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UP: मौलाना मदनी बोले- बाबरी मस्जिद का निर्माण मंदिर को ध्वस्त करके नहीं किया गया'; जमीयत की शोध रिपोर्ट जारी
Sun, 17 May 2026 01:27 PM IST
Mohd Mustakim
अमर उजाला नेटवर्क, सहारनपुर
अमर उजाला नेटवर्क, सहारनपुर
Published by: Mohd Mustakim
Updated Sun, 17 May 2026 01:27 PM IST
सार
Saharanpur News: नई दिल्ली के कॉन्स्टीट्यूशन क्लब में एक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इसमें बाबरी मस्जिद निर्माण, फैसले और पूजा स्थल अधिनियम पर शोध रिपोर्ट जारी की गई। कार्यक्रम में मदनी समेत कई गणमान्य मौजूद रहे।
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दिल्ली में आयोजित कार्यक्रम में मौजूद लोग।
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
जमीयत उलमा-ए-हिंद की अधीनस्थ संस्था जस्टिस एंड एंपावरमेंट ऑफ माइनॉरिटीज और साउथ एशियन माइनॉरिटीज लायर एसोसिएशन (समला) के संयुक्त विमोचन कार्यक्रम में बाबरी मस्जिद पर फैसले और पूजा स्थल अधिनियम 1991 पर एक शोध रिपोर्ट जारी की गई है।
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नई दिल्ली के कॉन्स्टीट्यूशन क्लब में कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इसमें जारी की गई रिपोर्ट में यह बात कही गई कि पूजा स्थल अधिनियम, 1991 भारत के धर्म निरपेक्ष ताने-बाने, धार्मिक सद्भाव और सांविधानिक स्थिरता की रक्षा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है ताकि ऐतिहासिक विवादों को फिर हवा न दी जा सके।
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जमीयत उलमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना महमूद असद मदनी ने कहा कि बाबरी मस्जिद फैसले पर एक गंभीर और गहन अध्ययन की आवश्यक थी। इससे भावी पीढ़ियां यह देख सकेंगी कि एक वर्ग इस फैसले को अलग नजरिए से देखते हुए अपने पक्ष को विद्वतापूर्ण एवं सांविधानिक तरीके से दुनिया के सामने प्रस्तुत किया।
मौलाना मदनी ने कहा कि यह रिपोर्ट वास्तव में भारत की धर्म निरपेक्ष पहचान, सांविधानिक मूल्यों और आपसी सद्भाव की रक्षा का एक गंभीर और ईमानदार प्रयास है। उन्होंने कहा कि बाबरी मस्जिद मामले में कहीं भी यह साबित नहीं हुआ कि मस्जिद का निर्माण किसी मंदिर को ध्वस्त करके किया गया था, बल्कि सुप्रीम कोर्ट ने स्वयं अपने फैसले के पैराग्राफ 788 और उसके बाद के हिस्सों में स्पष्ट किया है कि इस दावे के पक्ष में कोई निर्णायक सबूत नहीं है।
इस मौके पर सलमान खुर्शीद, फिरोज गाजी, वरिष्ठ अधिवक्ता इंदिरा जयसिंह, प्रो. फैजान मुस्तफा, एमआर शमशाद, निजाम पाशा, पूर्व न्यायमूर्ति इकबाल अंसारी, शोधार्थी निजामुद्दीन सिद्दीकी, मौलाना हकीमुद्दीन, मौलाना नियाज फारुकी आदि मौजूद रहे।