलब्ध होंगी तो अवैध आपूर्ति पर काफी हद तक अंकुश लगाया जा सकेगा।
सहारनपुर में यमुनानगर की ओर से सबसे अधिक शराब लाई जाती है, जिसमें सरसावा क्षेत्र प्रमुख मार्ग के रूप में इस्तेमाल होता है। इसके अलावा यमुना नदी के रास्ते नकुड़ और गंगोह क्षेत्रों में भी शराब की तस्करी की जाती है, जो चुनावी समय में और बढ़ जाता है।
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-- 124 कंपोजिट, 180 देसी शराब की दुकानें
जिले में इस समय देसी शराब की 180 दुकानें हैं, जबकि 124 कंपोजिट शॉप हैं। इन पर अंग्रेजी के साथ बीयर भी मिलती है। इनके अलावा चार मॉडल शॉप भी हैं। हालांकि, अभी दो मॉडल शॉप नहीं चल रही है। लाइसेंस फीस अधिक होने के चलते आवेदक सामने नहीं आ रहे हैं। चौथी ई-लॉटरी से दोनों मॉडल शॉप खुलने की उम्मीद है।
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दूसरे राज्यों से सटी सीमा क्षेत्रों में शराब दुकान खोलने का उद्देश्य न केवल अवैध तस्करी को रोकना है, बल्कि राजस्व में वृद्धि करना भी है। इस संबंध में मुख्यालय से अनुमति प्राप्त करने की प्रक्रिया चल रही है।
- एमपी सिंह, जिला आबकारी अधिकारी
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जिले की सीमाएं हरियाणा, उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश से सटी हुई हैं। इन राज्यों के बॉर्डर से शराब तस्करी की आवाजाही लंबे समय से चुनौती बनी हुई है। खासकर हरियाणा में शराब सस्ती होने की वजह से बड़े पैमाने पर तस्करी की घटनाएं सामने आती रहती हैं। ऐसे में विभाग का मानना है कि यदि सीमा के पास ही अधिकृत दुकानें उपलब्ध होंगी तो अवैध आपूर्ति पर काफी हद तक अंकुश लगाया जा सकेगा।
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सहारनपुर में यमुनानगर की ओर से सबसे अधिक शराब लाई जाती है, जिसमें सरसावा क्षेत्र प्रमुख मार्ग के रूप में इस्तेमाल होता है। इसके अलावा यमुना नदी के रास्ते नकुड़ और गंगोह क्षेत्रों में भी शराब की तस्करी की जाती है, जो चुनावी समय में और बढ़ जाता है।
जिले में इस समय देसी शराब की 180 दुकानें हैं, जबकि 124 कंपोजिट शॉप हैं। इन पर अंग्रेजी के साथ बीयर भी मिलती है। इनके अलावा चार मॉडल शॉप भी हैं। हालांकि, अभी दो मॉडल शॉप नहीं चल रही है। लाइसेंस फीस अधिक होने के चलते आवेदक सामने नहीं आ रहे हैं। चौथी ई-लॉटरी से दोनों मॉडल शॉप खुलने की उम्मीद है।
दूसरे राज्यों से सटी सीमा क्षेत्रों में शराब दुकान खोलने का उद्देश्य न केवल अवैध तस्करी को रोकना है, बल्कि राजस्व में वृद्धि करना भी है। इस संबंध में मुख्यालय से अनुमति प्राप्त करने की प्रक्रिया चल रही है।
- एमपी सिंह, जिला आबकारी अधिकारी
