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Saharanpur News: मौत के झपट्टे ने बुझा दिए तीन घरों के चिराग
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दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे पर नागल में थार की टक्कर से टूटा क्रश बैरियर। संवाद
संवाद न्यूज एजेंसी
सहारनपुर। दशहरे की छुट्टियों में दोस्तों के साथ घूमने की खुशी, घर से निकलते वक्त अपनों से हुई बातें और जल्द लौट आने का भरोसा... किसी ने सपने में भी नहीं सोचा था कि कुछ घंटों बाद यही सफर तीन परिवारों की जिंदगी में ऐसा अंधेरा भर देगा, जिसे कभी दूर नहीं किया जा सकेगा।
मसूरी घूमने जा रहे पांच दोस्तों की थार रास्ते में हादसे का शिकार हो गई। इस हादसे में तीन युवकों की मौत ने तीन परिवारों की खुशियां छीन लीं। किसी मां की गोद सूनी हो गई तो किसी पिता के बुढ़ापे का सहारा छिन गया। इनमें एक ऐसा बेटा भी था, जो अपने परिवार की इकलौती उम्मीद था।
राहुल के पिता गोपाल सिंह को अब भी बेटे से हुई आखिरी बातचीत याद आ रही है। उन्होंने बताया कि राहुल शनिवार दोपहर कार लेकर घर से निकला था। रात करीब आठ बजे उन्होंने फोन किया तो राहुल ने कहा कि वह अभी घर आ रहा है। कुछ देर बाद बेटे का फिर फोन आया। उसने बताया कि वह घूमने जा रहा है। पिता ने घर लौटने के लिए कहा, लेकिन राहुल नहीं माना।
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उन्हें क्या पता था कि बेटे को घर आने के लिए कहने वाली यह बातचीत आखिरी यादों में शामिल हो जाएगी। कुछ देर बाद कमला नगर में रहने वाले भतीजे ने फोन कर राहुल के एक्सीडेंट की खबर दी। राहुल पांच भाई-बहनों में से एक था और निजी डॉक्टर के यहां कंपाउंडर का काम करता था। हादसे की खबर ने परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया।
सक्षम के पिता राजेंद्र गौतम के लिए भी बेटे के साथ बिताए आखिरी पलों को भुला पाना आसान नहीं है। उन्होंने बताया कि सक्षम दो बेटों में बड़ा था। शनिवार को ड्यूटी से घर लौटे तो सक्षम ने बताया कि उसे तीन दिन की छुट्टी मिली है और वह मसूरी घूमने जा रहा है। शाम करीब सात बजे वह दोस्तों के साथ निकल गया।
परिवार को लगा था कि छुट्टियां बिताकर बेटा लौट आएगा, लेकिन रविवार सुबह फोन पर उन्हें दिल दहला देने वाली खबर मिली। सक्षम सन फार्मा क्लासिक कंपनी में एरिया मैनेजर था। जिस बेटे के भविष्य को लेकर परिवार ने सपने संजोए थे, उसके साथ हुए हादसे ने उन सपनों को भी तोड़ दिया।
साहिल के मौसा ब्रह्मनंद ने बताया कि साहिल के पिता बीएसएफ में अधिकारी हैं और वर्तमान में उनकी तैनाती बंगलूरू में है। साहिल अपनी मां और बहन के साथ दिल्ली में रहता था। वह परिवार का इकलौता बेटा था। उसके जाने से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। जिस बेटे को परिवार ने बड़े अरमानों से पाला था, उसके अचानक चले जाने से उनकी दुनिया उजड़ गई।
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सहारनपुर। दशहरे की छुट्टियों में दोस्तों के साथ घूमने की खुशी, घर से निकलते वक्त अपनों से हुई बातें और जल्द लौट आने का भरोसा... किसी ने सपने में भी नहीं सोचा था कि कुछ घंटों बाद यही सफर तीन परिवारों की जिंदगी में ऐसा अंधेरा भर देगा, जिसे कभी दूर नहीं किया जा सकेगा।
मसूरी घूमने जा रहे पांच दोस्तों की थार रास्ते में हादसे का शिकार हो गई। इस हादसे में तीन युवकों की मौत ने तीन परिवारों की खुशियां छीन लीं। किसी मां की गोद सूनी हो गई तो किसी पिता के बुढ़ापे का सहारा छिन गया। इनमें एक ऐसा बेटा भी था, जो अपने परिवार की इकलौती उम्मीद था।
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राहुल के पिता गोपाल सिंह को अब भी बेटे से हुई आखिरी बातचीत याद आ रही है। उन्होंने बताया कि राहुल शनिवार दोपहर कार लेकर घर से निकला था। रात करीब आठ बजे उन्होंने फोन किया तो राहुल ने कहा कि वह अभी घर आ रहा है। कुछ देर बाद बेटे का फिर फोन आया। उसने बताया कि वह घूमने जा रहा है। पिता ने घर लौटने के लिए कहा, लेकिन राहुल नहीं माना।
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उन्हें क्या पता था कि बेटे को घर आने के लिए कहने वाली यह बातचीत आखिरी यादों में शामिल हो जाएगी। कुछ देर बाद कमला नगर में रहने वाले भतीजे ने फोन कर राहुल के एक्सीडेंट की खबर दी। राहुल पांच भाई-बहनों में से एक था और निजी डॉक्टर के यहां कंपाउंडर का काम करता था। हादसे की खबर ने परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया।
सक्षम के पिता राजेंद्र गौतम के लिए भी बेटे के साथ बिताए आखिरी पलों को भुला पाना आसान नहीं है। उन्होंने बताया कि सक्षम दो बेटों में बड़ा था। शनिवार को ड्यूटी से घर लौटे तो सक्षम ने बताया कि उसे तीन दिन की छुट्टी मिली है और वह मसूरी घूमने जा रहा है। शाम करीब सात बजे वह दोस्तों के साथ निकल गया।
परिवार को लगा था कि छुट्टियां बिताकर बेटा लौट आएगा, लेकिन रविवार सुबह फोन पर उन्हें दिल दहला देने वाली खबर मिली। सक्षम सन फार्मा क्लासिक कंपनी में एरिया मैनेजर था। जिस बेटे के भविष्य को लेकर परिवार ने सपने संजोए थे, उसके साथ हुए हादसे ने उन सपनों को भी तोड़ दिया।
साहिल के मौसा ब्रह्मनंद ने बताया कि साहिल के पिता बीएसएफ में अधिकारी हैं और वर्तमान में उनकी तैनाती बंगलूरू में है। साहिल अपनी मां और बहन के साथ दिल्ली में रहता था। वह परिवार का इकलौता बेटा था। उसके जाने से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। जिस बेटे को परिवार ने बड़े अरमानों से पाला था, उसके अचानक चले जाने से उनकी दुनिया उजड़ गई।

दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे पर नागल में थार की टक्कर से टूटा क्रश बैरियर। संवाद

दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे पर नागल में थार की टक्कर से टूटा क्रश बैरियर। संवाद

दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे पर नागल में थार की टक्कर से टूटा क्रश बैरियर। संवाद

दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे पर नागल में थार की टक्कर से टूटा क्रश बैरियर। संवाद