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स्वामी शुकदेवानंद विवि में पढ़ाया जाएगा बी.कॉम (एआई) पाठ्यक्रम : कुलपति
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कृत्रिम बुद्धिमत्ता पर दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी में की गई घोषणा
संवाद न्यूज एजेंसी
शाहजहांपुर। स्वामी शुकदेवानंद विश्वविद्यालय के वाणिज्य विभाग में कृत्रिम बुद्धिमत्ता और इसके उभरते क्षेत्र विषय पर दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी की शुक्रवार से शुरुआत हो गई। उद्घाटन सत्र में प्रोफेसर राजेंद्र सिंह विश्वविद्यालय, प्रयागराज की प्रोफेसर प्रियंका सक्सेना मुख्य अतिथि रहीं। इस दौरान कुलपति ने विश्वविद्यालय में शीघ्र ही बी.कॉम (कृत्रिम बुद्धिमत्ता) पाठ्यक्रम शुरू करने की घोषणा की।
संगोष्ठी के संयोजक और वाणिज्य संकाय के डीन प्रोफेसर अनुराग अग्रवाल ने विषय स्थापना करते हुए कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता पर वास्तविक बुद्धिमत्ता का नियंत्रण आवश्यक है। उन्होंने युवाओं की कृत्रिम बुद्धिमत्ता पर बढ़ती निर्भरता पर चिंता व्यक्त की। मुख्य अतिथि प्रियंका सक्सेना ने बताया कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता शिक्षा, स्वास्थ्य, उद्योग, कृषि और प्रशासन सहित कई क्षेत्रों में महत्वपूर्ण बदलाव ला रही है।
उन्होंने विद्यार्थियों और शोधार्थियों से नई तकनीकों को अपनाने और उनके नैतिक उपयोग पर ध्यान देने का आह्वान किया। कुलपति प्रो. पीबी सिंह ने कहा कि उत्पादन और विपणन में कृत्रिम बुद्धिमत्ता के उपयोग से गुणवत्ता बढ़ी है और लागत कम हुई है। उन्होंने कहा कि व्यावसायिक क्षेत्र में कृत्रिम बुद्धिमत्ता की उपयोगिता के देखते हुए विश्वविद्यालय में शीघ्र ही बी. कॉम (एआई) का पाठ्यक्रम प्रारंभ किया जाएगा। उद्घाटन सत्र के बाद दो तकनीकी सत्र आयोजित किए गए। इन सत्रों में शोधार्थियों द्वारा 34 शोधपत्र प्रस्तुत किए गए।
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कार्यक्रम का संचालन डॉ. कमलेश गौतम ने किया। डॉ. देवेंद्र सिंह, डॉ. गौरव सक्सेना, डॉ. अजय कुमार वर्मा, डॉ. सचिन खन्ना, डॉ. संतोष प्रताप सिंह आदि मौजूद रहे।
संवाद न्यूज एजेंसी
शाहजहांपुर। स्वामी शुकदेवानंद विश्वविद्यालय के वाणिज्य विभाग में कृत्रिम बुद्धिमत्ता और इसके उभरते क्षेत्र विषय पर दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी की शुक्रवार से शुरुआत हो गई। उद्घाटन सत्र में प्रोफेसर राजेंद्र सिंह विश्वविद्यालय, प्रयागराज की प्रोफेसर प्रियंका सक्सेना मुख्य अतिथि रहीं। इस दौरान कुलपति ने विश्वविद्यालय में शीघ्र ही बी.कॉम (कृत्रिम बुद्धिमत्ता) पाठ्यक्रम शुरू करने की घोषणा की।
संगोष्ठी के संयोजक और वाणिज्य संकाय के डीन प्रोफेसर अनुराग अग्रवाल ने विषय स्थापना करते हुए कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता पर वास्तविक बुद्धिमत्ता का नियंत्रण आवश्यक है। उन्होंने युवाओं की कृत्रिम बुद्धिमत्ता पर बढ़ती निर्भरता पर चिंता व्यक्त की। मुख्य अतिथि प्रियंका सक्सेना ने बताया कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता शिक्षा, स्वास्थ्य, उद्योग, कृषि और प्रशासन सहित कई क्षेत्रों में महत्वपूर्ण बदलाव ला रही है।
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उन्होंने विद्यार्थियों और शोधार्थियों से नई तकनीकों को अपनाने और उनके नैतिक उपयोग पर ध्यान देने का आह्वान किया। कुलपति प्रो. पीबी सिंह ने कहा कि उत्पादन और विपणन में कृत्रिम बुद्धिमत्ता के उपयोग से गुणवत्ता बढ़ी है और लागत कम हुई है। उन्होंने कहा कि व्यावसायिक क्षेत्र में कृत्रिम बुद्धिमत्ता की उपयोगिता के देखते हुए विश्वविद्यालय में शीघ्र ही बी. कॉम (एआई) का पाठ्यक्रम प्रारंभ किया जाएगा। उद्घाटन सत्र के बाद दो तकनीकी सत्र आयोजित किए गए। इन सत्रों में शोधार्थियों द्वारा 34 शोधपत्र प्रस्तुत किए गए।
कार्यक्रम का संचालन डॉ. कमलेश गौतम ने किया। डॉ. देवेंद्र सिंह, डॉ. गौरव सक्सेना, डॉ. अजय कुमार वर्मा, डॉ. सचिन खन्ना, डॉ. संतोष प्रताप सिंह आदि मौजूद रहे।