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दरगाह में तोड़फोड़ धार्मिक एवं सांविधानिक अधिकारों का उल्लंघन : मदनी
संवाद न्यूज एजेंसी, सहारनपुर
Updated Fri, 30 Jan 2026 12:45 AM IST
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देवबंद। जमीयत उलमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना महमूद मदनी ने किंग जॉर्ज मेडिकल कॉलेज लखनऊ परिसर से सटे हजरत हाजी हरमैन शाहؒ के दरगाह में की गई तोड़फोड़ और हजरत मखदूम शाह मीनाؒ की पांच सौ वर्ष से अधिक पुराने मजारों के विरुद्ध जारी किए गए ध्वस्तीकरण नोटिसों पर गहरी चिंता जताई है। मदनी ने कॉलेज प्रशासन को चेतावनी देते हुए नोटिसों को वापस लिए जाने की बात कही।
मौलाना महमूद मदनी की ओर से जारी बयान में कहा गया कि किंग जॉर्ज मेडिकल कॉलेज से सटे यह मजार सात सौ वर्ष से भी अधिक पुराने हैं, जबकि कॉलेज की स्थापना वर्ष 1912 में हुई थी। ऐसी स्थिति में मीडिया के माध्यम से यह कहना कि कॉलेज परिसर में दरगाहों का क्या काम सरासर असत्य और भ्रम फैलाने वाला है। मौलाना मदनी ने कहा कि कॉलेज की स्थापना के समय में ही राजस्व विभाग ने दरगाह की भूमि को कॉलेज परिसर से अलग सीमांकन के माध्यम से स्पष्ट कर दिया था, जो उसकी स्थायी और स्वतंत्र कानूनी स्थिति का प्रमाण है।
उन्होंने कहा कि 26 अप्रैल 2025 को हजरत हाजी हरमैन शाहؒ की सीमा में स्थित वुजूखाना, इबादतगाह तथा जायरीनों की आवाजाही से संबंधित सुविधाओं को प्रोफेसर डॉ. केके सिंह की निगरानी में ध्वस्त किया जाना एकतरफा और पूरी तरह गैर-कानूनी कार्रवाई थी। इस संबंध में न तो कोई न्यायालय का आदेश मौजूद था और न ही किसी प्रकार की वैधानिक अनुमति ली गई थी, बल्कि यह कार्रवाई मीडिया में फैलाए गए गलत नैरेटिव की आड़ में की गई
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मौलाना महमूद मदनी की ओर से जारी बयान में कहा गया कि किंग जॉर्ज मेडिकल कॉलेज से सटे यह मजार सात सौ वर्ष से भी अधिक पुराने हैं, जबकि कॉलेज की स्थापना वर्ष 1912 में हुई थी। ऐसी स्थिति में मीडिया के माध्यम से यह कहना कि कॉलेज परिसर में दरगाहों का क्या काम सरासर असत्य और भ्रम फैलाने वाला है। मौलाना मदनी ने कहा कि कॉलेज की स्थापना के समय में ही राजस्व विभाग ने दरगाह की भूमि को कॉलेज परिसर से अलग सीमांकन के माध्यम से स्पष्ट कर दिया था, जो उसकी स्थायी और स्वतंत्र कानूनी स्थिति का प्रमाण है।
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उन्होंने कहा कि 26 अप्रैल 2025 को हजरत हाजी हरमैन शाहؒ की सीमा में स्थित वुजूखाना, इबादतगाह तथा जायरीनों की आवाजाही से संबंधित सुविधाओं को प्रोफेसर डॉ. केके सिंह की निगरानी में ध्वस्त किया जाना एकतरफा और पूरी तरह गैर-कानूनी कार्रवाई थी। इस संबंध में न तो कोई न्यायालय का आदेश मौजूद था और न ही किसी प्रकार की वैधानिक अनुमति ली गई थी, बल्कि यह कार्रवाई मीडिया में फैलाए गए गलत नैरेटिव की आड़ में की गई
