{"_id":"698cc6940eadb2f71e0857a5","slug":"the-accused-maulana-is-in-britain-the-report-is-filed-in-azamgarh-khalilabad-news-c-209-1-skn1001-145846-2026-02-11","type":"story","status":"publish","title_hn":"Sant Kabir Nagar News: ब्रिटेन में है आरोपी मौलाना, आजमगढ़ में दर्ज है रिपोर्ट","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Sant Kabir Nagar News: ब्रिटेन में है आरोपी मौलाना, आजमगढ़ में दर्ज है रिपोर्ट
विज्ञापन
घर के बाहर तैनात सी आर पी के जवान। संवाद
विज्ञापन
- मदरसा ध्वस्त करने का डीएम कोर्ट में चल रहा है मामला
- एसडीएम न्यायालय से मदरसा ध्वस्तीकरण का हो चुका है आदेश
संवाद न्यूज एजेंसी
संतकबीरनगर। मौलाना शमशुल हुदा खान विदेश में है, और उसके व परिवार पर दिन प्रतिदिन कानूनी शिकंजा कसता जा रहा है। करोड़ों रुपये से बना मदरसा ध्वस्त करने के एसडीएम न्यायालय से हुए आदेश के बाद मामला डीएम कोर्ट में चल रहा है। मौलाना के बेटे तौसीफ रजा ने इस मामले में हाईकोर्ट की भी शरण ली है। जिस पर कोर्ट ने चार सप्ताह के लिए रोक लगाकर इसके भीतर ही मामले का निस्तारण करने का आदेश कोर्ट को दिया है। वहीं आजमगढ़ में भी मौलाना के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज है।
ब्रिटिश नागरिकता वर्ष 2013 में पाने के बाद मौलाना शमशुल हुदा का ज्यादातर समय विदेश में ही व्यतीत होता है। मदरसे के अभिलेख में वह यहां 2023 तक प्रबंध कमेटी में सरपरस्त बना रहा। वर्ष 2021 में मामला खुलने के बाद उसने बेटे को प्रबंध कमेटी में दर्ज करा दिया। इसके बाद से ही वह ब्रिटेन में बैठकर अपने बेटे के माध्यम से मदरसे व अन्य कामकाज देखता रहा है। एटीएस वाराणसी की जांच रिपोर्ट में उसकी गतिविधियां संदिग्ध पाई गईं, जिसके बाद उसके खिलाफ प्रशासनिक शिकंजा कसने लगा।
जिला प्रशासन ने दोहरी नागरिकता के बाद खलीलाबाद शहर में खरीदी गई जमीन को राज्य सरकार के खाते में निहित कर दी। वहीं उसी जमीन पर चल रहे मदरसे में सरकारी ताला लग गया और अब मदरसे पर धवस्तीकरण की कार्रवाई चल रही है।
-- -- -- -- -- -- --
आजमगढ़ में प्रबंधक ने दर्ज कराई रिपोर्ट
वर्ष 2013 में ब्रिटेन की नागरिकता पाने के बाद मौलाना शमशुल हुदा खान 2017 तक मदरसे से आलिया सेक्शन के शिक्षक के रूप में वेतन लेता रहा। इसके बाद विभाग की मिलीभगत से उसने स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति भी ले ली। मदरसा दारुल उलूम अहले सुन्नत मदरसा अशरफिया मिसबाहुल उलूम मुबारकपुर आजमगढ़ के प्रबंधक सरफराज अहमद की तहरीर पर 16 लाख 59 हजार 555 रुपये सरकारी धनराशि प्राप्त करने के मामले में प्राथमिकी दर्ज हुई थी। वहीं खलीलाबाद कोतवाली में भी दो प्राथमिकी दर्ज है। पूर्व में दर्ज एक प्राथमिकी में आरोप पत्र न्यायालय भेजे जा चुके हैं। फेमा के तहत दर्ज रिपोर्ट में अभी विवेचना चल रही है।
Trending Videos
- एसडीएम न्यायालय से मदरसा ध्वस्तीकरण का हो चुका है आदेश
संवाद न्यूज एजेंसी
संतकबीरनगर। मौलाना शमशुल हुदा खान विदेश में है, और उसके व परिवार पर दिन प्रतिदिन कानूनी शिकंजा कसता जा रहा है। करोड़ों रुपये से बना मदरसा ध्वस्त करने के एसडीएम न्यायालय से हुए आदेश के बाद मामला डीएम कोर्ट में चल रहा है। मौलाना के बेटे तौसीफ रजा ने इस मामले में हाईकोर्ट की भी शरण ली है। जिस पर कोर्ट ने चार सप्ताह के लिए रोक लगाकर इसके भीतर ही मामले का निस्तारण करने का आदेश कोर्ट को दिया है। वहीं आजमगढ़ में भी मौलाना के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज है।
ब्रिटिश नागरिकता वर्ष 2013 में पाने के बाद मौलाना शमशुल हुदा का ज्यादातर समय विदेश में ही व्यतीत होता है। मदरसे के अभिलेख में वह यहां 2023 तक प्रबंध कमेटी में सरपरस्त बना रहा। वर्ष 2021 में मामला खुलने के बाद उसने बेटे को प्रबंध कमेटी में दर्ज करा दिया। इसके बाद से ही वह ब्रिटेन में बैठकर अपने बेटे के माध्यम से मदरसे व अन्य कामकाज देखता रहा है। एटीएस वाराणसी की जांच रिपोर्ट में उसकी गतिविधियां संदिग्ध पाई गईं, जिसके बाद उसके खिलाफ प्रशासनिक शिकंजा कसने लगा।
विज्ञापन
विज्ञापन
जिला प्रशासन ने दोहरी नागरिकता के बाद खलीलाबाद शहर में खरीदी गई जमीन को राज्य सरकार के खाते में निहित कर दी। वहीं उसी जमीन पर चल रहे मदरसे में सरकारी ताला लग गया और अब मदरसे पर धवस्तीकरण की कार्रवाई चल रही है।
आजमगढ़ में प्रबंधक ने दर्ज कराई रिपोर्ट
वर्ष 2013 में ब्रिटेन की नागरिकता पाने के बाद मौलाना शमशुल हुदा खान 2017 तक मदरसे से आलिया सेक्शन के शिक्षक के रूप में वेतन लेता रहा। इसके बाद विभाग की मिलीभगत से उसने स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति भी ले ली। मदरसा दारुल उलूम अहले सुन्नत मदरसा अशरफिया मिसबाहुल उलूम मुबारकपुर आजमगढ़ के प्रबंधक सरफराज अहमद की तहरीर पर 16 लाख 59 हजार 555 रुपये सरकारी धनराशि प्राप्त करने के मामले में प्राथमिकी दर्ज हुई थी। वहीं खलीलाबाद कोतवाली में भी दो प्राथमिकी दर्ज है। पूर्व में दर्ज एक प्राथमिकी में आरोप पत्र न्यायालय भेजे जा चुके हैं। फेमा के तहत दर्ज रिपोर्ट में अभी विवेचना चल रही है।
