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Sambhal News: जिम्मेदारी तय होने के बाद बंदर पकड़ेगा वन विभाग, तैयारी शुरू
Sun, 25 Oct 2026 02:08 AM IST
मुरादाबाद ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, संभल
संवाद न्यूज एजेंसी, संभल
Updated Sun, 25 Oct 2026 02:08 AM IST
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संभल। शासन स्तर से जिम्मेदारी तय होने के बाद वन विभाग ने बंदरों को पकड़ने की तैयारी की है।
हालांकि, इस बाबत अभी आदेश नहीं मिला है लेकिन तैयारी शुरू कर दी गई है। जिम्मेदारी तय होने का सीधी राहत बंदरों से परेशान लोगों को मिलेगा, क्योंकि जहां भी ज्यादा बंदर होंगे, वहां वन विभाग बिना किसी अड़चन पकड़ने का काम करेगा।
दरअसल, बंदरों की समस्या सिर्फ शहरी क्षेत्र में ही नहीं, बल्कि पूरे जिले में बनी हुई है। बंदरों के आतंक की शिकायतें इन दिनों आम बात है। आलम यह है कि शहर से लेकर दूरदराज गांवों तक लोग दहशत में जीने को मजबूर हैं। वहीं, यदि जिला अस्पताल के आंकड़े देखे जाएं तो चौंकाने वाले हैं। हर दिन 10-15 मरीज रैबीज लगवाने पहुंचते हैं। इसका औसत लगाया जाए तो एक माह में यह संख्या 450 के करीब पहुंचती है। इसमें खासकर छोटे बच्चे और बुजुर्ग ज्यादा रहते हैं। अब शासन स्तर पर तय हुआ है कि बंदर वन्यजीव है। जिसकी प्रवृत्ति पालतू पशुओं के समान नहीं है।
इसके प्रबंधन व रखरखाव पालिका के पास नहीं है। बंदरों को पकड़ने व वापस वन में छोड़ने का जिम्मा वन विभाग का है। ऐसे में बंदरों को पकड़ने तथा प्रबंधन की कार्रवाई पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग को दी जाती है। इसके लिए वन विभाग को एक महीने के अंदर समेकित कार्ययोजना बना लेने और जरूरत के हिसाब से अन्य विभागों की सहायता लेने के निर्देश दिए गए हैं। इस निर्देश के बाद वन विभाग ने काम शुरू किया है।
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हालांकि, इस बाबत अभी आदेश नहीं मिला है लेकिन तैयारी शुरू कर दी गई है। जिम्मेदारी तय होने का सीधी राहत बंदरों से परेशान लोगों को मिलेगा, क्योंकि जहां भी ज्यादा बंदर होंगे, वहां वन विभाग बिना किसी अड़चन पकड़ने का काम करेगा।
दरअसल, बंदरों की समस्या सिर्फ शहरी क्षेत्र में ही नहीं, बल्कि पूरे जिले में बनी हुई है। बंदरों के आतंक की शिकायतें इन दिनों आम बात है। आलम यह है कि शहर से लेकर दूरदराज गांवों तक लोग दहशत में जीने को मजबूर हैं। वहीं, यदि जिला अस्पताल के आंकड़े देखे जाएं तो चौंकाने वाले हैं। हर दिन 10-15 मरीज रैबीज लगवाने पहुंचते हैं। इसका औसत लगाया जाए तो एक माह में यह संख्या 450 के करीब पहुंचती है। इसमें खासकर छोटे बच्चे और बुजुर्ग ज्यादा रहते हैं। अब शासन स्तर पर तय हुआ है कि बंदर वन्यजीव है। जिसकी प्रवृत्ति पालतू पशुओं के समान नहीं है।
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इसके प्रबंधन व रखरखाव पालिका के पास नहीं है। बंदरों को पकड़ने व वापस वन में छोड़ने का जिम्मा वन विभाग का है। ऐसे में बंदरों को पकड़ने तथा प्रबंधन की कार्रवाई पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग को दी जाती है। इसके लिए वन विभाग को एक महीने के अंदर समेकित कार्ययोजना बना लेने और जरूरत के हिसाब से अन्य विभागों की सहायता लेने के निर्देश दिए गए हैं। इस निर्देश के बाद वन विभाग ने काम शुरू किया है।
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