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Saharanpur News: गद्यांश हो या श्लोक, रचियता, पात्र आर भाव सही है तो मिलेंगे पूरे अंक
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डॉ. सुमन यादव, संस्कृत प्रवक्ता।
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- राजकीय कन्या इंटर कॉलेज देवला की संस्कृत प्रवक्ता डॉ. सुमन यादव ने तैयार किए टिप्स
संवाद न्यूज एजेंसी
सहारनपुर। यूपी बोर्ड 12वीं के लिए संस्कृत विषय का प्रश्न पत्र पूरी तरह पाठ्य पुस्तक पर आधारित होता है। इसलिए परीक्षार्थियों को घबराने की जरूरत नहीं है। यह कहना है राजकीय कन्या इंटर कॉलेज देवला की संस्कृत प्रवक्ता डॉ. सुमन यादव का। उन्होंने 12वीं के विद्यार्थियों के लिए संस्कृत में बेहतर अंक प्राप्त करने के लिए कुछ टिप्स तैयार किए हैं। उनका कहना है कि चाहे गद्यांश आए या श्लोक। यदि रचयिता, पात्र और भाव सही लिखेंगे तो पूरे अंक प्राप्त होंगे।
डॉ. सुमन ने बताया कि नियमित अभ्यास करें और विषय को समझकर पढ़ें। परीक्षा में उत्तर सरल, स्पष्ट और क्रमबद्ध लिखने से अच्छे अंक मिलते हैं। गद्यांश पर आधारित प्रश्नों का उत्तर देने से पहले गद्यांश को कम से कम कम दो बार ध्यानपूर्वक पढ़ें और उसका अर्थ समझने का प्रयास करें। गद्यांश पढ़ने के बाद सभी प्रश्नों को ध्यान से पढ़ें। इसके बाद गद्यांश में से ही उत्तर खोजें। श्लोक पर आधारित प्रश्न में उत्तर लिखते समय क्रम का विशेष ध्यान रखें।
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सबसे पहले संदर्भ, फिर प्रसंग और अंत में व्याख्या लिखें। संदर्भ में यह बताएं कि श्लोक किस ग्रंथ से लिया गया है और उसके कवि कौन हैं। प्रसंग में यह लिखें कि श्लोक किस परिस्थिति में कहा गया है और कौन सा पात्र या कवि यह बात कह रहा है। व्याख्या में श्लोक का भाव अपनी सरल भाषा में समझाएं। इसमें तीन से चार पंक्तियां काफी हैं। अभिज्ञान शाकुंतलम् से संबंधित प्रश्न करते समय सबसे पहले यह देखें कि दिया गया गद्यांश है या श्लोक। इसके बाद क्रम से संदर्भ, प्रसंग और व्याख्या लिखें।
- पात्र का चरित्र-चित्रण करते समय हेडिंग बनाकर उसके गुण, स्वभाव और आचरण लिखें।
- लेखक, कवि तथा नाटककार से संबंधित प्रश्नों का उत्तर लिखते समय शब्द-सीमा (100 शब्द) का विशेष ध्यान रखें।
- केवल मुख्य बातें ही लिखें, अनावश्यक विवरण न जोड़ें।
- बहुविकल्पीय प्रश्नों को हल करते समय सभी विकल्पों को ध्यान से पढ़ें, जल्दबाजी न करें।
- निबंध को दस स्पष्ट बिन्दुओं में लिखें, भाषा सरल और वाक्य छोटे रखें।
- अलंकार की परिभाषा प्रश्न में पढ़े अनुसार हिंदी या संस्कृत में लिखें और उदाहरण हमेशा संस्कृत में दें।
- कर्ता, क्रिया और कर्म इत्यादि को पहचानकर नियमित अनुवाद का अभ्यास करें।
- नियमित अभ्यास से अनुवाद सही होता है और परीक्षा में अंक अच्छे मिलते हैं।
- इसी प्रकार संधि, समास, कारक तथा विभक्ति एवं वाक्य-परिवर्तन का भी नियमित अभ्यास करें।
