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Sambhal News: समझौते को तैयार थे दोनों पक्ष, पुलिस कार्रवाई कर रही थी...गुस्साए मोरध्वज ने लगा ली थी आग
संवाद न्यूज एजेंसी, संभल
Updated Mon, 22 Jun 2026 01:59 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी धनारी । थाने पहुंचकर पुलिस के प्रति नाराजगी जताते हुए खुद को आग लगाने वाले गांव बगढेर निवासी मोरध्वज के इस कदम की वजह दरोगा और सिपाहियों की जिद बताई जा रही है।
मृतक के परिजनों का कहना है कि गांव में झगड़े पर मोरध्वज के चचेरे भाई लखपत सिंह और रिश्ते के भतीजे भारत सिंह को पकड़कर पुलिस थाने लाई थी। दोनों पक्षों में समझौते के लिए रजामंदी बनने पर भी पुलिस दोनों को छोड़ने के बजाय शांतिभंग में चालान की तैयारी कर रही थी, जबकि दूसरे पक्ष से हिरासत में लिए शख्स को छोड़ दिया था। इस बात से नाराज होकर ही मोरध्वज ने खुद को आग लगा ली। इलाज के दौरान दिल्ली एम्स में उसकी मौत हो गई। मोरध्वज के आग लगाते ही लखपत और भारत को थाने से रिहा कर दिया गया।
रविवार को जहां पुलिस-पीएसी की मौजूदगी में कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच मोरध्वज का अंतिम संस्कार हुआ, वहीं लखपत सिंह ने आपबीती के साथ पूरा वाकया बयां किया। लखपत सिंह के मुताबिक बुधवार की रात गांव बगढेर में एक ग्रामीण के घर बच्चे के मुंडन की दावत में उनका गांव के ही तीन लोगों से विवाद हो गया था। इसमें दूसरे पक्ष के सुरेंद्र के सिर में चोट लगी थी। मौके पर पहुंची यूपी 112 पुलिस उन्हें (लखपत सिंह) और मोरध्वज के रिश्ते के भतीजे भारत सिंह को पकड़कर थाने ले गई थी। दूसरे पक्ष से भी एक को पकड़ा था। बृहस्पतिवार दोपहर में दोनों पक्षों के बीच समझौते के प्रयास शुरू हुए थे। शाम तक प्रयास से समझौते के लिए आपसी रजामंदी बन रही थी। यह जानने पर भी पुलिस उन्हें और भारत को छोड़ने के स्थान पर शांतिभंग में कार्रवाई की बात कह रही थी। शाम को ही मोरध्वज थाने पर पहुंचा और खुद पर पेट्रोल डालकर आग लगा ली और जलती हुई अवस्था में परिसर के भीतर घुस आया। इस दौरान वह पुलिस पर परेशान करने का आरोप लगा रहा था, जो किसी के द्वारा बनाई गई वीडियो में रिकॉर्ड हुआ है।
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लखपत सिंह का कहना है कि इससे अफरा तफरी में आए पुलिसकर्मियों ने कंबल आदि डालकर आग बुझाई और उसे इलाज के लिए पहुंचाया।
दूसरी ओर पुलिस ने उन दोनों को थाने से ही छोड़ दिया, जबकि दूसरे पक्ष के आरोपी को पहले ही छोड़ चुकी थी। गंभीर रूप से झुलसे होने के कारण मेरठ और दिल्ली एम्स तक इलाज कराने पर भी मोरध्वज को बचाया नहीं जा सका। शनिवार को उसने दम तोड़ दिया।
मृतक के परिजनों का कहना है कि गांव में झगड़े पर मोरध्वज के चचेरे भाई लखपत सिंह और रिश्ते के भतीजे भारत सिंह को पकड़कर पुलिस थाने लाई थी। दोनों पक्षों में समझौते के लिए रजामंदी बनने पर भी पुलिस दोनों को छोड़ने के बजाय शांतिभंग में चालान की तैयारी कर रही थी, जबकि दूसरे पक्ष से हिरासत में लिए शख्स को छोड़ दिया था। इस बात से नाराज होकर ही मोरध्वज ने खुद को आग लगा ली। इलाज के दौरान दिल्ली एम्स में उसकी मौत हो गई। मोरध्वज के आग लगाते ही लखपत और भारत को थाने से रिहा कर दिया गया।
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रविवार को जहां पुलिस-पीएसी की मौजूदगी में कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच मोरध्वज का अंतिम संस्कार हुआ, वहीं लखपत सिंह ने आपबीती के साथ पूरा वाकया बयां किया। लखपत सिंह के मुताबिक बुधवार की रात गांव बगढेर में एक ग्रामीण के घर बच्चे के मुंडन की दावत में उनका गांव के ही तीन लोगों से विवाद हो गया था। इसमें दूसरे पक्ष के सुरेंद्र के सिर में चोट लगी थी। मौके पर पहुंची यूपी 112 पुलिस उन्हें (लखपत सिंह) और मोरध्वज के रिश्ते के भतीजे भारत सिंह को पकड़कर थाने ले गई थी। दूसरे पक्ष से भी एक को पकड़ा था। बृहस्पतिवार दोपहर में दोनों पक्षों के बीच समझौते के प्रयास शुरू हुए थे। शाम तक प्रयास से समझौते के लिए आपसी रजामंदी बन रही थी। यह जानने पर भी पुलिस उन्हें और भारत को छोड़ने के स्थान पर शांतिभंग में कार्रवाई की बात कह रही थी। शाम को ही मोरध्वज थाने पर पहुंचा और खुद पर पेट्रोल डालकर आग लगा ली और जलती हुई अवस्था में परिसर के भीतर घुस आया। इस दौरान वह पुलिस पर परेशान करने का आरोप लगा रहा था, जो किसी के द्वारा बनाई गई वीडियो में रिकॉर्ड हुआ है।
लखपत सिंह का कहना है कि इससे अफरा तफरी में आए पुलिसकर्मियों ने कंबल आदि डालकर आग बुझाई और उसे इलाज के लिए पहुंचाया।
दूसरी ओर पुलिस ने उन दोनों को थाने से ही छोड़ दिया, जबकि दूसरे पक्ष के आरोपी को पहले ही छोड़ चुकी थी। गंभीर रूप से झुलसे होने के कारण मेरठ और दिल्ली एम्स तक इलाज कराने पर भी मोरध्वज को बचाया नहीं जा सका। शनिवार को उसने दम तोड़ दिया।