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Sambhal News: आयोग ने संभल में सन 48 के दंगे के लिए विधायक के पिता नवाब महमूद को जिम्मेदार बताया

Moradabad  Bureau मुरादाबाद ब्यूरो
Updated Sun, 09 Aug 2026 02:04 AM IST
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The commission held the MLA's father, Nawab Mahmood, responsible for the 1948 riots in Sambhal.
संभल। 24 नवंबर 2024 के संभल बवाल की न्यायिक आयोग की जांच रिपोर्ट में पूर्व के दंगों का भी उल्लेख है। सन 1948 में हुए दंगे के हवाले से सपा विधायक इकबाल महमूद के दिवंगत पिता नवाब महमूद हसन खान की भूमिका पर रिपोर्ट में बड़ा सवाल उठाया गया है। कहा गया है कि सन
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48 के दंगे को नवाब महमूद हसन खान ने भड़कवाया था। उन्होंने हिंदुओं पर खुद बनवाई तोप से हमले की तैयारी की थी, जिसको एजेंटी तिराहे पर रखा गया था लेकिन हिंदुओं के प्रतिरोध के चलते हमला नहीं कर सके थे।
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सूत्र बताते हैं कि न्यायिक जांच आयोग की रिपोर्ट में लिखा है कि 1948 के दंगों की हिंसा के बाद 20 दिनों से अधिक समय तक शहर में कर्फ्यू रहा था। इस दंगे में छह हिंदुओं की जान गई थी। दंगे बड़े नवाब महमूद हसन खान (वर्तमान विधायक इकबाल महमूद के पिता) द्वारा भड़काए गए थे, जिन्होंने गोलीबारी शुरू कराई। संभल के हातिम सराय में कटरा बाजार में सांप्रदायिक झड़पें हुई थीं, जहां छह हिंदुओं की जान चली गई थी। नवाब महमूद ने अनवर मिस्त्री (जिनके बेटे मुख्तियार अब हिंद इंटर कॉलेज के पास एक वर्कशॉप चलाते हैं) से एक अस्थायी तोप बनवाई थी।
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बता दें कि नवाब महमूद हसन पुराने दौर में लंबे समय संभल की सक्रिय राजनीति का हिस्सा रहे थे। उन्हें 1957, 1962, 1967 में संभल से विधायक चुना गया था। मौजूदा विधायक इकबाल महमूद उनकी सियासी विरासत आगे बढ़ाते हुए सपा शासन में यूपी के मंत्री पद तक भी पहुंच चुके हैं। यहां यह भी उल्लेखनीय है कि आयोग की रिपोर्ट में जहां नवाब महमूद हसन को सन 48 के दंगों का जिम्मेदार ठहराया गया है, वहीं उनके पौत्र और विधायक इकबाल के बेटे सुहेल इकबाल की भूमिका 24 नवंबर 2024 के बवाल में बताई गई है।

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अलग-अलग दंगों में 183 हिंदुओं की हत्याएं हुई थीं
न्यायिक जांच आयोग ने अपनी रिपोर्ट में 1936 में हुए संभल के सबसे पहले दंगे से लेकर 2001 के आखिरी दंगे तक 183 हिंदुओं की हत्याएं होने की बात कही है। रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया है कि किस दंगे में कितने लोगों की जान गई और किस तरह से वह दंगा फैला था। 1978 के दंगे में सबसे ज्यादा जान जाने का उल्लेख किया गया है। इसमें हिंदू पलायन और हिंदू आबादी के घटने की बात भी शामिल है। साथ ही धर्मस्थलों पर अतिक्रमण और कब्जे होने का भी उल्लेख किया गया है।



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इन वर्षों में सुलगा संभल

संभल में 1936, 1947, 1948, 1953, 1958, 1962, 1976, 1978, 1980, 1990, 1992, 1995, 2001 में दंगे हुए थे। इसके अलावा वर्ष 2019 में सीएए के विरोध और 2024 में जामा मस्जिद सर्वे के दौरान पुलिस-प्रशासन और भीड़ के बीच संघर्ष हुआ था। 2019 के संघर्ष में दो लोगों की मौत हुई थी। 2024 के बवाल में पांच लोगों की जान गई थी।
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