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Shahjahanpur News: व्यापारियों ने कहा-बिजली पर 10 फीसदी ईंधन अधिभार ठीक नहीं
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कलक्ट्रेट में ज्ञापन देने पहुंचे व्यापार मंडल के पदाधिकारी। स्रोत : व्यापार मंडल
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राज्य विद्युत नियामक आयोग के अध्यक्ष को संबोधित ज्ञापन सिटी मजिस्ट्रेट को दिया
संवाद न्यूज एजेंसी
शाहजहांपुर। उद्योग व्यापार प्रतिनिधिमंडल ने बिजली बिलों पर लगाए गए 10 फीसदी ईंधन अधिभार का विरोध किया है। संगठन ने इस संबंध में राज्य विद्युत नियामक आयोग के अध्यक्ष को संबोधित एक ज्ञापन सिटी मजिस्ट्रेट रजनीकांत पांडेय को सौंपा। यह अधिभार जून माह में लागू करने की घोषणा की गई है।
जिलाध्यक्ष सौमित्र गुप्ता ने कहा कि नियामक आयोग की अनुमति के बिना यह अधिभार लगाया जा रहा है। उन्होंने बताया कि औद्योगिक और घरेलू बिजली बिलों में पहले से ही निश्चित शुल्क शामिल हैं। वाणिज्यिक बिलों में निश्चित और न्यूनतम शुल्क दोनों लगते हैं। इसके अतिरिक्त, घरेलू, वाणिज्यिक और औद्योगिक बिलों में 7.5 फीसदी बिजली शुल्क भी जोड़ा जा रहा है।
महानगर अध्यक्ष मो. सलाउद्दीन अख्तर ने कहा कि नियामक आयोग हर साल बिजली उत्पादन और खर्चों की समीक्षा करता है। आम जनता की सुनवाई के बाद ही दरों का निर्धारण होता है। ऐसे में सत्र के बीच में दरों में बढ़ोतरी का कोई औचित्य नहीं है। इससे उद्योग और व्यापार भी प्रभावित होगा, जिससे लागत बढ़ेगी।
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ज्ञापन सौंपने वालों में प्रांतीय मंत्री अनूप गुप्ता और जिला कोषाध्यक्ष राजेंद्र गुप्ता, महानगर महामंत्री अजय गुप्ता, रफी खान, महानगर वरिष्ठ मंत्री नफीस खान, नदीम आदि मौजूद रहे।
संवाद न्यूज एजेंसी
शाहजहांपुर। उद्योग व्यापार प्रतिनिधिमंडल ने बिजली बिलों पर लगाए गए 10 फीसदी ईंधन अधिभार का विरोध किया है। संगठन ने इस संबंध में राज्य विद्युत नियामक आयोग के अध्यक्ष को संबोधित एक ज्ञापन सिटी मजिस्ट्रेट रजनीकांत पांडेय को सौंपा। यह अधिभार जून माह में लागू करने की घोषणा की गई है।
जिलाध्यक्ष सौमित्र गुप्ता ने कहा कि नियामक आयोग की अनुमति के बिना यह अधिभार लगाया जा रहा है। उन्होंने बताया कि औद्योगिक और घरेलू बिजली बिलों में पहले से ही निश्चित शुल्क शामिल हैं। वाणिज्यिक बिलों में निश्चित और न्यूनतम शुल्क दोनों लगते हैं। इसके अतिरिक्त, घरेलू, वाणिज्यिक और औद्योगिक बिलों में 7.5 फीसदी बिजली शुल्क भी जोड़ा जा रहा है।
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महानगर अध्यक्ष मो. सलाउद्दीन अख्तर ने कहा कि नियामक आयोग हर साल बिजली उत्पादन और खर्चों की समीक्षा करता है। आम जनता की सुनवाई के बाद ही दरों का निर्धारण होता है। ऐसे में सत्र के बीच में दरों में बढ़ोतरी का कोई औचित्य नहीं है। इससे उद्योग और व्यापार भी प्रभावित होगा, जिससे लागत बढ़ेगी।
ज्ञापन सौंपने वालों में प्रांतीय मंत्री अनूप गुप्ता और जिला कोषाध्यक्ष राजेंद्र गुप्ता, महानगर महामंत्री अजय गुप्ता, रफी खान, महानगर वरिष्ठ मंत्री नफीस खान, नदीम आदि मौजूद रहे।