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Sambhal News: ड्राइविंग स्कूलों पर ताला, बिना ट्रेनिंग जारी हो रहे सर्टिफिकेट, बन गए हैवी लाइसेंस
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संभल। वाहनों के हैवी लाइसेंस जारी होने को लेकर फर्जीवाड़ा सामने आ रहा है क्योंकि जिन ट्रेनिंग स्कूलों पर आवेदक को ट्रेनिंग दिए जाने की जिम्मेदारी है उनके हालात ठीक नहीं हैं। संभल में कहीं ट्रेनिंग स्कूल पर ताला लगा है तो कहीं ट्रेनिंग स्कूल का नामोनिशान ही नहीं है। जबकि सर्टिफिकेट जारी होने के बाद हैवी लाइसेंस बन रहे हैं। दिसंबर माह में ही 102 हैवी लाइसेंस जारी हुए हैं
संभल में चार ड्राइविंग ट्रेनिंग स्कूल पंजीकृत हैं। इन्हीं स्कूलों में नियमानुसार ट्रेनिंग के बाद सर्टिफिकेट जारी होने चाहिए और हैवी लाइसेंस बनना चाहिए लेकिन धरातल पर स्थिति कुछ और ही है। चंदौसी मार्ग पर एक ट्रेनिंग स्कूल का कहीं अता पता नहीं है लेकिन कागजों में वह चल रहा है। जबकि आदमपुर मार्ग पर ईदगाह से आगे एक ट्रेनिंग स्कूल तो बंद पड़ा है। शुक्रवार को भी यह ट्रेनिंग स्कूल बंद मिला। इसके गेट पर तीन ताले लटके हुए थे। खास बात यह है कि तालों पर जंक लगा हुआ था। गेट से अंदर झांककर देखा गया तो दो बड़े वाहन खड़े तो मिले लेकिन ऐसा लग रहा था कि काफी समय से वाहन हिले तक नहीं हैं। वाहनों के ऊपर और नीचे जमीन पर धूल ही धूल नजर आई।
ऐसे में सवाल उठता है कि जब ऐसे हालात हैं तो हैवी लाइसेंस के लिए लोगों को ट्रेनिंग कहां दी जा रही है और किस तरह लोगों के सर्टिफिकेट जारी हो रहे हैं। आंकड़े पर नजर घुमाई जाए तो एआरटीओ कार्यालय से दिसंबर महीने में ही 102 हैवी लाइसेंस जारी हुए हैं। ऐसे में जिम्मेदारों को यह गंभीरता से देखना होगा कि ट्रेनिंग स्कूलों से किस आधार पर सर्टिफिकेट जारी हो रहे हैं।
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यह है प्रक्रिया-
किसी भी व्यक्ति का एडमिशन ड्राइविंग ट्रेनिंग स्कूल में होता है। स्कूल के जिम्मेदार ही उसका लर्निंग लाइसेंस बनवाते हैं। इसकी सरकारी फीस 150 रुपये निर्धारित है। लर्निंग लाइसेंस के बाद 36 दिनों की ट्रेनिंग दी जाती है। फिर हैवी लाइसेंस के लिए ऑनलाइन आवेदन किया जाता है। इसकी फीस 1000 रुपये है। जबकि ट्रेनिंग स्कूल के द्वारा व्यक्ति से 10000 रुपये का शुल्क लिया जाता है।
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यह होना चाहिए
एआरटीओ अमिताभ चतुर्वेदी का कहना है कि ट्रेनिंग कॉलेज दिन के वक्त खुला रहना चाहिए। ट्रेनिंग कॉलेज में संबंधित लोगों को प्रोजेक्ट के द्वारा नियमों की जानकारी दी जाती है। वाहनों को किस तरह से चलाना है से लेकर सड़क सुरक्षा के बारे में विस्तार से बताया जाता है। साथ ही, वाहन को चलाना भी सिखाया जाता है।
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.अगर ट्रेनिंग स्कूल नहीं खुल रहे हैं तो इसकी जांच कराई जाएगी। डीटीसी को भी सूचित किया जाएगा। गड़बड़ी पाए जाने पर कार्रवाई की जाएगी। हालांकि निरीक्षण डीटीसी ही कर सकते हैं।
-अमिताभ चतुर्वेदी, एआरटीओ संभल
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संभल में चार ड्राइविंग ट्रेनिंग स्कूल पंजीकृत हैं। इन्हीं स्कूलों में नियमानुसार ट्रेनिंग के बाद सर्टिफिकेट जारी होने चाहिए और हैवी लाइसेंस बनना चाहिए लेकिन धरातल पर स्थिति कुछ और ही है। चंदौसी मार्ग पर एक ट्रेनिंग स्कूल का कहीं अता पता नहीं है लेकिन कागजों में वह चल रहा है। जबकि आदमपुर मार्ग पर ईदगाह से आगे एक ट्रेनिंग स्कूल तो बंद पड़ा है। शुक्रवार को भी यह ट्रेनिंग स्कूल बंद मिला। इसके गेट पर तीन ताले लटके हुए थे। खास बात यह है कि तालों पर जंक लगा हुआ था। गेट से अंदर झांककर देखा गया तो दो बड़े वाहन खड़े तो मिले लेकिन ऐसा लग रहा था कि काफी समय से वाहन हिले तक नहीं हैं। वाहनों के ऊपर और नीचे जमीन पर धूल ही धूल नजर आई।
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ऐसे में सवाल उठता है कि जब ऐसे हालात हैं तो हैवी लाइसेंस के लिए लोगों को ट्रेनिंग कहां दी जा रही है और किस तरह लोगों के सर्टिफिकेट जारी हो रहे हैं। आंकड़े पर नजर घुमाई जाए तो एआरटीओ कार्यालय से दिसंबर महीने में ही 102 हैवी लाइसेंस जारी हुए हैं। ऐसे में जिम्मेदारों को यह गंभीरता से देखना होगा कि ट्रेनिंग स्कूलों से किस आधार पर सर्टिफिकेट जारी हो रहे हैं।
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यह है प्रक्रिया-
किसी भी व्यक्ति का एडमिशन ड्राइविंग ट्रेनिंग स्कूल में होता है। स्कूल के जिम्मेदार ही उसका लर्निंग लाइसेंस बनवाते हैं। इसकी सरकारी फीस 150 रुपये निर्धारित है। लर्निंग लाइसेंस के बाद 36 दिनों की ट्रेनिंग दी जाती है। फिर हैवी लाइसेंस के लिए ऑनलाइन आवेदन किया जाता है। इसकी फीस 1000 रुपये है। जबकि ट्रेनिंग स्कूल के द्वारा व्यक्ति से 10000 रुपये का शुल्क लिया जाता है।
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यह होना चाहिए
एआरटीओ अमिताभ चतुर्वेदी का कहना है कि ट्रेनिंग कॉलेज दिन के वक्त खुला रहना चाहिए। ट्रेनिंग कॉलेज में संबंधित लोगों को प्रोजेक्ट के द्वारा नियमों की जानकारी दी जाती है। वाहनों को किस तरह से चलाना है से लेकर सड़क सुरक्षा के बारे में विस्तार से बताया जाता है। साथ ही, वाहन को चलाना भी सिखाया जाता है।
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.अगर ट्रेनिंग स्कूल नहीं खुल रहे हैं तो इसकी जांच कराई जाएगी। डीटीसी को भी सूचित किया जाएगा। गड़बड़ी पाए जाने पर कार्रवाई की जाएगी। हालांकि निरीक्षण डीटीसी ही कर सकते हैं।
-अमिताभ चतुर्वेदी, एआरटीओ संभल