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Saharanpur News: 150 करोड़ की मिल संपत्ति पर कर्ज का खेल, शासन ने बैठाई जांच
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टोडरपुर स्थित शाकुंबरी शुगर मिल का मुख्य गेट
- टोडरपुर की शाकुंबरी शुगर एंड एलाइड इंडस्ट्रीज में वित्तीय अनियमितता के आरोप
- मिल के नाम पर 30 करोड़ का अतिरिक्त कर्ज लेकर निजी कंपनी में लगाने का मामला
- शासन ने मंडलायुक्त को दिए जांच के आदेश, चिलकाना थाने में प्राथमिकी भी दर्ज
विनीत तोमर
सहारनपुर। टोडरपुर स्थित शाकुंबरी शुगर एंड एलाइड इंडस्ट्रीज लिमिटेड की करीब 150 करोड़ रुपये कीमत की संपत्ति को लेकर वित्तीय अनियमितता के आरोप शासन तक पहुंच गए। चीनी मिल के एक निदेशक नंद किशोर चुग की शिकायत पर शासन ने मामले की जांच के आदेश दिए हैं। आरोप है कि दूसरे निदेशक ने मिल की संपत्ति को बैंक के पास गिरवी रखकर कर्ज लिया गया और बाद में उसी संपत्ति के आधार पर करीब 30 करोड़ रुपये का अतिरिक्त ऋण लेकर रकम का इस्तेमाल निजी कंपनी में किया गया। मामले में चिलकाना थाने में संबंधित निदेशक राहिल इरफान शेख और अज्ञात के खिलाफ एफआईआर भी दर्ज हो चुकी है।
फेथ मर्केंटाइल प्राइवेट लिमिटेड कंपनी के निदेशक नंद किशोर चुग की तरफ से शासन को शिकायत भेजी गई थी। इसमें बताया कि उनकी कंपनी टोडरपुर स्थित शाकुंबरी शुगर एंड एलाइड इंडस्ट्रीज लिमिटेड के नाम से चीनी मिल का संचालन करती है। इसमें मेयर कमोडिटीज इंडिया लिमिटेड के निदेशक राहिल इरफान शेख और आरके एंड डी इन्वेस्टमेंट प्राइवेट लिमिटेड के निदेशक संजय तापड़िया भी शेयरधारक हैं। चीनी मिल में तीनों निदेशक के पद पर हैं। शासन में शिकायत भेजने से पहले शिकायतकर्ता ने 8 जुलाई को चिलकाना थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई थी, जिस पर भी जांच चल रही है। वहीं, अब शासन ने भी मंडलायुक्त को जांच के आदेश दिए हैं।
- पहले 25 करोड़ का कर्ज, फिर 150 करोड़ की संपत्ति गिरवी
शिकायतकर्ता के अनुसार, करीब दस साल तक बंद रहने के बाद वर्ष 2022 में मिल का दोबारा संचालन शुरू किया गया था। मिल को चलाने के लिए करीब 25 करोड़ रुपये का कर्ज ऊंची ब्याज दर पर लिया गया। बाद में राहिल इरफान शेख ने मेयर कमोडिटीज इंडिया लिमिटेड की वित्तीय साख के आधार पर मिल की 150 करोड़ रुपये से अधिक कीमत की संपत्तियां गिरवी रखकर कर्ज को कम ब्याज दर पर एचडीएफसी बैंक में स्थानांतरित कराया। आरोप है कि इसके बाद पहले से गिरवी रखी मिल की संपत्ति के आधार पर करीब 30 करोड़ रुपये का अतिरिक्त कर्ज लिया गया। इस रकम का इस्तेमाल चीनी मिल के बजाय निजी कंपनी में किया गया। साथ ही अन्य निदेशकों की सहमति के विपरीत अतिरिक्त धन लगाने, मिल के नियंत्रण में बदलाव करने और हिस्सेदारी बढ़ाने के भी आरोप लगाए गए हैं।
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- किसानों के भी करीब 20 करोड़ बकाया
शिकायतकर्ता के मुताबिक, पूरे मामले का पता तब चला, जब बैंक की ओर से कर्ज की किस्त जमा नहीं होने का नोटिस जारी किया गया। वित्तीय अनियमितताओं के चलते किसानों का भुगतान और कर्मचारियों का वेतन प्रभावित हुआ। मिल की मरम्मत और रखरखाव का काम भी नहीं हो सका। इस वर्ष मिल का संचालन भी नहीं हुआ। उधर, गन्ना विभाग के आंकड़ों के अनुसार इस मिल पर पेराई सत्र 2024-25 का करीब 20 करोड़ गन्ना भुगतान बकाया है।
-- वर्जन
इस प्रकरण में शिकायत शासन में पहुंची थी। शासन की तरफ से पत्र मिलने के बाद पूरे प्रकरण की जांच के लिए जिलाधिकारी को आदेश दिए गए हैं। जांच कराकर रिपोर्ट शासन को भेजी जाएगी। - डॉ. रूपेश कुमार, मंडलायुक्त
-- - यह बोले जांच अधिकारी
चिलकाना थाने में प्राथमिकी दर्ज होने के बाद मामले की जांच कर रहे एसएसआई राजकुमार चौहान ने बताया कि आरोपी पक्ष के अधिवक्ता की तरफ से भी दस्तावेज पेश किए गए हैं। पूरे मामले को लेकर कानूनी सलाह ली जा रही है। फिलहाल जांच जारी है।
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- मिल के नाम पर 30 करोड़ का अतिरिक्त कर्ज लेकर निजी कंपनी में लगाने का मामला
- शासन ने मंडलायुक्त को दिए जांच के आदेश, चिलकाना थाने में प्राथमिकी भी दर्ज
विनीत तोमर
सहारनपुर। टोडरपुर स्थित शाकुंबरी शुगर एंड एलाइड इंडस्ट्रीज लिमिटेड की करीब 150 करोड़ रुपये कीमत की संपत्ति को लेकर वित्तीय अनियमितता के आरोप शासन तक पहुंच गए। चीनी मिल के एक निदेशक नंद किशोर चुग की शिकायत पर शासन ने मामले की जांच के आदेश दिए हैं। आरोप है कि दूसरे निदेशक ने मिल की संपत्ति को बैंक के पास गिरवी रखकर कर्ज लिया गया और बाद में उसी संपत्ति के आधार पर करीब 30 करोड़ रुपये का अतिरिक्त ऋण लेकर रकम का इस्तेमाल निजी कंपनी में किया गया। मामले में चिलकाना थाने में संबंधित निदेशक राहिल इरफान शेख और अज्ञात के खिलाफ एफआईआर भी दर्ज हो चुकी है।
फेथ मर्केंटाइल प्राइवेट लिमिटेड कंपनी के निदेशक नंद किशोर चुग की तरफ से शासन को शिकायत भेजी गई थी। इसमें बताया कि उनकी कंपनी टोडरपुर स्थित शाकुंबरी शुगर एंड एलाइड इंडस्ट्रीज लिमिटेड के नाम से चीनी मिल का संचालन करती है। इसमें मेयर कमोडिटीज इंडिया लिमिटेड के निदेशक राहिल इरफान शेख और आरके एंड डी इन्वेस्टमेंट प्राइवेट लिमिटेड के निदेशक संजय तापड़िया भी शेयरधारक हैं। चीनी मिल में तीनों निदेशक के पद पर हैं। शासन में शिकायत भेजने से पहले शिकायतकर्ता ने 8 जुलाई को चिलकाना थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई थी, जिस पर भी जांच चल रही है। वहीं, अब शासन ने भी मंडलायुक्त को जांच के आदेश दिए हैं।
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- पहले 25 करोड़ का कर्ज, फिर 150 करोड़ की संपत्ति गिरवी
शिकायतकर्ता के अनुसार, करीब दस साल तक बंद रहने के बाद वर्ष 2022 में मिल का दोबारा संचालन शुरू किया गया था। मिल को चलाने के लिए करीब 25 करोड़ रुपये का कर्ज ऊंची ब्याज दर पर लिया गया। बाद में राहिल इरफान शेख ने मेयर कमोडिटीज इंडिया लिमिटेड की वित्तीय साख के आधार पर मिल की 150 करोड़ रुपये से अधिक कीमत की संपत्तियां गिरवी रखकर कर्ज को कम ब्याज दर पर एचडीएफसी बैंक में स्थानांतरित कराया। आरोप है कि इसके बाद पहले से गिरवी रखी मिल की संपत्ति के आधार पर करीब 30 करोड़ रुपये का अतिरिक्त कर्ज लिया गया। इस रकम का इस्तेमाल चीनी मिल के बजाय निजी कंपनी में किया गया। साथ ही अन्य निदेशकों की सहमति के विपरीत अतिरिक्त धन लगाने, मिल के नियंत्रण में बदलाव करने और हिस्सेदारी बढ़ाने के भी आरोप लगाए गए हैं।
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- किसानों के भी करीब 20 करोड़ बकाया
शिकायतकर्ता के मुताबिक, पूरे मामले का पता तब चला, जब बैंक की ओर से कर्ज की किस्त जमा नहीं होने का नोटिस जारी किया गया। वित्तीय अनियमितताओं के चलते किसानों का भुगतान और कर्मचारियों का वेतन प्रभावित हुआ। मिल की मरम्मत और रखरखाव का काम भी नहीं हो सका। इस वर्ष मिल का संचालन भी नहीं हुआ। उधर, गन्ना विभाग के आंकड़ों के अनुसार इस मिल पर पेराई सत्र 2024-25 का करीब 20 करोड़ गन्ना भुगतान बकाया है।
इस प्रकरण में शिकायत शासन में पहुंची थी। शासन की तरफ से पत्र मिलने के बाद पूरे प्रकरण की जांच के लिए जिलाधिकारी को आदेश दिए गए हैं। जांच कराकर रिपोर्ट शासन को भेजी जाएगी। - डॉ. रूपेश कुमार, मंडलायुक्त
चिलकाना थाने में प्राथमिकी दर्ज होने के बाद मामले की जांच कर रहे एसएसआई राजकुमार चौहान ने बताया कि आरोपी पक्ष के अधिवक्ता की तरफ से भी दस्तावेज पेश किए गए हैं। पूरे मामले को लेकर कानूनी सलाह ली जा रही है। फिलहाल जांच जारी है।