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Sant Kabir Nagar News: कोपिया और तामा के विकास पर खर्च होंगे 2041.49 लाख रुपये
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कोपिया में झाड़ियों से घिरा बुद्ध टीला। संवाद
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संतकबीरनगर। जिले की पहचान संतकबीर और महात्मा बुद्ध से होती है। संतकबीर की परिनिर्वाण स्थली पर पर्यटन की दृष्टि से कई विकास कार्य कराए गए हैं, लेकिन भगवान बुद्ध से जुड़े स्थलों की उपेक्षा बनी रही, लेकिन शासन ने अब महात्मा बुद्ध से जुड़े स्थल के विकास की सुध ली है।
इसमें कोपिया प्रमुख रूप से शामिल है। इसके अलावा तामा (तामेश्वरनाथ) का भी विकास किया जाएगा। दोनों स्थलों के लिए 2041.49 लाख रुपये की मंजूरी प्रदान की गई है। इससे इन दाेनों स्थलों पर पर्यटन विकास के कार्य कराए जाएंगे। इससे आसपास के क्षेत्र का जहां विकास होगा, वहीं लोगों को रोजगार के अवसर मिलेंगे।
जिला मुख्यालय से करीब 12 किलोमीटर दूर स्थित कोपिया बौद्ध टीला है। सरकार ने कोपिया के प्राचीन टीले को 1978 में राज्य संरक्षित स्थल घोषित किया था। यह टीला करीब 20 एकड़ के क्षेत्रफल में फैला है। लोगों का कहना है कि सिद्धार्थ से गौतम बुद्ध बनने की शुरुआत यहीं से हुई।
टीले के विषय में मान्यता है कि राजकुमार सिद्धार्थ दुख के कारण, निवारण और शांति के लिए राजमहल को छोड़कर अपने अश्व और सारथी के साथ कोपिया टीले पर ही पहुंचे थे। उन्होंने आमी नदी में स्नान कर राजसी वस्त्र त्याग कर संयासी का रूप धारण किया था। आभूषण व राजसी सामान सारथी को देकर राजमहल भेज दिया था और ज्ञान की खोज में निकले।
इस टीले पर इंग्लैड, अमेरिका आदि देश के प्रोफेसर रिसर्च कर कर चुके हैं। वर्ष 2003- 04 में एशिया के मशहूर सेंटर डेकेन यूनिवर्सिटी पूर्ण महाराष्ट्र के प्रोफेसर आलोक कुमार ने लगातार पांच दिनों तक रिसर्च के दौरान टीले की खोदाई कराई। इस दौरान बौद्ध कालीन सिक्के, गौतम बुद्ध की मूर्ति, शीशा, तांबे की चूड़िया, चांदी के सिक्के आदि अवशेष प्राप्त हुए थे।
अब इस टीले को पर्यटन की दृष्टि से विकसित करने की पहल की गई है। जहां इंटरलाॅकिंग, बैठने के लिए बेंच, पथ प्रकाश की व्यवस्था आदि कार्य कराए जाएंगे।
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तामा उर्फ तामेश्वरनाथ के विकास की सीएम कर चुके हैं घोषणा
पिछले साल मई में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने तामेश्वरनाथ धाम को कॉरिडोर के रूप में विकसित करने की घोषणा की थी। यहां वर्तमान में महुई से तामेश्वरनाथ जाने वाली सड़क के चौड़ीकरण का कार्य चल रहा है, जबकि खलीलाबाद-धनघटा मार्ग से तामेश्वरनाथ धाम जाने वाले मार्ग के फोरलेन के लिए भी भूमि के अधिग्रहण की प्रक्रिया चल रही है। इसके साथ ही यहां सर्वे कराया गया है और डीपीआर बनाकर शासन को भेजा गया।
खलीलाबाद मुख्यालय से करीब आठ किलोमीटर दूर धनघटा मार्ग पर ऐतिहासिक शिव मंदिर बाबा तामेश्वरनाथ धाम स्थित है। यह शिव मंदिर हिंदुओं के लिए आस्था का केंद्र है। बौद्ध धर्म के अनुयायियों के लिए यह तीर्थ स्थल के रूप में जाना जाता है। मान्यता है कि यहां अज्ञातवास के दौरान पांडवों ने कुछ दिनों तक निवास किया था।
इसी दौरान माता कुंती ने प्राकृतिक रूप से बने शिवलिंग की पूजा की थी। तभी से यहां पूजा अर्चना की जाती है। मान्यता यह भी है कि यहां गौतम बुद्ध ने मुंडन कराया था।
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कोपिया और तामा के विकास के लिए शासन ने 2041.49 लाख रुपये का बजट स्वीकृत किया है। इससे यहां पर्यटन विकास के कार्य कराए जाएंगे। जल्द ही कार्य शुरू हो जाएगा।
-विकास नारायण, क्षेत्रीय पर्यटन अधिकारी
इसमें कोपिया प्रमुख रूप से शामिल है। इसके अलावा तामा (तामेश्वरनाथ) का भी विकास किया जाएगा। दोनों स्थलों के लिए 2041.49 लाख रुपये की मंजूरी प्रदान की गई है। इससे इन दाेनों स्थलों पर पर्यटन विकास के कार्य कराए जाएंगे। इससे आसपास के क्षेत्र का जहां विकास होगा, वहीं लोगों को रोजगार के अवसर मिलेंगे।
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जिला मुख्यालय से करीब 12 किलोमीटर दूर स्थित कोपिया बौद्ध टीला है। सरकार ने कोपिया के प्राचीन टीले को 1978 में राज्य संरक्षित स्थल घोषित किया था। यह टीला करीब 20 एकड़ के क्षेत्रफल में फैला है। लोगों का कहना है कि सिद्धार्थ से गौतम बुद्ध बनने की शुरुआत यहीं से हुई।
टीले के विषय में मान्यता है कि राजकुमार सिद्धार्थ दुख के कारण, निवारण और शांति के लिए राजमहल को छोड़कर अपने अश्व और सारथी के साथ कोपिया टीले पर ही पहुंचे थे। उन्होंने आमी नदी में स्नान कर राजसी वस्त्र त्याग कर संयासी का रूप धारण किया था। आभूषण व राजसी सामान सारथी को देकर राजमहल भेज दिया था और ज्ञान की खोज में निकले।
इस टीले पर इंग्लैड, अमेरिका आदि देश के प्रोफेसर रिसर्च कर कर चुके हैं। वर्ष 2003- 04 में एशिया के मशहूर सेंटर डेकेन यूनिवर्सिटी पूर्ण महाराष्ट्र के प्रोफेसर आलोक कुमार ने लगातार पांच दिनों तक रिसर्च के दौरान टीले की खोदाई कराई। इस दौरान बौद्ध कालीन सिक्के, गौतम बुद्ध की मूर्ति, शीशा, तांबे की चूड़िया, चांदी के सिक्के आदि अवशेष प्राप्त हुए थे।
अब इस टीले को पर्यटन की दृष्टि से विकसित करने की पहल की गई है। जहां इंटरलाॅकिंग, बैठने के लिए बेंच, पथ प्रकाश की व्यवस्था आदि कार्य कराए जाएंगे।
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तामा उर्फ तामेश्वरनाथ के विकास की सीएम कर चुके हैं घोषणा
पिछले साल मई में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने तामेश्वरनाथ धाम को कॉरिडोर के रूप में विकसित करने की घोषणा की थी। यहां वर्तमान में महुई से तामेश्वरनाथ जाने वाली सड़क के चौड़ीकरण का कार्य चल रहा है, जबकि खलीलाबाद-धनघटा मार्ग से तामेश्वरनाथ धाम जाने वाले मार्ग के फोरलेन के लिए भी भूमि के अधिग्रहण की प्रक्रिया चल रही है। इसके साथ ही यहां सर्वे कराया गया है और डीपीआर बनाकर शासन को भेजा गया।
खलीलाबाद मुख्यालय से करीब आठ किलोमीटर दूर धनघटा मार्ग पर ऐतिहासिक शिव मंदिर बाबा तामेश्वरनाथ धाम स्थित है। यह शिव मंदिर हिंदुओं के लिए आस्था का केंद्र है। बौद्ध धर्म के अनुयायियों के लिए यह तीर्थ स्थल के रूप में जाना जाता है। मान्यता है कि यहां अज्ञातवास के दौरान पांडवों ने कुछ दिनों तक निवास किया था।
इसी दौरान माता कुंती ने प्राकृतिक रूप से बने शिवलिंग की पूजा की थी। तभी से यहां पूजा अर्चना की जाती है। मान्यता यह भी है कि यहां गौतम बुद्ध ने मुंडन कराया था।
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कोपिया और तामा के विकास के लिए शासन ने 2041.49 लाख रुपये का बजट स्वीकृत किया है। इससे यहां पर्यटन विकास के कार्य कराए जाएंगे। जल्द ही कार्य शुरू हो जाएगा।
-विकास नारायण, क्षेत्रीय पर्यटन अधिकारी