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बिजली संकट : हर आठवां ट्रांसफॉर्मर क्षमता से ज्यादा झेल रहा है बोझ
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शाहजहांपुर में वर्कशाॅप में रखे ट्रांसफॉर्मर। स्रोत: बिजली निगम
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शाहजहांपुर। सितम ढा रही गर्मी के कारण बिजली की मांग बढ़ गई है। ऐसे में शहर में करीब 800 में 100 ट्रांसफॉर्मर ओवरलोड हैं। ओवरलाेडिंग के चलते ट्रांसफॉर्मर गर्म होकर तपने लगते हैं, साथ ही बंच लाइन और फ्यूज जलने के साथ तार टूट कर गिर जाते हैं। जिस कारण फॉल्ट के कारण बिजली जाने से उपभोक्ताओं को परेशानी होती है।
शहर में नौ उपकेंद्रों से करीब 80 हजार उपभोक्ताओं को बिजली की आपूर्ति दी जाती है। उपकेंद्रों से मोहल्लों तक 800 ट्रांसफॉर्मरों के जरिये बिजली का नेटवर्क टिका है। सर्दी में बिजली की खपत कम होने पर ट्रांसफॉर्मर अंडरलोड थे। भीषण गर्मी में एसी, कूलर और पंखे चलने से लोड बढ़ने के कारण ट्रांसफॉर्मर जवाब देने लगे हैं।
ट्रांसफॉर्मरों पर क्षमता से अधिक लोड बढ़ने पर गर्म होकर फुंकने का डर रहता है। इसके अलावा तार टूटने, लीड जलने की समस्या आती है। कर्मचारियों के अनुसार, ओवरलोड ट्रांसफॉर्मरों को चिह्नित कर उनकी निगहबानी की जाती है। ऐसे में ब्रांच लाइन को खोलकर कुछ इलाकों की आपूर्ति को बाधित कर लोड सामान्य कर काम चलाया जाता है।
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इन इलाकों में हैं ट्रांसफॉर्मर पर है अधिक भार
हथौड़ा में चौभुर्जी, बाबूजई, बिजलीपुरा, दुर्गा एंक्लेव, रिंग फैक्टरी, ब्रिज विहार, रेती, पूरन वाली मस्जिद, लंगोटी बाबा मंदिर, पूरब वाली मस्जिद, इशहाक मियां की मजार, बहादुरगंज क्षेत्र में टेलीफोन एक्सचेंज, टीका स्टैंड, आलम की ठेकी, रोजा में मालगोदाम, फत्तेपुर चुंगी, ओमकार मिल के पास, सराय काइयां चौकी, पंप नंबर एक, निगोही रोड उपकेंद्र के अंतर्गत ऊंची मस्जिद, बाला मंदिर, ककरा में रानी महल, गुलिस्ता फर्नीचर, हद्दफ चौकी, गोविंदगंज क्षेत्र में आगरा कैफे, अलका गेस्ट हाउस, निशांत टॉकीज, दुर्गा होटल, गन्ना ऑफिस और अब्दुल्लागंज क्षेत्र में दस स्थानों पर ट्रांसफॉर्मर ओवरलोड है। यहां पर क्षमतावृद्धि की तैयारी है।
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ग्रामीण इलाकों में रोज फुंक रहे 20 से 22 ट्रांसफॉर्मर
गर्मी में बिजली की मांग बढ़ने पर ग्रामीण इलाकों में भी बिजली का संकट है। अधिकतर जगहों पर कम कनेक्शन होने पर 10 से 16 केवीए के ट्रांसफॉर्मर लगाए गए हैं। गांवों का विकास होने पर लोगों ने कनेक्शन कराए और एसी और कूलर का उपयोग शुरू किया तो यहां भी ओवरलोडिंग की समस्या होने लगी। ऐसे विद्युत निगम के वर्कशाॅप में रोजाना ही 20 से 22 ट्रांसफॉर्मर खराब होकर पहुंच रहे हैं।
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बढ़ी मांग, सीमित आपूर्ति
गर्मी में शहर में बिजली की मांग लगातार बढ़ रही है। शाम और रात के समय मांग अपने चरम पर पहुंच जाती है। ऐसे में कई फीडर और ट्रांसफॉर्मरों पर अतिरिक्त दबाव बढ़ जाता है, जिससे फॉल्ट की घटनाएं बढ़ती हैं। निगम का दावा है कि मांग के अनुरूप आपूर्ति बनाए रखने के प्रयास किए जा रहे हैं, लेकिन ओवरलोडिंग चुनौती बनी हुई है।
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ओवरलोडिंग से होने वाली समस्याएं
-ट्रांसफॉर्मर का अत्यधिक गर्म होना
-फ्यूज उड़ना और बंच लाइन जलना
-बिजली आपूर्ति में बार-बार बाधा
-तार टूटने और आग लगने का खतरा
-उपकरणों की कार्यक्षमता और आयु पर असर
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एक नजर में बिजली खपत
-100 से 125 मेगावाट बिजली दिसंबर में खर्च हो रही थी।
-200 मेगावाट बिजली फरवरी की शुरुआत में खर्च हुई।
-216 मेगावाट बिजली 15 फरवरी को खर्च की गई। मार्च में भी यही स्थिति बनी रही।
-340 मेगावाट बिजली की खपत 21 मई को हुई।
-372 मेगावाट बिजली सोमवार को जिले में खर्च की गई।
(पारेषण केंद्र के एक्सईएन मोहित श्रीवास्तव ने जैसा बताया)
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हथौड़ा उपकेंद्र से कॉलोनी में बिजली आती है। हल्की से हवा चलने या ज्यादा गर्मी होने पर बिजली की आवाजाही शुरू हो जाती है। इससे काफी दिक्कत आती है।
-अंकित मिश्रा, बृज विहार कॉलोनी
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गर्मी आने के साथ ही बिजली का संकट बरकरार है। रात में बिजली की आवाजाही ज्यादा है। उपकेंद्र पर ट्रांसफॉर्मर ओवरलोड होने के बारे में बताया जाता है।
-फराज इदरीसी, मोहल्ला जलालनगर
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शहर में 24, गांव में 18 घंटे बिजली देने के हैं निर्देश
नगर निगम क्षेत्र में 24 घंटे तो जलालाबाद, पुवायां और तिलहर नगर पालिका में साढ़े 21 घंटे बिजली देने के निर्देश हैं। यहां पर सुबह एक घंटे और शाम को डेढ़ घंटे कटौती की जाती है। इसी तरह ग्रामीण इलाकों में 18 घंटे बिजली देने का प्रावधान है। यहां पर दिन में तीन-तीन घंटे की कटौती की जाती है। हालांकि, मध्यांचल से पर्याप्त बिजली मिलती है। रोस्टरिंग के समय या फॉल्ट होने पर ही बिजली गुल होती है।
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ओवरलोड ट्रांसफॉर्मराें को चिह्नित कर लिया गया है। बिजनेस प्लान के तहत ट्रांसफार्मरों का लोड बढ़ाने की दिशा में काम होगा। इससे उपभोक्ताओं को राहत मिलेगी।
-आरपी सिंह, अधिशासी अभियंता
शहर में नौ उपकेंद्रों से करीब 80 हजार उपभोक्ताओं को बिजली की आपूर्ति दी जाती है। उपकेंद्रों से मोहल्लों तक 800 ट्रांसफॉर्मरों के जरिये बिजली का नेटवर्क टिका है। सर्दी में बिजली की खपत कम होने पर ट्रांसफॉर्मर अंडरलोड थे। भीषण गर्मी में एसी, कूलर और पंखे चलने से लोड बढ़ने के कारण ट्रांसफॉर्मर जवाब देने लगे हैं।
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ट्रांसफॉर्मरों पर क्षमता से अधिक लोड बढ़ने पर गर्म होकर फुंकने का डर रहता है। इसके अलावा तार टूटने, लीड जलने की समस्या आती है। कर्मचारियों के अनुसार, ओवरलोड ट्रांसफॉर्मरों को चिह्नित कर उनकी निगहबानी की जाती है। ऐसे में ब्रांच लाइन को खोलकर कुछ इलाकों की आपूर्ति को बाधित कर लोड सामान्य कर काम चलाया जाता है।
इन इलाकों में हैं ट्रांसफॉर्मर पर है अधिक भार
हथौड़ा में चौभुर्जी, बाबूजई, बिजलीपुरा, दुर्गा एंक्लेव, रिंग फैक्टरी, ब्रिज विहार, रेती, पूरन वाली मस्जिद, लंगोटी बाबा मंदिर, पूरब वाली मस्जिद, इशहाक मियां की मजार, बहादुरगंज क्षेत्र में टेलीफोन एक्सचेंज, टीका स्टैंड, आलम की ठेकी, रोजा में मालगोदाम, फत्तेपुर चुंगी, ओमकार मिल के पास, सराय काइयां चौकी, पंप नंबर एक, निगोही रोड उपकेंद्र के अंतर्गत ऊंची मस्जिद, बाला मंदिर, ककरा में रानी महल, गुलिस्ता फर्नीचर, हद्दफ चौकी, गोविंदगंज क्षेत्र में आगरा कैफे, अलका गेस्ट हाउस, निशांत टॉकीज, दुर्गा होटल, गन्ना ऑफिस और अब्दुल्लागंज क्षेत्र में दस स्थानों पर ट्रांसफॉर्मर ओवरलोड है। यहां पर क्षमतावृद्धि की तैयारी है।
ग्रामीण इलाकों में रोज फुंक रहे 20 से 22 ट्रांसफॉर्मर
गर्मी में बिजली की मांग बढ़ने पर ग्रामीण इलाकों में भी बिजली का संकट है। अधिकतर जगहों पर कम कनेक्शन होने पर 10 से 16 केवीए के ट्रांसफॉर्मर लगाए गए हैं। गांवों का विकास होने पर लोगों ने कनेक्शन कराए और एसी और कूलर का उपयोग शुरू किया तो यहां भी ओवरलोडिंग की समस्या होने लगी। ऐसे विद्युत निगम के वर्कशाॅप में रोजाना ही 20 से 22 ट्रांसफॉर्मर खराब होकर पहुंच रहे हैं।
बढ़ी मांग, सीमित आपूर्ति
गर्मी में शहर में बिजली की मांग लगातार बढ़ रही है। शाम और रात के समय मांग अपने चरम पर पहुंच जाती है। ऐसे में कई फीडर और ट्रांसफॉर्मरों पर अतिरिक्त दबाव बढ़ जाता है, जिससे फॉल्ट की घटनाएं बढ़ती हैं। निगम का दावा है कि मांग के अनुरूप आपूर्ति बनाए रखने के प्रयास किए जा रहे हैं, लेकिन ओवरलोडिंग चुनौती बनी हुई है।
ओवरलोडिंग से होने वाली समस्याएं
-ट्रांसफॉर्मर का अत्यधिक गर्म होना
-फ्यूज उड़ना और बंच लाइन जलना
-बिजली आपूर्ति में बार-बार बाधा
-तार टूटने और आग लगने का खतरा
-उपकरणों की कार्यक्षमता और आयु पर असर
एक नजर में बिजली खपत
-100 से 125 मेगावाट बिजली दिसंबर में खर्च हो रही थी।
-200 मेगावाट बिजली फरवरी की शुरुआत में खर्च हुई।
-216 मेगावाट बिजली 15 फरवरी को खर्च की गई। मार्च में भी यही स्थिति बनी रही।
-340 मेगावाट बिजली की खपत 21 मई को हुई।
-372 मेगावाट बिजली सोमवार को जिले में खर्च की गई।
(पारेषण केंद्र के एक्सईएन मोहित श्रीवास्तव ने जैसा बताया)
हथौड़ा उपकेंद्र से कॉलोनी में बिजली आती है। हल्की से हवा चलने या ज्यादा गर्मी होने पर बिजली की आवाजाही शुरू हो जाती है। इससे काफी दिक्कत आती है।
-अंकित मिश्रा, बृज विहार कॉलोनी
गर्मी आने के साथ ही बिजली का संकट बरकरार है। रात में बिजली की आवाजाही ज्यादा है। उपकेंद्र पर ट्रांसफॉर्मर ओवरलोड होने के बारे में बताया जाता है।
-फराज इदरीसी, मोहल्ला जलालनगर
शहर में 24, गांव में 18 घंटे बिजली देने के हैं निर्देश
नगर निगम क्षेत्र में 24 घंटे तो जलालाबाद, पुवायां और तिलहर नगर पालिका में साढ़े 21 घंटे बिजली देने के निर्देश हैं। यहां पर सुबह एक घंटे और शाम को डेढ़ घंटे कटौती की जाती है। इसी तरह ग्रामीण इलाकों में 18 घंटे बिजली देने का प्रावधान है। यहां पर दिन में तीन-तीन घंटे की कटौती की जाती है। हालांकि, मध्यांचल से पर्याप्त बिजली मिलती है। रोस्टरिंग के समय या फॉल्ट होने पर ही बिजली गुल होती है।
ओवरलोड ट्रांसफॉर्मराें को चिह्नित कर लिया गया है। बिजनेस प्लान के तहत ट्रांसफार्मरों का लोड बढ़ाने की दिशा में काम होगा। इससे उपभोक्ताओं को राहत मिलेगी।
-आरपी सिंह, अधिशासी अभियंता

शाहजहांपुर में वर्कशाॅप में रखे ट्रांसफॉर्मर। स्रोत: बिजली निगम

शाहजहांपुर में वर्कशाॅप में रखे ट्रांसफॉर्मर। स्रोत: बिजली निगम