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Saharanpur: पत्नी के हत्यारे ने 22 साल काटी सजा, अब बेटे की हत्या में उम्रकैद, मगर नहीं गया जेल; जानें क्यों

अमर उजाला नेटवर्क, सहारनपुर Published by: Mohd Mustakim Updated Tue, 24 Mar 2026 09:31 PM IST
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सार

बड़गांव में देवेंद्र ने अपनी पत्नी और बेटे की हत्या कर दी थी। पत्नी की हत्या में वह जेल चला गया था। अब बेटे की हत्या में भी फैसला आ गया। कोर्ट ने कहा कि एक ही क्राइम नंबर है, सजा दो बार नहीं काटी जा सकती है। ऐसे में मुचलके पर उसे रिहा करने का आदेश दिया गया। 

Saharanpur: Wife's murderer served 22 years, now life imprisonment for son's murder, but did not go to jail
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : ANI
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विस्तार

अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश की अदालत ने बेटे की हत्या के दोषी पिता को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। हालांकि अदालत ने यह भी कहा कि दोषी अपनी पत्नी की हत्या में पहले ही करीब 22 साल सजा भुगत चुका है। पत्नी और बेटे की हत्या का अपराध एक ही था और अपराध संख्या भी एक ही है। ऐसे में बेटे की हत्या में दोबारा सजा नहीं काट सकता। इसके बाद दोषी को 50 हजार रुपये के निजी मुचलके पर रिहा करने के आदेश दिए हैं।
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ये है मामला
जिला सहायक शासकीय अधिवक्ता दीपक सैनी ने बताया कि थाना बड़गांव में 23 अक्तूबर 1999 को तहरीर दी गई थी। यशवीर सिंह द्वारा दी गई तहरीर में देवेंद्र पर अपनी पत्नी सुनीता की हत्या करने और बच्चे अंकित उर्फ राहुल को लेकर फरार होने के आरोप लगाए गए थे। 
 
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दूसरी तहरीर यशपाल सिंह ने दी थी। बताया कि वह 22 अक्तूबर 1999 को अपने गांव से अपनी बहन सुनीता व जयवती के गांव मोरा में आया था। जब वह अपनी बहन जयवती के यहां खाना खाकर सुनीता के घर पर मिलने गया तो उस समय उसका बहनोई देवेंद्र उर्फ भालू व उसके सगे भाई भीष्म, नीटू, राजू, मुकेश को शराब पीते हुए और शोर शराबा करते हुए देखा। सभी उसकी बहन के साथ अभद्र व्यवहार कर रहे थे। दूसरे दिन सुबह पता चला कि देवेंद्र ने अपनी पत्नी सुनीता की हत्या करके उसके भांजे को गायब कर दिया है। इसके बाद अंकित उर्फ राहुल का शव गांव के तालाब से चार दिन बाद पुलिस को मिला था। पुलिस ने तहरीर के आधार पर मामला दर्ज किया।
 

उच्च न्यायालय में दायर की दो बार अर्जी
अदालत ने 25 मई 2003 को देवेंद्र उर्फ भालू को पत्नी की हत्या के दोष में आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। सजा होने के बाद देवेंद्र की ओर से हाईकोर्ट में अर्जी दायर की गई। हाईकोर्ट ने फिर से सुनवाई करने के आदेश दिए। फिर अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश ने सुनवाई के बाद 16 अगस्त 2006 को फिर से देवेंद्र उर्फ भोला को सजा सुनाई। इसके निर्णय के खिलाफ भी देवेंद्र ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। हाईकोर्ट ने कहा कि दोषी के खिलाफ अंकित उर्फ राहुल की हत्या करने का आरोप शामिल किए बिना ही उसे दोषसिद्ध कर दिया। इससे उसे अपनी रक्षा करने का अवसर नहीं मिला।
 

एक अपराध के लिए एक ही बार सजा
इसके बाद अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश की अदालत में देवेंद्र पर उसके बेटे अंकित उर्फ राहुल की हत्या का केस चला। इस केस पर मंगलवार को अदालत ने फैसला सुनाते दोषी देवेंद्र को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। यह भी कहा कि संविधान के अनुच्छेद के 20(2) के तहत किसी व्यक्ति पर एक ही अपराध के लिए एक से अधिक बार मुकदमा चलाया नहीं जा सकता। न ही उसे एक से अधिक बार दंडित किया जा सकता है। 

मृतका सुनीता व मृतक अंकित उर्फ राहुल की हत्या एक ही अपराध है। एक ही अपराध संख्या भी है। चूंकि इस मामले में दोषी देवेंद्र उर्फ भालू पूर्व में आजीवन कारावास की सजा से दंडित हो चुका है। राज्य सरकार ने उसका जेल में आचरण संतोषजनक पाया गया है। ऐसे में बेटे की हत्या में उसे दोबारा सजा नहीं दी जा सकती। इस पर अदालत ने देवेंद्र को 50 हजार रुपये के निजी मुचलका प्रस्तुत करने पर रिहा करने के आदेश दिए हैं।

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