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Sant Kabir Nagar News: सील वाटर प्लांट से हो रही जलापूर्ति
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धनघटा। क्षेत्र के दो स्थानों पर स्थित वाटर बॉटलिंग प्लांट का खाद्य सुरक्षा विभाग द्वारा लाइसेंस निलंबित कर सील किए जाने के बावजूद चोरी-छिपे संचालित किए जाने का मामला प्रकाश में आया है। क्षेत्र के लोगों का आरोप है कि प्लांट रात में चलाया जा रहा है और बोतलबंद पानी की आपूर्ति पूरे इलाके में की जा रही है।
क्षेत्र के लालजी, सुभाष चंद्र, साधु, रामरतन, अनिल कुमार आदि का कहना है कि खाद्य सुरक्षा विभाग ने कुछ समय पूर्व प्लांट से पानी के नमूने जांच के लिए प्रयोगशाला भेजे थे। जांच रिपोर्ट में पानी में ई-कोलाई बैक्टीरिया पाए जाने की पुष्टि हुई थी, जिसके बाद विभाग ने कड़ी कार्रवाई करते हुए प्लांट का लाइसेंस निलंबित कर दिया और प्लांट सील कर दिया था।
साथ ही प्लांट से पानी वितरण पर पूरी रोक लगाने के निर्देश दिए गए थे। इसके बावजूद प्लांट पूरी तरह बंद नहीं हुआ है। आरोप है कि देर रात में प्लांट के अंदर मशीनें चलती हैं, और सुबह होते ही पानी की बाजार में पहुंच जाता है। कई दुकानों और ठेलों पर अभी भी इसी प्लांट का पानी बिकता देखा जा रहा है।
ग्रामीणों और व्यापारियों का कहना है कि जब पानी की जांच में खतरनाक बैक्टीरिया मिल चुका है, फिर भी इसका वितरण जारी रहना जनस्वास्थ्य के साथ गंभीर खिलवाड़ है। लोगों ने यह भी आरोप लगाया कि यदि विभाग के अधिकारी सख्ती से निगरानी करते तो सील प्लांट दोबारा चालू नहीं हो पाता।
क्षेत्र के लोगों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए। सहायक आयुक्त खाद्य एवं औषधि प्रशासन सतीश कुमार ने बताया कि सील किए गए वाटर प्लांट को खोला नहीं गया है। अगर कहीं से चोरी-चुपके वाटर की सप्लाई की जा रही है, तो कार्रवाई की जाएगी।
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क्षेत्र के लालजी, सुभाष चंद्र, साधु, रामरतन, अनिल कुमार आदि का कहना है कि खाद्य सुरक्षा विभाग ने कुछ समय पूर्व प्लांट से पानी के नमूने जांच के लिए प्रयोगशाला भेजे थे। जांच रिपोर्ट में पानी में ई-कोलाई बैक्टीरिया पाए जाने की पुष्टि हुई थी, जिसके बाद विभाग ने कड़ी कार्रवाई करते हुए प्लांट का लाइसेंस निलंबित कर दिया और प्लांट सील कर दिया था।
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साथ ही प्लांट से पानी वितरण पर पूरी रोक लगाने के निर्देश दिए गए थे। इसके बावजूद प्लांट पूरी तरह बंद नहीं हुआ है। आरोप है कि देर रात में प्लांट के अंदर मशीनें चलती हैं, और सुबह होते ही पानी की बाजार में पहुंच जाता है। कई दुकानों और ठेलों पर अभी भी इसी प्लांट का पानी बिकता देखा जा रहा है।
ग्रामीणों और व्यापारियों का कहना है कि जब पानी की जांच में खतरनाक बैक्टीरिया मिल चुका है, फिर भी इसका वितरण जारी रहना जनस्वास्थ्य के साथ गंभीर खिलवाड़ है। लोगों ने यह भी आरोप लगाया कि यदि विभाग के अधिकारी सख्ती से निगरानी करते तो सील प्लांट दोबारा चालू नहीं हो पाता।
क्षेत्र के लोगों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए। सहायक आयुक्त खाद्य एवं औषधि प्रशासन सतीश कुमार ने बताया कि सील किए गए वाटर प्लांट को खोला नहीं गया है। अगर कहीं से चोरी-चुपके वाटर की सप्लाई की जा रही है, तो कार्रवाई की जाएगी।