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अनूठी परंपरा: खुदागंज में गधे पर बैठकर निकले 'लाट साहब', रंग पंचमी पर खेली गई होली; खूब उड़ा अबीर-गुलाल

संवाद न्यूज एजेंसी, शाहजहांपुर Published by: Mukesh Kumar Updated Sun, 08 Mar 2026 02:07 PM IST
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सार

शाहजहांपुर के खुदागंज कस्बे में रंग पंचमी के अवसर पर रविवार को होली खेली गई। इस दौरान कस्बे में पुलिस सुरक्षा के बीच गधे पर बैठाकर लाट साहब का जुलूस निकाला गया। लोगों ने जमकर रंगों की बौछार की, जिससे हर कोई सराबोर नजर आया। 

Laat Saheb julus took place on Rangpanchami in Khudaganj Shahjahanpur
खुदागंज में निकाला गया लाट साहब का जुलूस - फोटो : संवाद
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विस्तार

शाहजहांपुर के खुदागंज कस्बे में होली के पांचवें दिन रविवार को रंग पंचमी पर लोग रंग और गुलाल से सराबोर हो गए। अनूठी परंपरा के तहत होली खेलते हुए लाट साहब को गधे पर बैठाकर घुमाया गया। इस दौरान सुरक्षा के व्यापक इंतजाम रहे। सुबह से ही लोग होलिका दहन स्थल पर पहुंचने लगे। इसके बाद रंग शुरू हुआ। इसके बाद बच्चे, बड़े-बुजुर्ग तक लाट साहब के जुलूस में शामिल होने के लिए लक्ष्मीपुर में एकत्र हो गए। वहां लाट साहब को गधे पर बैठाकर घुमाया गया। इस दौरान गीतों पर जमकर डांस किया। 

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जुलूस के दौरान थाना प्रभारी सत्य प्रकाश सिंह की निगरानी में पुलिस ने लाट साहब को सुरक्षा घेरा लगा रखा था। डीएम सदानंद सरोज एवं सीओ ज्योति यादव भी निगाह बनाए रहीं। थाना प्रभारी ने लाट साहब का स्वागत किया। जुलूस में पूर्व नगर पंचायत अध्यक्ष सुधीर सिंह, सभासद सौरव गुप्ता, विनोद सिंह, प्रवीण मिश्रा उर्फ संजू मिश्रा, पूर्व प्रधान चिरंजीत शुक्ला आदि लोग मौजूद रहे। 
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Laat Saheb julus took place on Rangpanchami in Khudaganj Shahjahanpur
ढोल नगाड़े के साथ निकला जुलूस - फोटो : संवाद
वर्षों से चली आ रही अनूठी परंपरा 
खुदागंज में होलिका दहन के पांचवें दिन रंग पंचमी पर लाट साहब का जुलूस निकाला जाता है। कई दशक से यह परंपरा चली आ रही है। इसी दिन पूरे कस्बे में खूब रंग खेला जाता है। रंगपंचमी पर निकलने वाला लाट साहब का जुलूस मुख्य आकर्षण का केंद्र होता है। कस्बे के ही एक व्यक्ति को लाट साहब बनाकर गधे पर बैठाया जाता है। उसके पीछे लोग होली खेलते हुए और नाचते हुए चलते हैं। 

रविवार को इसी अनूठी परंपरा का निर्वहन किया गया। लोग बताते हैं कि यह अनूठी परपंपरा अंग्रेजों के जमाने से चली आ रही है। परंपरा के अनुसार यहां होली वाले दिन रंग नहीं खेला जाता है। रंग पंचमी पर इस कदर रंगों की बारिश होती है कि हर कोई सराबोर हो जाता है।  


 
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