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Sant Kabir Nagar News: नियारा की राख से राजस्थान में बनाई जाती हैं मूर्तियां
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गौरा गांव में रखी गई नियारा राख। संवाद
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मेंहदावल। नियारा की राख से निकला सोना बनाने का कच्चा माल बखिरा से राजस्थान तक भेजा जाता है। आलम यह है कि नेपाल और देश के अन्य राज्यों से राख मंगाकर उसे चालने के बाद कच्चे माल से सोना, चांदी और अन्य कीमती धातुएं बनाने का काम यहां करीब चार दशक से भी अधिक समय से किया जा रहा है। सफाई के बाद भी बची राख राजस्थान भेजी जाती है, जिससे वहां मूर्तियां बनाई जाती हैं।
बखिरा नगर पंचायत क्षेत्र के लडुवा महुवा, अमरडोभा, गौरा, हारापट्टी, झुंगिया और सईबुजुर्ग गांव में नियारा की रख का कारोबार होता है। नियारा की राख मंगाने के बाद उसे चाल कर साफ किया जाता है, फिर सोना-चांदी और अन्य कीमती सामान बनाने वाली धातुएं अलग की जाती हैं।
इस कारोबार से जुड़े लोग नेपाल, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल और मध्य प्रदेश सहित देश के अन्य राज्यों से सर्राफा कारोबारियों की दुकानों की धूल और राख खरीद कर यहां मांगते हैं। इसके बाद पोखरे के किनारे एक खास तरह की चलनी से इसकी धुलाई करते हैं। एक टन राख घटकर जब चार से पांच किलोग्राम रह जाती है तो रसायनों का इस्तेमाल कर इसे भट्ठी में गलाया जाता है और फिर इसके बाद सोना-चांदी और अन्य कीमती धातुएं अलग की जाती हैं। कम मात्रा में निकली धातु भी हजारों से लाखों की कीमत तक की होती है।
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यह काम बखिरा इलाके में चार दशक से भी अधिक समय से हो रहा है लेकिन अभी तक इसके वैधानिक पहलुओं पर प्रशासन की नजर नहीं पड़ी है। बता दें कि क्षेत्र के इन गांवों में नियारा की राख की धुलाई करते लोग रोज देखते हैं। इस काम में जुटे लोग और मजदूर सुबह से शाम तक राख को पानी में धोकर उसमें मौजूद भारी कणों को अलग करते हैं।
राख की मात्रा कम होने के बाद बची सामग्री को भट्ठी में गलाया जाता है। इसी प्रक्रिया में सोने, चांदी समेत अन्य धातुएं अलग की जाती हैं। लेडुवा महुवा पावर हाउस और झुंगिया सड़क पर आबादी के पास नियारा राख के अवशेष को गलाने वाली कई भट्ठियां चलती हैं।
स्थानीय लोगों के मुताबिक नियारा को गलाने में रासायनिक पदार्थों का इस्तेमाल होता है। क्षेत्र के लोगों का कहना है कि नियारा की राख भी खरीद कर व्यापारी राजस्थान ले जाते हैं। वहां आधुनिक मशीनों से इस राख को चाला जाता है, जिससे सोना चांदी के कण तलाशे जाते हैं। इसके बाद बची हुई राख का मूर्ति बनाने में प्रयोग किया जाता है।
मोहम्मद अहमद, अली हुसैन, खलील अहमद, मोहम्मद रफी आदि ने बताया कि राख से सोने-चांदी निकालने के बाद राख से राजस्थान में मूर्तियां बनाने में प्रयोग किया जाता है। इससे किस तरह की मूर्तियां बनाई जाती हैं, इस बारे में उन्हें जानकारी नहीं है।
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सोनौली में पकड़ा गया था बखिरा आ रहा नियारा लदा ट्रक
भारत-नेपाल बॉर्डर के सोनौली में नेपाल से नियारा की राख लेकर आ रहे एक ट्रक को पकड़ा गया था। आठ अगस्त की रात सनौली में कस्टम और एसएसबी की टीम ने नेपाल से बखिरा आ रहे ट्रक को पकड़ा था। ट्रक पर करीब 13.62 टन नियारा लदा हुआ पाया गया। ट्रक में सवार बहराइच निवासी मोहम्मद कामरान और बखिरा थाना क्षेत्र के लेडुवा महुआ निवासी शरीफ अहमद को हिरासत में लिया गया। पूछताछ में दोनों नियारा को बखिरा निवासी आफताब आलम का बताया था। कस्टम विभाग ने ट्रक और नियारा को जब्त कर लिया था।
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अमरडोभा में राख खरीदने आए थे राजस्थानी व्यापारी
मेंहदावल। बखिरा थाना क्षेत्र के अमरडोभा स्थित पावर हाउस के बगल तालाब में लंबे समय से नियारा की राख चालने का काम होता रहा है। राजस्थान में इस व्यवसाय से जुड़े कुछ व्यापारियों की निगाह इस राख पर पड़ी तो उसका परीक्षण कराया था। परीक्षण में काम के अनुरूप राख होने के नाते उसके खरीद का काम शुरू हो गया। तीन वर्ष पूर्व यहां आए व्यापारियों को नगर पंचायत प्रशासन ने राख ले जाने की अनुमति नहीं दी। इसके बाद व्यापारी लौट गए।
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नियारा की राख से फैल रहा प्रदूषण
नियारा राख से प्रदूषण भी फैल रहा है। भट्ठियों से धुआं निकलने से लोग परेशान हैं। स्थानीय रामकुमार, बसंत कुमार, दीनदयाल, मुमताज अहमद, गुजराती, रवि कुमार, संतोष, जमाल अहमद आदि का कहना है कि गर्मी के मौसम में जब तेज हवा चलती है तो यह राख उड़कर लोगों के आंखों में भी पड़ती है। नियारा राख के कारोबार से जुड़े लोगों की भट्ठियां 24 घंटे धधकती हैं, जिससे बड़े पैमाने पर धुंआ होता है और वातावरण प्रदूषित हो रहा है। प्रदूषण फैलाने वालों के विरुद्ध कार्रवाई होनी चाहिए।
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नियारा राख के कारोबार एवं भट्ठियों के संचालन के बारे में संबंधित विभाग से जानकारी मांगी जाएगी। यदि नियम विरुद्ध इसका संचालन होता पाया जाएगा तो संबंधित के विरुद्ध कार्रवाई सुनिश्चित कराई जाएगी।
-सर्वदमन सिंह, सीओ
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नियारा की राख कहां से मंगाई जा रही है, क्षेत्र में इसका क्या इस्तेमाल हो रहा है। इस बारे में पूरी जानकारी हासिल कर जांच कराई जाएगी।
-सीमा राय, अधिशासी अधिकारी, नगर पंचायत, बखिरा
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बखिरा नगर पंचायत क्षेत्र के लडुवा महुवा, अमरडोभा, गौरा, हारापट्टी, झुंगिया और सईबुजुर्ग गांव में नियारा की रख का कारोबार होता है। नियारा की राख मंगाने के बाद उसे चाल कर साफ किया जाता है, फिर सोना-चांदी और अन्य कीमती सामान बनाने वाली धातुएं अलग की जाती हैं।
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इस कारोबार से जुड़े लोग नेपाल, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल और मध्य प्रदेश सहित देश के अन्य राज्यों से सर्राफा कारोबारियों की दुकानों की धूल और राख खरीद कर यहां मांगते हैं। इसके बाद पोखरे के किनारे एक खास तरह की चलनी से इसकी धुलाई करते हैं। एक टन राख घटकर जब चार से पांच किलोग्राम रह जाती है तो रसायनों का इस्तेमाल कर इसे भट्ठी में गलाया जाता है और फिर इसके बाद सोना-चांदी और अन्य कीमती धातुएं अलग की जाती हैं। कम मात्रा में निकली धातु भी हजारों से लाखों की कीमत तक की होती है।
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यह काम बखिरा इलाके में चार दशक से भी अधिक समय से हो रहा है लेकिन अभी तक इसके वैधानिक पहलुओं पर प्रशासन की नजर नहीं पड़ी है। बता दें कि क्षेत्र के इन गांवों में नियारा की राख की धुलाई करते लोग रोज देखते हैं। इस काम में जुटे लोग और मजदूर सुबह से शाम तक राख को पानी में धोकर उसमें मौजूद भारी कणों को अलग करते हैं।
राख की मात्रा कम होने के बाद बची सामग्री को भट्ठी में गलाया जाता है। इसी प्रक्रिया में सोने, चांदी समेत अन्य धातुएं अलग की जाती हैं। लेडुवा महुवा पावर हाउस और झुंगिया सड़क पर आबादी के पास नियारा राख के अवशेष को गलाने वाली कई भट्ठियां चलती हैं।
स्थानीय लोगों के मुताबिक नियारा को गलाने में रासायनिक पदार्थों का इस्तेमाल होता है। क्षेत्र के लोगों का कहना है कि नियारा की राख भी खरीद कर व्यापारी राजस्थान ले जाते हैं। वहां आधुनिक मशीनों से इस राख को चाला जाता है, जिससे सोना चांदी के कण तलाशे जाते हैं। इसके बाद बची हुई राख का मूर्ति बनाने में प्रयोग किया जाता है।
मोहम्मद अहमद, अली हुसैन, खलील अहमद, मोहम्मद रफी आदि ने बताया कि राख से सोने-चांदी निकालने के बाद राख से राजस्थान में मूर्तियां बनाने में प्रयोग किया जाता है। इससे किस तरह की मूर्तियां बनाई जाती हैं, इस बारे में उन्हें जानकारी नहीं है।
सोनौली में पकड़ा गया था बखिरा आ रहा नियारा लदा ट्रक
भारत-नेपाल बॉर्डर के सोनौली में नेपाल से नियारा की राख लेकर आ रहे एक ट्रक को पकड़ा गया था। आठ अगस्त की रात सनौली में कस्टम और एसएसबी की टीम ने नेपाल से बखिरा आ रहे ट्रक को पकड़ा था। ट्रक पर करीब 13.62 टन नियारा लदा हुआ पाया गया। ट्रक में सवार बहराइच निवासी मोहम्मद कामरान और बखिरा थाना क्षेत्र के लेडुवा महुआ निवासी शरीफ अहमद को हिरासत में लिया गया। पूछताछ में दोनों नियारा को बखिरा निवासी आफताब आलम का बताया था। कस्टम विभाग ने ट्रक और नियारा को जब्त कर लिया था।
अमरडोभा में राख खरीदने आए थे राजस्थानी व्यापारी
मेंहदावल। बखिरा थाना क्षेत्र के अमरडोभा स्थित पावर हाउस के बगल तालाब में लंबे समय से नियारा की राख चालने का काम होता रहा है। राजस्थान में इस व्यवसाय से जुड़े कुछ व्यापारियों की निगाह इस राख पर पड़ी तो उसका परीक्षण कराया था। परीक्षण में काम के अनुरूप राख होने के नाते उसके खरीद का काम शुरू हो गया। तीन वर्ष पूर्व यहां आए व्यापारियों को नगर पंचायत प्रशासन ने राख ले जाने की अनुमति नहीं दी। इसके बाद व्यापारी लौट गए।
नियारा की राख से फैल रहा प्रदूषण
नियारा राख से प्रदूषण भी फैल रहा है। भट्ठियों से धुआं निकलने से लोग परेशान हैं। स्थानीय रामकुमार, बसंत कुमार, दीनदयाल, मुमताज अहमद, गुजराती, रवि कुमार, संतोष, जमाल अहमद आदि का कहना है कि गर्मी के मौसम में जब तेज हवा चलती है तो यह राख उड़कर लोगों के आंखों में भी पड़ती है। नियारा राख के कारोबार से जुड़े लोगों की भट्ठियां 24 घंटे धधकती हैं, जिससे बड़े पैमाने पर धुंआ होता है और वातावरण प्रदूषित हो रहा है। प्रदूषण फैलाने वालों के विरुद्ध कार्रवाई होनी चाहिए।
नियारा राख के कारोबार एवं भट्ठियों के संचालन के बारे में संबंधित विभाग से जानकारी मांगी जाएगी। यदि नियम विरुद्ध इसका संचालन होता पाया जाएगा तो संबंधित के विरुद्ध कार्रवाई सुनिश्चित कराई जाएगी।
-सर्वदमन सिंह, सीओ
नियारा की राख कहां से मंगाई जा रही है, क्षेत्र में इसका क्या इस्तेमाल हो रहा है। इस बारे में पूरी जानकारी हासिल कर जांच कराई जाएगी।
-सीमा राय, अधिशासी अधिकारी, नगर पंचायत, बखिरा